बिज़नेस

  • Home
  • Business
  • Indian Companies Revenue expected to grow by 12.8% in April-June quarter highest in last 3 years
--Advertisement--

कंपनियों का रेवेन्यू अप्रैल-जून तिमाही में 12.8% बढ़ने की उम्मीद, 3 साल में सबसे ज्यादा ग्रोथ: रिपोर्ट

क्रिसिल रिसर्च ने 350 कंपनियों के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।

Danik Bhaskar

Jul 10, 2018, 10:50 AM IST
मुंबई. अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय कंपनियों का रेवेन्यू औसतन 12.8% बढ़ने की उम्मीद है। यह 3 साल में सबसे तेज ग्रोथ होगी। यह लगातार तीसरी तिमाही होगी जब रेवेन्यू में 10% से ज्यादा का इजाफा होगा। हालांकि इससे पहले दो तिमाही में ऊंची ग्रोथ बेस इफ़ेक्ट के कारण रही थी। नोटबंदी और जीएसटी के कारण एक साल पहले की तिमाहियों में रेवेन्यू ग्रोथ कम थी। क्रिसिल रिसर्च ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण प्रॉफिट मार्जिन 0.20% कम रहने के आसार हैं। यह इस लिहाज से बेहतर है कि पिछली तिमाहियों में प्रॉफिट मार्जिन में 2.5% तक गिरावट आई थी। ज्यादातर ब्रोकरेज कंपनियां प्रति शेयर आय में 20 से 22% ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं।
क्रिसिल रिसर्च ने 350 कंपनियों के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस और ऑयल सेक्टर की कंपनियां नहीं हैं। एनएसई में 50% वेटेज इन्हीं कंपनियों का है। जनवरी-मार्च तिमाही में एफएमसीजी मेटल और कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने अनुमान से बेहतर नतीजे दिए थे। ऑटोमोबाइल, ऑयल और फार्मा कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहा था। इस बार ऑटो कंपनियों से अच्छे नतीजों की उम्मीद है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को पिछले साल के कम बेस का फायदा मिलेगा। ग्रामीण इलाकों में वाहनों की डिमांड बढ़ी है। इसके अलावा निर्यात में बढ़ोतरी का भी असर दिखेगा। आईटी कंपनियों को रुपए की कमजोरी का फायदा मिलेगा। आम तौर पर पहली और दूसरी तिमाही में आईटी फर्मों का प्रदर्शन अच्छा रहता है। एसेट क्वालिटी में भी सुधार की उम्मीद है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सरकारी बैंकों का मुनाफा प्रभावित होगा। रिटेल बैंक और एनबीएफसी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। कंज्यूमर डिमांड में रिकवरी और ट्रेड चैनल में स्थिरता का असर एफएमसीजी कंपनियों पर दिखेगा।
फार्मा सेक्टर को कमजोर रुपए का फायदा मिलेगा। घरेलू बिजनेस भी अच्छा रहने के आसार हैं। अमेरिका में कीमतों पर दबाव का असर दिखेगा। मेटल्स कमोडिटी के दाम के साथ डिमांड में भी बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा। माइनिंग कंपनियों के लिए ट्रेड वॉर चिंता का विषय है। अपस्ट्रीम (उत्पादन) कंपनियों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का फायदा मिलेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रुपए में कमजोरी का नुकसान होगा। मीडिया कंपनियों को एफएमसीजी कंपनियों द्वारा विज्ञापन पर ज्यादा खर्च का फायदा मिलेगा। सिनेमा कंपनियों का रेवेन्यू कम रहेगा।

Click to listen..