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राजीव कुमार का कॉलम : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस; 2019 से इंडस्ट्री फीडबैक पर होगी राज्यों की रैंकिंग

डीआईपीपी हर साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्यों की रैंकिंग तय करता है

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 27, 2018, 12:12 PM IST

राजीव कुमार का कॉलम : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस; 2019 से इंडस्ट्री फीडबैक पर होगी राज्यों की रैंकिंग
चालू खाते का घाटा हाल के महीनों में बढ़ा है। इसे कम करने के लिए सबसे जरूरी है निर्यात और एफडीआई बढ़ाना। 14 महीने से निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मौजूदा सरकार एफडीआई बढ़ाने में भी कामयाब रही है। पिछली सरकार के समय यह 31 अरब डॉलर के आसपास था, जो अब 62 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि इस मोर्चे पर हमें सतर्क रहना पड़ेगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हमने देश स्तर पर तो काफी सुधार किया है, लेकिन अब इसे राज्य स्तर पर ले जाने की जरूरत है। देश के स्तर पर नीति बनाने से ज्यादा कुछ हासिल नहीं होगा। हर राज्य की जरूरतें अलग हैं। निवेश के लिए राज्य जो कार्यक्रम आयोजित करते हैं, उससे ज्यादा हासिल नहीं होगा। नीतियां ठीक करें तो ज्यादा फायदा होगा। इसके लिए कुछ बदलाव भी किए जा रहे हैं। डीआईपीपी हर साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्यों की रैंकिंग निकालता है। अगले साल से इंडस्ट्री के फीडबैक पर रैंकिंग होगी। अभी यह इस आधार पर होता है कि राज्यों ने कौन से कदम उठाए हैं।
जीरो बजट फार्मिंग से घटेगी किसानों की लागत : कृषि क्षेत्र का अवलोकन कर नई दिशा देना जरूरी है। फसलों की लागत को कम करना पड़ेगा। सिर्फ एमएसपी बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। लागत कम नहीं होगी तो हम कृषि उत्पादों का निर्यात नहीं कर पाएंगे। निर्यात नहीं होगा तो कृषि की तरक्की ज्यादा नहीं होगी। इसलिए हमें इस बात पर तवज्जो देनी पड़ेगी कि कैसे किसान की लागत कम की जाए। नेचुरल फार्मिंग इसका एक तरीका हो सकता है। कृषि विज्ञानी सुभाष पालेकर ने इस दिशा में अच्छी मुहिम शुरू की है। इसमें पेस्टिसाइड और दूसरे रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हम ऑर्गेनिक फार्मिंग की बात नहीं कर रहे जिसमें लागत बहुत बढ़ जाती है। हम जीरो-बजट फार्मिंग की बात कर रहे हैं। इसे हमें पूरे देश में फैलाना होगा। इससे लागत कम होगी और किसान की आमदनी बढ़ेगी।
पानी के हिसाब से फसलों का पैटर्न बदलना जरूरी : एक और जरूरत है एग्रो प्रोसेसिंग। हमारी 28% फसलें नष्ट हो जाती हैं। इसे बढ़ावा देने से दाम भी कम होंगे और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। कृषि में तीसरी जरूरत है पानी का इस्तेमाल कम करने की। जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग इसमें भी सहायक हो सकता है। इसमें पानी का इस्तेमाल आधा रह जाता है। अभी 80% पानी सिंचाई में खर्च होता है। इसे बचाने के लिए फसलों का पैटर्न भी बदलना पड़ेगा। पंजाब और विदर्भ जैसे पानी की कमी वाले इलाकों में पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों की खेती कम की जानी चाहिए।
स्कूल क्वालिटी इंडेक्स बना रहा है नीति आयोग : स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार की जरूरत है। स्वास्थ्य में सुधार के लिए आयुष्मान भारत योजना लाई जा रही है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा। देश में 38% बच्चे कुपोषित हैं। 50% माताएं खून की कमी से पीड़ित हैं। इसलिए पोषण पर बहुत ध्यान देना है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा शैली में भी आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। इसके लिए नीति आयोग स्कूल क्वालिटी इंडेक्स बना रहा है। सरकारी स्कूलों में टीचर्स का वेतन निजी स्कूलों का दो-तीन गुना है। लेकिन उनमें मोटिवेशन का अभाव है। इस क्षेत्र में सुधार लाने में राज्यों की भी भूमिका अहम रहेगी।

राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग

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