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डाउनलोड करेंइंदौर। देश के सबसे साफ शहर का खिताब लगातार दूसरी बार जीतने वाले इंदौर शहर की सफाई को दिल्ली से आए सर्वे दल ने 18 बिंदुओं पर आंका था। इन सभी बिंदुओं पर इंदौर ने देश के 4000 शहरों को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। सर्वे दल ने गलियों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, शहर के शौचालयों, ड्रेनेज लाइन, ट्रेंचिंग ग्रांउड सहित शहरभर में घूमकर सफाई देखी थी। बता दें कि सर्वे में 4000 अंक निधारित किए गए थे।
ऐसे मिला नंबर वन का ताज
- सडकों, फुटपाथ और खाली जगह पर फैला कचरा इंदौर की सबसे बड़ी समस्या थी। शहर में सैकड़ों कचरा पेटियां थीं, लेकिन वो सफाई की जगह गंदगी फैला रही थीं।
- सडकों पर आवारा पशु सफाई व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे थे और ट्रैफिक को भी। साफ़ सफाई को लेकर लोगों का माइंड सेट बदलना भी आसान नहीं था।
- इन सबसे निपटने के लिए नगर-निगम ने स्ट्रेटेजी बनाकर काम किया। सही डिस्पोजल के लिए सीधे सोर्स से कचरा उठाने की योजना बनाई।
- शहरभर में लगी बड़ी कचरा पेटियों को हटाकर कचरा उठाने के लिए 200 से ज्यादा छोटी गाड़ियां लगाई गईं।
- ये गाड़ियां अब हर घर पर दस्तक देकर वहां से कचरा उठा लेती हैं। घरों के बाद इन गाड़ियों को बाजारों से कचरा उठाने की जिम्मेदारी दी गई।
- लोगों के माइंड सेट को बदलने के लिए कैंपेन चलाया गया। पोस्टर्स, होर्डिंग लगाए गए।
- पहले सिंगर कैलाश खैर और बाद में सिंगर शान से ख़ास प्रोमो सांग्स बनवाए। इंदौर को स्वच्छ बनाना है ये गाना गूंजते ही लोग डस्टबीन लेकर गाड़ियों के पास पहुंच जाते हैं।
- कचरे के डिस्पोजल के लिए शहर में 6 हब बनाए गए, यहां से कचरा ट्रेन्चिंग ग्राउंड पर भेजने की व्यवस्था की गई।
- आवारा पशुओं को सड़क से हटाने के लिए विशेष अभियान छेड़ा गया। शहर की सीमा के भीतर गाय, भैंस पालने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
- सडकों पर घूम रहे आवारा जानवरों को पकड़कर शहर के बाहर गौशालाओं को या फिर जरूरतमंद लोगों को दे दिया गया।
- गंदी सडकों की सफाई के लिए रात में सफाई अभियान शुरू किया गया। साल भर में इसका असर नजर आने लगा, जिन सडकों पर कचरा बिखरा रहता था अब वो साफ़ सुथरी हो गई हैं।
- संकरी जगहों पर सफाई नहीं हो पाने से जर्मनी से खास सफाई मशीन मंगाई गई। करोड़ों की कीमत से आईं ये मशीन संकरे क्षेत्रों में घूमकर सड़कों की सफाई करती हैं।
- इसके अलावा निगम ने गीला और सूखा कचना घरों से ही अलग-अलग करने को कहा। इसका असर ये हुआ कि खाद में परिवर्तित होने वाले कचरे को सीधे खाद बनाने वाले प्लांट तक पहुंचा दिया जाता है।
महापौर ने दिया धन्यवाद
लगातार दूसरे साल इंदौर के नंबर वन बनने पर महापौर मालिनी गौड़ ने शहरवासियों को धन्यवाद दिया है। महापौर ने कहा कि सभी के सहयोग व प्रयासों से सतत दूसरी बार मां अहिल्या की पावन नगरी इंदौर नंबर वन रहा है। यह सफलता शहर की स्वच्छता प्रेमी जनता, जनप्रतिनिधि, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी और मीडिया के अथक प्रयासों से मिल सकी है।
नंबर वन बनाए रखने के लिए नगर निगम ने ये किया
- 2016 में लिटरबिन की संख्या 1500 थी, जिसकी संख्या 2018 में 3000 से ज्यादा हो गई।
- गीला-सूखा कचरा फेंकने के लिए अलग-अलग नीले-हरे लिटरबिन रखे गए।
- शहर को स्वच्छ रखने के लिए 7 हजार सफाईकर्मी तैनात हैं, जिनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं।
- 200 से ज्यादा कचरा गाड़ी के साथ ही 24 घंटे शहर की सड़कों को साफ किया जाता है।
- कर्मचारी दो शिफ्ट में सफाई करते हैं। इनमें 60 प्रतिशत दिन में और 40 प्रतिशत रात में सफाई व्यवस्था देखते हैं।
- प्रति व्यक्ति को 500 से 800 मीटर लंबा हिस्सा आवंटित किया गया है।
- रहवासी क्षेत्र में दिन में एक बार और व्यावसायिक क्षेत्र में दो से तीन बार सफाई की जाती है
- इंटरनेशनल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत 200 सफाईकर्मी गाड़ियों के जरिए सड़कों को साफ रखते हैं।
- सफाई के लिए विशेषतौर पर विदेश से दो सफाई मशीन मंगवाई गई हैं, जिनमें से एक संकरी गलियों में भी घुसकर सफाई कर सकती है।
- रात में इन मशीनों से शहर की 500 किमी लंबी मुख्य सड़क की सफाई की जाती है।
- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए सवा 5 से ज्यादा गाड़ियां लगाई गई हैं। जिनमें गीला-सूखा कचरा अलग रखने की व्यवस्था है।
- इसके अलावा सेनिटरी पेड और डाइपर के लिए गाड़ी में अलग से डिब्बा लगाया गया है।
- निगम ने गंदगी फैलाने वालों पर एक लाख रुपए तक, थूकने, खुले में शौच करने वालों पर 500 रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान कर रखा है।
- शहरभर में निशुल्क और पेड टायलेटों की संख्या 3 हजार से ज्यादा है।
-10 कचरा ट्रांसफर स्टेशन में लगीं अाधुनिक मशीनों से खाद का निर्माण किया जा रहा है।
ये थे सर्वे का मुख्य बिंदु
- कॉलोनियों, बस्तियों, पुराना शहर, अव्यवस्थित और व्यवस्थित बसा क्षेत्र साफ है या नहीं?
- महिला और पुलिस पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट। क्या इन्हें बच्चे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- टॉयलेट की सफाई के साथ रोशनदान, जलप्रदाय, लाइट के इंतजाम।
- टॉयलेट एरिया में ड्रेनेज सिस्टम।
- टॉयलेट में स्वच्छ भारत मिशन के संदेश वाले होर्डिंग, बैनर, वॉल पेंटिंग।
- मार्केट में सफाई व्यवस्था।
- सब्जी, फल, मीट या फिश मार्केट में साइट कंपोस्टिंग, वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन और प्राइमरी वेस्ट कलेक्शन सेंटर की जानकारी।
- सफाई को लेकर लगे साइन बोर्ड।
- रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सफाई व्यवस्था।
- मुख्य स्टेशन पर रेलवे ट्रैक या प्लेटफॉर्म के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में कहीं खुले में शौच तो नहीं की जा रही?
- शहर में लगे डस्टबीन के बारे में जानकारी और उसके इस्तेमाल को लेकर जागरूकता।
ये सवाल पूछे थे टीम ने
- क्या आपको यह जानकारी है कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में हिस्सा ले रहा है?
- आपका क्षेत्र क्या पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा साफ है?
- क्या इस साल आपने व्यावसायिक क्षेत्रों में लगे लिटरबिन का उपयोग शुरू किया है?
- क्या आप इस साल पृथकीकृत (गीला-सूखा) घर-घर कचरा संग्रहण से संतुष्ट हैं?
- क्या पिछले साल की अपेक्षा मूत्रालय-शौचालय की व्यवस्था बढ़ी है जिसके कारण लोगों ने खुले में पेशाब और शौच करना बंद किया है?
- क्या सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय पहले की अपेक्षा ज्यादा साफ हैं और उन तक पहुंचना आसान है?
चार दिन में 200 से ज्यादा स्थानों पर किया था सर्वे
चार दिन के सर्वे में कार्वी इंटरनेशनल ने 200 से ज्यादा स्थानों पर निरीक्षण किया। मंडी, बस्ती, ट्रेंचिंग ग्राउंड, शौचालय, बगीचों में बनने वाली खाद, कर्मचारियों की स्थिति और लाेगों की बातचीत के साथ टीम डेढ़ लाख पेज के दस्तावेज भी साथ ले गई है।
स्वच्छता के प्रयासों को दिल खोलकर सराहा था
- टीम ने 590 लोगों से बात की। इनमें सिर्फ 6 लोगों ने नेगेटिव जवाब दिए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि कुल 4000 अंकों में से जनता के फीडबैक के पूरे 1400 अंक हमें मिले।
स्वच्छता सर्वेक्षण पर एक नजर
- पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी।
- 2018 में देश के 4041 शहर में में पहुंची सर्वे टीम।
- चार जनवरी से शुरू हुआ सर्वे 10 मार्च तक चला था।
- 2017 में 434 शहरों की जांची गई थी सफाई व्यवस्था।
- मोदी सरकार ने स्वच्छता के लिए सेवा कर के रूप में 0.5 फीसदी सेस लगा रखा है।
- सरकार ने साल 2014-15 से लेकर अब तक 33,875 करोड़ रुपए स्वच्छता के लिए आवंटित किए हैं।
- केंद्र सरकार ने सर्वेक्षण की जिम्मेदारी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) को दे रखी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण- 2017 के नतीजे
- 2017 में इंदौर नंबर वन, भोपाल नंबर दो, विशाखापट्टनम नंबर तीन, सूरत चौथे नंबर पर और मैसूर पांचवें स्थान पर था।
स्वच्छ सर्वेक्षण के ये थे मानक
- शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) का कामकाज।
- क्यूसीआई द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन और नागरिकों की प्रतिक्रिया।
4 हजार अंकों के अाधार पर दी गई रैंक
- इस बार सर्वेक्षण 4 हजार अंकों के अाधार पर हुआ था।
- लोगों की प्रातिक्रिया 1400 अंक रखे गए थे।
- स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए 1200 अंक रखे गए थे।
- निकाय के कामकाज के लिए 1400 रखे गए थे।
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