- Hindi News
- National
- Ranchi News Industrial Establishment Upset Due To Poor System And Expensive Electricity Taking Power From Other Companies
खराब व्यवस्था और महंगी बिजली से औद्योगिक प्रतिष्ठान परेशान, दूसरी कंपनियों से ले रहे बिजली
पिछले एक वर्ष में एचटीएस उपभोक्ताओं का बिजली राजस्व घटकर 60 करोड़ से 32 पर पहुंचा
झारखंड के औद्योगिक प्रतिष्ठानों का अब बिजली वितरण निगम से मोह भंग होता रहा है। ऐसे एचटीएसएस (हाईटेंशन स्पेशल सर्विसेज) उपभोक्ता बिजली निगम के बदले दूसरे लाइसेंसी कपंनियों के बिजली को तवज्जो दे रहे हैं। रामगढ़, चास, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर के कई उपभोक्ताओं ने अब बिजली निगम की बिजली छोड़कर दूसरी कंपनियों से बिजली लेना शुरू कर दिया हैं। यह राज्य सरकार और बिजली वितरण निगम के लिए खतरे की घंटी है।
इसके पीछे दो प्रमुख वजह सामने आए हैं। जिसमें लचर बिजली आपूर्ति व्यवस्था और अन्य लाइसेंसी कपंनियों से बिजली निगम की बिजली महंगी होना प्रमुख कारण है। बिजली वितरण निगम की बिजली प्रति यूनिट 4.50 रुपए है, जबकि अन्य कंपनियों की बिजली 3.60 रुपए प्रति यूनिट मिल रही है। बिजली निगम की बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। वहीं, दूसरी कपंनियों की बिजली न केवल सस्ती, बल्कि क्वालिटी पूर्ण है।
घोषणा के अनुरूप अलग नहीं हो सका इंडस्ट्रीज फीडर
पिछले कई सरकारों ने राज्य में औद्योगिक बढ़ावा देने व उन्हें क्वालिटी पूर्ण बिजली देने को लेकर कई घोषणाएं की। मगर काम नहीं हुआ। इसमें इंडस्ट्रीज के लिए अलग से इंडस्ट्री फीडर बनाना भी एक अहम काम था। जो अब तक नहीं हो सका।
स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज मालिकों का बिजली निगम से मोहभंग
रामगढ़, चास, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर के छोटे और मंझोले स्मॉल
स्केल इंडस्ट्रीज के हाईटेंशन स्पेशल सर्विसेज उपभोक्ताओं ने अब दूसरी पावर कंपनियों से बिजली लेना शुरू कर दिया है। जमशेदपुर में ऐसे उपभोक्ता टाटा पावर से और धनबाद, रामगढ़, चास व बोकारो के उपभोक्ता डीवीसी या सेल बोकारो से बिजली खरीद रहे हैं। रामगढ़, चास व बोकारो में 7 से 8 और जमशेदपुर में 8 से 9 कंपनियां बिजली निगम को छोड़कर दूसरी कंपनियों से बिजली खरीद रहे हैं।
बिजली निगम का राजस्व डाटा बता रहा पूरी कहानी
बिजली वितरण निगम के डाटा पर भरोसा करें तो एचटीएसएस उपभोक्ताओं से प्राप्त राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। पिछले एक साल में इसमें 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गयी है। पहले जहां 55 से 60 करोड़ रुपए प्रतिमाह एचटीएसएस उपभोक्ताओं से राजस्व की प्राप्ति होती थी, वह अब घटकर 32 करोड़ तक आ गया है।
रामगढ़, चास, बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद सहित कई शहरों के उपभोक्ता डीवीसी, टाटा पावर जैसी कंपनियों से खरीद रहे बिजली