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फीफा: मेसी और रोनाल्डो बैरंग लौटे; मजबूत टीमों के खिलाफ गोल दागकर चेरीशेव, एम्बाप्पे जैसे खिलाड़ी स्टार बने

टूर्नामेंट में 3 गोल करने वाले चेरीशेव को रूसी कोच स्टानिस्लाव ने उद्घाटन मैच में शुरुआती एकादश में शामिल नहीं किया था।

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 10:35 AM IST

  • फ्रांस के एम्बाप्पे 4 में से 2 मैच में गोल करने में सफल रहे
  • स्पेन के खिलाफ मैच में डिज्यूबा ने रूस की वापसी कराई

मॉस्को. फुटबॉल विश्व कप में आखिरी 8 में पहुंचने वाली टीमों के नाम तय हो चुके हैं। इस विश्व कप में कई उलटफेर हुए। लियोनेल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे सितारा फुटबॉलर्स मौके पर चूक गए पुर्तगाल के रोनाल्डो ने इस वर्ल्ड कप में चार मैच में चार गोल किए। अर्जेंटीना के मेसी ने चार मैच में एक ही गोल किया। वहीं, डेनिस चेरीशेव, किलियन एम्बाप्पे, डेनियल सुबासिच जैसे फुटबॉलर इस विश्व कप से पहले अनजान चेहरे रहे लेकिन इस टूर्नामेंट में अपनी टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए।

डेनिस चेरीशेवः तीन अंतरराष्ट्रीय गोल, तीनों विश्व कप में किए
फीफा रैंकिंग में 70वें नंबर पर काबिज रूस की टीम ने जब 14 जून को मॉस्को के लुझनिकी स्टेडियम में सऊदी अरब के खिलाफ अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत की थी, तब किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह टीम आखिरी 8 में भी पहुंच सकती है। कोच स्टानिस्लाव ने एलन ड्जागोएव के घायल होने पर चेरीशेव को मैदान पर उतारा। चेरीशेव ने भी हाफ टाइम से ठीक पहले गोल कर कोच के फैसले को सही साबित कर दिया। उन्होंने इंजरी टाइम में भी एक गोल किया। मिस्र के खिलाफ अगले मैच में भी उन्होंने गोल किया। हालांकि उरुग्वे के खिलाफ वे गोल नहीं कर सके, लेकिन स्पेन के खिलाफ जब मैच पेनल्टी शूट आउट में पहुंचा तो वे ही थे जिन्होंने विपक्षी टीम के गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और अपनी टीम की जीत पर मुहर लगा दी। चेरीशेव ने इस विश्व कप में 237 मिनट तक मैदान में रहे और 3 गोल किए।


किलियन एम्बाप्पेः अर्जेंटीना के हाथ से छीनी जीत
अर्जेंटीना के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के बाद फ्रांस के इस स्ट्राइकर की तुलना महान फुटबॉलर पेले से करने लगे हैं। हालांकि पेले से एम्बाप्पे की तुलना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इस विश्व कप में जैसा उन्होंने प्रदर्शन किया, उससे उनके सुनहरे भविष्य के संकेत मिलते हैं। प्री-क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के खिलाफ अर्जेंटीना हाफटाइम के बाद 2-1 से आगे थी, दूसरे हाफ के 19 मिनट निकल चुके थे। अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की अपनी राह मजबूत कर रही थी, तभी 4 मिनट के अंदर एम्बाप्पे ने दो गोल कर बाजी पलट दी। वे विश्व कप में नॉकआउट दौरे के किसी मुकाबले में 2 गोल करने वाले 20 साल से कम उम्र के दूसरे खिलाड़ी भी बने। उनसे पहले पेले ने 1958 में स्वीडन के खिलाफ फाइनल मैच में ऐसा किया था। तब पेले की उम्र 17 साल 249 दिन थी। इससे पहले ग्रुप स्टेज में उन्होंने पेरू के खिलाफ भी गोल कर टीम को 1-0 से जीत दिलाई थी। यही नहीं उन्होंने ऐसा काम भी करने का फैसला किया है, जो उनकी महानता को दर्शाता है। एम्बाप्पे ने विश्व कप के दौरान फ्रांस के लिए खेलते हुए होने वाली पूरी कमाई को एक चैरिटी के लिए दान करने का फैसला किया है।


डेनियल सुबासिचः 300 मिनट मैदान पर रहे, 7 गोल बचाए
क्रोएशिया सभी मुकाबले जीतकर अपने ग्रुप डी में टॉप पर रहा था। इसने 3 मैच के दौरान 7 गोल किए, लेकिन विपक्षी टीमें उसके खिलाफ सिर्फ 1 गोल ही कर सकीं और यह संभव हुआ उसके गोलकीपर डेनियल सुबासिच की वजह से। क्रोएशिया को क्वार्टर फाइनल में सुबासिच का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने न सिर्फ ग्रुप स्टेज के मुकाबलों में विपक्षी टीम के हमलों को नाकाम किया, बल्कि प्री-क्वार्टर फाइनल में जब डेनमार्क के खिलाफ मैच पेनल्टी शूट आउट में पहुंचा तब उन्होंने लगातार लेसे शोने और निकोलेई जोर्गेनसन के शॉट को गोल में जाने से रोककर अपनी टीम को आखिरी-8 में पहुंचा दिया। साथ ही टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारने का रिकॉर्ड भी कायम रखा।

अर्टेम डिज्यूबाः टीम की हर जीत में शामिल रहा एक गोल
रूस को आखिरी-8 में पहुंचाने में की आधारशिला उसके इसी स्ट्राइकर ने रखी थी। स्पेन के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में रूस एक गोल से पीछे था। स्पेन के सर्गेई इग्नेशेविच ने 11वें मिनट में ही गोलकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी थी। ऐसे में अर्टेम डिज्यूबा ने मैच के 41वें मिनट में गोल किया और टीम को बराबरी दिलाई। उनके इस गोल के कारण ही मैच पेनल्टी शूट आउट में पहुंच सका। डिज्यूबा ने सऊदी अरब और मिस्र के खिलाफ मैच में भी गोल किए थे। यही नहीं उन्होंने 4 मैच में 254 मिनट मैदान पर बिताए और 3 गोल करने के अलावा एक एसिस्ट भी किया।


इगोर अकिनफीवः गोल बचाने का औसत 73.7 फीसदी
रूस ने विश्व कप में अपने क्वार्टर फाइनल तक के सफर में 9 गोल किए, जबकि उसके खिलाफ 5 गोल हुए। उरुग्वे से हुए मैच के आंकड़ों को हटा दें तो यह संख्या 2 ही रह जाती है। टीम के खिलाफ ज्यादा गोल न होने देना उसके गोलकीपर की काबिलियत मानी जाती है। इगोर अकिनफीव की गिनती ऐसे ही गोलकीपर में होने लगी है। उन्होंने इस विश्व कप में अब तक 14 गोल रोके हैं। प्री-क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान पेनल्टी शूट आउट में स्पेन के मिडफील्ड कोके के शॉट को उन्होंने असफल किया। इसके बाद इयागो एस्पास के शॉट को रोकने के साथ ही अपनी टीम को पहली बार विश्व कप के आखिरी-8 में जगह दिलाई।

केस्पर श्माइकलः 91.3% की औसत से बचाए गोल
डेनमार्क की टीम ग्रुप स्टेज में सिर्फ 2 गोलकर भी यदि प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रही, तो इसमें उसके गोलकीपर केस्पर श्माइकल का बहुत बड़ा हाथ रहा। उन्होंने ग्रुप स्टेज के 3 मुकाबलों में अपनी टीम के खिलाफ सिर्फ 1 गोल होने दिया। क्रोएशिया के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने कई गोल रोके। एक्सट्रा टाइम में लुका मोड्रिक की पेनल्टी को रोककर उन्होंने साबित किया कि वे दुनिया के बेस्ट गोलकीपर्स में से एक हैं। लुका के शॉट रोकने के कारण ही मैच पेनल्टी शूट आउट में पहुंचा। वहां भी उन्होंने 2 शॉट रोके, लेकिन निकोलेई जोर्गेनसन के पेनल्टी चूकने के कारण वे टीम को आखिरी-8 में पहुंचाने में असफल रहे। इसके बावजूद उनके प्रदर्शन ने सबको प्रभावित किया। उन्होंने 4 मैच के दौरान 390 मिनट मैदान पर रहे और 21 गोल बचाए।