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डाउनलोड करेंआदेश कुमार गुप्त
खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
न्यूज़ीलैंड दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम की अग्निपरीक्षा जारी है. उसे अभी भी अपनी पहली जीत की दरकार है.
पाँच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ के शुरूआती दो मैच गंवाने के बाद ऑकलैंड में खेला गया तीसरा मैच भारत जीतते-जीतते रह गया.
आख़िरी गेंद पर भारत को जीत के लिए दो रन बनाने थे लेकिन केवल एक रन बन सका और मैच टाई पर समाप्त हुआ.
अब भारत और न्यूज़ीलैंड हैमिल्टन में चौथे एकदिवसीय मैच के दौरान मंगलवार को आमने-सामने होंगे.
एक बार फिर वही सवाल भारतीय क्रिकेट टीम के सामने है कि क्या भारत इस साल विदेशी दौरे पर अपनी पहली जीत दर्ज कर पाएगा? भारत ने पिछले मैच में जीत के लिए कड़ा संघर्ष किया लेकिन वहां वह हार भी सकता था.
भरोसे का सवालआख़िरी ओवर में जीत के लिए 19 रन बनाना कोई आसान काम नही है. न्यूज़ीलैंड के कप्तान ब्रैंडन मैकुलम ने कोरी एंडरसन को गेंद थमाई जो कोई जाने-पहचाने गेंदबाज़ नही है. दो वाइड गेंद करना इस बात का संकेत देता है.
एंडरसन ने अभी तक केवल 12 एकदिवसीय मैच खेले हैं और उनकी पहचान एक तेज़-तर्रार बल्लेबाज़ के रूप में अधिक है, इसके बावजूद रवींद्र जाडेजा से उनकी नाबाद 66 रनों की साहसी पारी का श्रेय छीना नही जा सकता.
रविंद्र जाडेजा का यह पिछली 10 पारियों में लगाया गया एकमात्र अर्धशतक है. इस दौरान उन्होने 13 विकेट ज़रूर लिए है.
दूसरी तरफ़ आर अश्विन ने भी पिछले मैच में अपने एकदिवसीय क्रिकेट करियर का पहला अर्धशतक जमाते हुए 65 रन बनाए. गेंदबाज़ी में उन्होने पिछले 10 मैचो में 10 विकेट लिए है. दक्षिण अफ्रीका में खेले गए तीन और न्यूज़ीलैंड में भी अभी तक खेले गए तीन मैचों में अश्विन के हाथ केवल 2 विकेट लगे है.
इसके बावजूद कप्तान धोनी का भरोसा उन पर बरक़रार है और वह नियमित गेंदबाज़ के तौर पर टीम में मौजूद है. तेज़ गेंदबाज़ी में ईशांत शर्मा गए तो वरूण एरॉन आए लेकिन हाल वही ढाक के तीन पात रहा.
भारतीय गेंदबाज़ी का ऑकलैंड में यह हाल था कि एक समय न्यूज़ीलैंड का स्कोर 2 विकेट खोकर 189 रन था यानी भारत एक-एक विकेट के लिए तरस रहा था.
ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड की फ़िल्डिंग बेहद कमज़ोर थी, उनके क्षेत्ररक्षकों ने एक के बाद एक कई कैच छोड़े, अन्यथा सिरीज़ का फ़ैसला ऑकलैंड में ही हो गया होता.
बराबरी या हारभारत अब बाकी बचे दोनो मैच जीतकर सिरीज़ को केवल बराबरी पर समाप्त करा सकता है जीत नहीं सकता. इस दौरे पर भारतीय टीम के प्रदर्शन को देखते हुए ऐसा कहना मुश्किल ही है कि भारत सिरीज़ बचा पाएगा.
सलामी जोडी शिखर धवन और रोहित शर्मा ने कुछ अच्छी शुरूआत दी तो मिडिल आर्डर ढह गया.
चौथे एकदिवसीय मैच से पहले आर अश्विन ने कहा है कि भारत से बाहर के विकेट पर किस तरह की गेंदबाज़ी की जाए इसे सीखना ज़रूरी है. अब अगर हर विदेशी दौरा सिर्फ सीखने के लिए होगा तब तो भारतीय टीम जीतने से रही.
वैसे न्यूज़ीलैंड दौरे पर पहली बार भारतीय सलामी जोड़ी ने कुछ खुलकर हाथ दिखाए जिसका असर अन्य बल्लेबाज़ों पर भी पडा और न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ दबाव में आए.
अब हैमिल्टन में भारतीय टीम हार से बचे तो बात बने वर्ना विदेशी ज़मीन पर साल की पहली सिरीज़ गवांने का ख़तरा तो सिर पर मंडरा ही रहा है.
सुरेश रैना कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से अभयदान पाकर भी कुछ ख़ास नही कर पा रहे है. पिछली 15 पारियों में उनका उच्चतम स्कोर 39 रन है. एक बल्लेबाज़ के तौर पर रैना की मौजूदगी कई सवाल पैदा कर रही है. कप्तान धोनी और उनकी टीम विश्व कप की चिंता छोड़े उसमें अभी वक़्त है, लेकिन उससे पहले न्यूज़ीलैंड में जारी अग्निपरीक्षा से तो पार पाएं.
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