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IPL : दिल्ली हमेशा क्यों रही फिसड्डी? पूर्व क्रिकेटर मदनलाल से जानिए ये 5 कारण

IPL में दिल्ली डेयरडेविल्स 11 में से 8 बार अंतिम चार में भी नहीं पहुंच सकी

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 28, 2018, 10:02 PM IST

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नेशनल डेस्क।बीते 11 सालों IPL काफी बदला है, लेकिन अगर नहीं कुछ बदला तो दिल्ली डेयरडेविल्स का भाग्य। इन 11 सालों में दिल्ली डेयरडेविल्स एक बार भी फाइनल में नहीं पहुंच पाई, जीतना तो दूर की बात है। इस बार सबसे अंतिम स्थान पर रही। इससे पहले 2011, 2013 और 2014 में भी वह आखिरी पायदान पर थी। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि एक-दो सीजन को छोड़ दें तो दिल्ली डेयरडेविल्स का परफॉर्मेंस क्ल्ब लेवल की टीम से ज्यादा अच्छा नहीं रहा। इस संबंध में Dainikbhaskar.com ने बात की पूर्व क्रिकेटर और दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले मदनलाल से। उन्होंने बताए ये 5 कारण :

1. टीम में स्टेबिलिटी नहीं
दिल्ली डेयरडेविल्स की कैप्टनशिप में कंस्टेंसी की कमी रही है। हर सीजन में टीम एक नए कप्तान के साथ खेली। इस बार तो गौतम गंभीर ने बीच टूर्नामेंट में कप्तानी छोड़ दी और श्रेयस अय्यर को कप्तानी करनी पड़ी। इसी तरह टीम में खिलाड़ी भी हमेशा बदलते रहे। इस वजह से प्लेयर्स में जो कमिटमेंट होना चाहिए, उसका हमेशा अभाव रहा।

2. खिलाड़ियों के सिलेक्शन में कोई स्ट्रेटजी नहीं
अन्य टीमों ने खिलाड़ियों के सिलेक्शन में यूथ और एक्सपीरियंस का ध्यान रखा, बैट्समैन और आलराउंडर का अच्छा कॉम्बिनेशन रखा। दिल्ली डेयरडेविल्स ने इसके उलट न तो कभी खिलाड़ियों के कॉम्बिनेशन का ध्यान रखा और न ही खिलाड़ियों को पिक करते समय उसकी कभी कोई स्ट्रेटजी नजर आई। हमेशा ही बगैर प्लानिंग के टीम चुनी गईं।

3. बड़े खिलाड़ियों पर निर्भरता :
टीम हमेशा एक-दो प्लेयर्स पर डिपेंड रही। जैसे पहले वीरेंद्र सहवाग, एबी डिविलियर्स तो इस सीजन में गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर पर। क्रिकेट हो या कोई भी खेल, जब तक टीम वर्क नहीं होगा, कोई भी साइड ज्यादा सफल नहीं हो सकता।

4. सेंस ऑफ सिक्योरिटी की कमी :
दिल्ली की टीम में खेलने वाले प्लेयर्स में सेंस ऑफ सिक्योरिटी की कमी रहती आई है। खिलाड़ियों को हमेशा यही लगता है कि अगर कुछ मैचों में अच्छा परफॉर्म नहीं किया तो उनकी टीम से छुट्टी तय है। इससे खिलाड़ियों में टीम के प्रति कमिटमेंट कभी आ ही नहीं पाया।

5. मैनेजमेंट का सपोर्ट नहीं
टीम को टीम मैनेजमेंट का भी कभी सपोर्ट नहीं मिला। कोच रिकी पोंटिंग जबसे हेड कोच बने हैं, तबसे तो दिल्ली का परफॉर्मेंस और खराब हुआ है। इसकी वजह यही हो सकती है कि रिकी पोंटिंग हमेशा बेक बेंच में रहे। टीम की स्ट्रेटजी बनाने को लेकर वे कभी भी इच्छुक नहीं रहे। अगर पोंटिंग जैसा बड़ा खिलाड़ी और कोच ही इंट्रेस्ट नहीं दिखाएगा तो टीम भी जीतने के प्रति इंस्ट्रेस्ट नहीं दिखा पाएगी।

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Web Title: IPL : delhi hmeshaa kyon rhi fisddi? purv cricketer mdnlaal se jaanie ye 5 karn
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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