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डाउनलोड करेंजोधपुर। दस दिन से देश के पश्चिमी सीमा के आसमान में गूंज रही फाइटर जेट्स की गूंज फिलहाल शांत हो गई है। पश्चिमी सीमा पर स्थित देश के 27 एयर बेस से दस दिन में 24 ही घंटे पांच हजार से अधिक उड़ान भर आसमान में अपनी श्रेष्ठता साबित करने के बाद अब इंडियन एयर फोर्स का फोकस अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ऑपरेशन गगन शक्ति चीन से सटी पूर्वी सीमा की तरफ शिफ्ट हो गया है। इसके साथ ही अब एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने की तैयारी को परखा जाएगा। इस कारण इतना बड़ा युद्धाभ्यास…
- यह पहला अवसर है जब इंडियन एयर फोर्स एक साथ दोनों मोर्चों पर युद्धाभ्यास कर रही है। इसके माध्यम से एयर फोर्स अपनी ताकत और कमजोरियों को परख रही है कि यदि एक साथ पाकिस्तान और चीन के मोर्चे पर युद्ध छिड़ जाए तो उसे कौनसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऑपरेशन गगन शक्ति के माध्यम से यह देखा जा रहा है कि दोनों मोर्चों युद्ध के हालात से कैसे निपटा जाए। इस युद्धाभ्यास के दौरान पता चलने वाली कमियों को आने वाले समय में दूर किया जाएगा। एक मोर्चे से दूसरे मोर्चे पर फाइटर जेट्स को भेजने के साथ ही अन्य आवश्यक उपकरणों को शिफ्ट करने में लगने वाले समय के साथ अन्य कई पैरामीटर को परखा जा रहा है।
यह है रणनीति
- सैन्य सूत्रों का कहना है कि दोनों मोर्चों पर युद्ध की आशंका बहुत कम रहती है, लेकिन सेना को हमेशा सभी तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार रहना पड़ता है। ऐसे हालात में भारतीय सेना का पहला मकसद रहेगा कि तेजी के साथ रणक्षेत्र में सामरिक बढ़त हासिल कर ली जाए। इसके बाद एयर फोर्स दुश्मन के उस क्षेत्र के आकाश में अपना वर्चस्व स्थापित करे। साथ ही दुश्मन की सप्लाई लाइन को तोड़ दे ताकि उनकी सेना का आगे बढ़ना थम जाए।
अब तक यह हुआ युद्धाभ्यास में
- ऑपरेशन गगन शक्ति के तहत अब तक पश्चिमी सीमा से सटे 27 एयर बेस को काम में लिया गया। इनमें से 11 एयर बेस दक्षिण पश्चिम कमान के और 16 एयर बेस पश्चिमी कमान के है। इन एयर बेस से सभी तरह के फाइटर जेट्स, मालवाहक विमानों और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर्स ने चंद दिनों में ही पांच हजार से अधिक उड़ान भरी। एक साथ बड़ी संख्या में उड़ने वाले सभी विमानों के सामंजस्य को बनाए रखना अपने आप में सबसे बड़ी चुनौती रही। इसके बावजूद यह चरण सफलतापूर्वक पूरा होने से एयर फोर्स के अधिकारी उत्साहित है। अब वे पूरे जोश के साथ चीन से सटी सीमा पर स्थित पंद्रह एयर बेस से इसे फिर से दोहराएंगे।
यह है पूर्वी सीमा पर चुनौती
- पूर्वी सीमा की भौगोलिक स्थिति पश्चिमी सीमा से काफी उलट है। वहां ऊंचे पहाड़ों के कारण फाइटर्स को काफी अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरनी पड़ेगी। ऐसे में पायलट्स के कौशल का परीक्षण होगा कि वे एकदम से नए क्षेत्र के अनुरूप स्वयं को तेजी के साथ कैसे ढालते है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि एक फाइटर को दोनों मोर्चों पर कैसे काम में लिया जा सकता है।
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