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डाउनलोड करेंइंदौर। लगातार दूसरे साल इंदौर और भोपाल देश के दो सबसे स्वच्छ शहर चुने गए हैं। इस बार भी इंदौर को पहला तो भोपाल को दूसरा स्थान मिल है। चंडीगढ़ देश का तीसरा सबसे साफ शहर है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को नई दिल्ली में इसका ऐलान किया। इस ऐलान के बाद जहां इंदौरवासी खुशी से झूम उठे वहीं उनके जेहन में अब यह बात भी है इस ताज को बचाए रखने के लिए अब उन्हें दोगुनी मेहनत से काम करना होगा।
इन पर करना होगा काम
- कॉलोनियों, बस्तियों, पुराने शहर, अव्यवस्थित बसे क्षेत्रों में सफाई के स्तर को और ऊंचा करना होगा।
- निगम द्वारा बनवाए गए पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट को व्यवस्थित रखने के साथ ही उसमें पानी और सफाई व्यवस्था बनाए रखना
- टॉयलेट में लोगों द्वारा गंदगी फैलाने वालों पर कड़ा एक्शन लेना। इसके अलावा रोशनदान, फ्लश और लाइट कनेक्शन को मेंटेन रखना।
- जन सुविधा के लिए शहरभर में बने टॉयलेट के ड्रेनेज सिस्टम को सही रखना।
- केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के गाइड लाइन को फॉलो करने के साथ उसी अनुसार काम को आगे बढ़ाना।
- सब्जी, फल, मीट या फिश मार्केट में साइट कंपोस्टिंग, वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन और प्राइमरी वेस्ट कलेक्शन सेंटर की संख्या बढ़ाने होंगे।
- बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन सहित भीड़ वाले इलाकों में लिटरबिन के साथ ही सफाईकर्मियों को तैनात रखना।
- वेस्ट ट्रीटमेंट या प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता को बढ़ाना और उससे पैदा होने वाली गैस और खाद को शहर के स्वच्छता में उपयोग करना।
कचरे से निकलने वाले मिथेन गैस का सही यूज
- इंदौर सफाई के साथ ही जैविक कचरे से मिथेन गैस का उत्पादन करने वाला शहर बन गया है। इस गैस का इस्तेमाल सिटी बस ऑटो रिक्शा और लोक परिवहन के अन्य वाहनों में किया जाएगा। अभी इस मिथेन गैस का ईंधन के तौर पर ट्रायल चल रहा है। ट्रायल के बाद इसे सिटी बसों में सीएनजी की जगह मिथेन का इस्तेमाल किया जाएगा। बता दें कि कचरे से मीथेन गैस बनाने के लिए एक हजार किलोग्राम क्षमता का प्लांट लगाया गया है।
ऐसे मिला नंबर वन का ताज
- सडकों, फुटपाथ और खाली जगह पर फैला कचरा इंदौर की सबसे बड़ी समस्या थी। शहर में सैकड़ों कचरा पेटियां थीं, लेकिन वो सफाई की जगह गंदगी फैला रही थीं।
- सडकों पर आवारा पशु सफाई व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे थे और ट्रैफिक को भी। साफ़ सफाई को लेकर लोगों का माइंड सेट बदलना भी आसान नहीं था।
- इन सबसे निपटने के लिए नगर-निगम ने स्ट्रेटेजी बनाकर काम किया। सही डिस्पोजल के लिए सीधे सोर्स से कचरा उठाने की योजना बनाई।
- शहरभर में लगी बड़ी कचरा पेटियों को हटाकर कचरा उठाने के लिए 200 से ज्यादा छोटी गाड़ियां लगाई गईं।
- ये गाड़ियां अब हर घर पर दस्तक देकर वहां से कचरा उठा लेती हैं। घरों के बाद इन गाड़ियों को बाजारों से कचरा उठाने की जिम्मेदारी दी गई।
- लोगों के माइंड सेट को बदलने के लिए कैंपेन चलाया गया। पोस्टर्स, होर्डिंग लगाए गए।
- पहले सिंगर कैलाश खैर और बाद में सिंगर शान से ख़ास प्रोमो सांग्स बनवाए। इंदौर को स्वच्छ बनाना है ये गाना गूंजते ही लोग डस्टबीन लेकर गाड़ियों के पास पहुंच जाते हैं।
- कचरे के डिस्पोजल के लिए शहर में 6 हब बनाए गए, यहां से कचरा ट्रेन्चिंग ग्राउंड पर भेजने की व्यवस्था की गई।
- आवारा पशुओं को सड़क से हटाने के लिए विशेष अभियान छेड़ा गया। शहर की सीमा के भीतर गाय, भैंस पालने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
- सडकों पर घूम रहे आवारा जानवरों को पकड़कर शहर के बाहर गौशालाओं को या फिर जरूरतमंद लोगों को दे दिया गया।
- गंदी सडकों की सफाई के लिए रात में सफाई अभियान शुरू किया गया। साल भर में इसका असर नजर आने लगा, जिन सडकों पर कचरा बिखरा रहता था अब वो साफ़ सुथरी हो गई हैं।
- संकरी जगहों पर सफाई नहीं हो पाने से जर्मनी से खास सफाई मशीन मंगाई गई। करोड़ों की कीमत से आईं ये मशीन संकरे क्षेत्रों में घूमकर सड़कों की सफाई करती हैं।
- इसके अलावा निगम ने गीला और सूखा कचना घरों से ही अलग-अलग करने को कहा। इसका असर ये हुआ कि खाद में परिवर्तित होने वाले कचरे को सीधे खाद बनाने वाले प्लांट तक पहुंचा दिया जाता है।
यह व्यवस्था बनी रही तो हम बने रहेंगे सफाई में नंबर वन
- 2016 में लिटरबिन की संख्या 1500 थी, जिसकी संख्या 2018 में 3000 से ज्यादा हो गई।
- गीला-सूखा कचरा फेंकने के लिए अलग-अलग नीले-हरे लिटरबिन रखे गए।
- शहर को स्वच्छ रखने के लिए 7 हजार सफाईकर्मी तैनात हैं, जिनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं।
- 200 से ज्यादा कचरा गाड़ी के साथ ही 24 घंटे शहर की सड़कों को साफ किया जाता है।
- कर्मचारी दो शिफ्ट में सफाई करते हैं। इनमें 60 प्रतिशत दिन में और 40 प्रतिशत रात में सफाई व्यवस्था देखते हैं।
- प्रति व्यक्ति को 500 से 800 मीटर लंबा हिस्सा आवंटित किया गया है।
- रहवासी क्षेत्र में दिन में एक बार और व्यावसायिक क्षेत्र में दो से तीन बार सफाई की जाती है
- इंटरनेशनल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत 200 सफाईकर्मी गाड़ियों के जरिए सड़कों को साफ रखते हैं।
- सफाई के लिए विशेषतौर पर विदेश से दो सफाई मशीन मंगवाई गई हैं, जिनमें से एक संकरी गलियों में भी घुसकर सफाई कर सकती है।
- रात में इन मशीनों से शहर की 500 किमी लंबी मुख्य सड़क की सफाई की जाती है।
- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए सवा 5 से ज्यादा गाड़ियां लगाई गई हैं। जिनमें गीला-सूखा कचरा अलग रखने की व्यवस्था है।
- इसके अलावा सेनिटरी पेड और डाइपर के लिए गाड़ी में अलग से डिब्बा लगाया गया है।
- निगम ने गंदगी फैलाने वालों पर एक लाख रुपए तक, थूकने, खुले में शौच करने वालों पर 500 रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान कर रखा है।
- शहरभर में निशुल्क और पेड टायलेटों की संख्या 3 हजार से ज्यादा है।
-10 कचरा ट्रांसफर स्टेशन में लगीं अाधुनिक मशीनों से खाद का निर्माण किया जा रहा है।
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