Hindi News »Sports »Other Sports »Football» Fifa World Cup: First Time Use Video Referral In 88 Years, News And Updates

फीफा वर्ल्ड कप: 88 साल में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल, मॉस्को से 64 मुकाबलों पर नजर रखेगी वार टीम

रिव्यू प्रक्रिया के बारे में फुटबॉल प्रशंसकों को भी बताया जाएगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 08, 2018, 10:06 AM IST

  • फीफा वर्ल्ड कप: 88 साल में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल, मॉस्को से 64 मुकाबलों पर नजर रखेगी वार टीम, sports news in hindi, sports news
    +1और स्लाइड देखें
    • हर मैच में 33 कैमरों का इस्तेमाल, नॉकआउट में 2 और कैमरे लगेंगे
    • वार टीम कोई फैसला नहीं लेगी, अंतिम निर्णय रेफरी का ही होगा

    खेल डेस्क.रूस में 14 जून से होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप में मुकाबलों को रोचक बनाने और सटीक फैसले लेने के लिए इस बार तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। फुटबॉल वर्ल्ड कप के 88 साल में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल होगा। हर मैच पर 33 कैमरों से नजर रखी जाएगी जो सीधे मॉस्को में बने सेंट्रलाइज्ड वीडियो ऑपरेशन रूम से कनेक्ट रहेंगे।

    13 लोगों की टीम 64 मुकाबलों पर नजर रखेगी
    - फीफा की रेफरी कमेटी ने वीडियो रेफरल के लिए 13 लोगों की वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वार) टीम बनाई है। यह टीम वर्ल्ड कप के सभी 64 मुकाबलों में मैच अधिकारियों को सपोर्ट करेगी।

    - वार टीम मॉस्को में एक सेंट्रलाइज्ड वीडियो ऑपरेशन रूम में बैठेगी। यह टीम सभी रिलेवेंट ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी और ऑफसाइड कैमरों से संबद्ध करेगी।

    - वीडियो असिस्टेंड रेफरी कोई फैसला नहीं लेंगे, बल्कि फैसला लेने की प्रक्रिया में रेफरी की मदद करेंगे। अंतिम फैसला लेने का अधिकार सिर्फ रेफरी का हो होगा।

    - ब्रॉडकास्टर्स, कमेंटेटर्स, और इन्फोटैन्मेंट टीम फुटबॉल प्रेमियों को रिव्यू प्रक्रिया के बारे में जानकारी देगी।

    हर मैच के लिए 4 वीडियो असिस्टेंट रेफरी
    - हर मैच के लिए 4 वीडियो असिस्टेंट रेफरी होंगे। इनको वार, वार-1, वार-2 और वार-3 के नाम से जाना जाएगा।
    - वार:ये प्रमुख वीडियो असिस्टेंट रेफरी होंगे। इनका काम ऊपरी मॉनिटर पर मुख्य कैमरे पर नजर रखना है। वे चारों कोनों में लगे स्प्लिट मॉनिटर पर घटनाओं के रिव्यू भी करेंगे।

    - वार-1:ये रेफरी मुख्य कैमरे पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। यदि उन्हें लगता है कि किसी घटना को चेक या रिव्यू की जरूरत है तो इसके बारे में तुरंत सूचित करना होगा।

    - वार-2:ये ऑफसाइड स्टेशन में सहायक रेफरी की भूमिका में होंगे। वे ऑफसाइड की किसी भी संभावित स्थितियों का पूर्वानुमान लगाएंगे और जांचेंगे ताकि चेक और रिव्यू प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

    - वार-3:वार-3 टेलीविजन कार्यक्रम से मिलने वाले फीडबैक पर नजर रखेगा। उसके आधार पर वे वार को घटनाओं के रिव्यू करने में मदद करेंगे। साथ ही ऑफसाइड स्टेशन में वार-2 और वार के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना भी सुनिश्चित करेंगे।

    33 ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी वार टीम
    - वार टीम 33 ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी। इसमें 8 स्लो सुपर स्लो मोशन और 4 अल्ट्रा स्लो मोशन कैमरे होंगे। इसके अलावा वे दो ऑफसाइड कैमरों को भी एक्सेस कर पाएंगे।

    - नॉकआउट चरण के मुकाबलों के लिए हर गोल पोस्ट के पीछे 2 अतिरिक्त अल्ट्रा स्लो मोशन कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को भी वार टीम एक्सेस कर सकेगी।

    - स्लो मोशन रिप्ले का मुख्य रूप से इस्तेमाल वास्तविक स्थितियां जानने के लिए किया जाएगा। वहीं सामान्य स्पीड के कैमरों का इस्तेमाल सब्जेक्टिव फैसलों के लिए किया जाएगा।

    वार टीम की मदद के लिए 4 रिप्ले ऑपरेटर
    - वार टीम की मदद को हर मैच के लिए 4 रिप्ले ऑपरेटर होंगे। वे कैमरे का बेस्ट एंगल चुनेंगे और उसे वार टीम को उपलब्ध कराएंगे। 4 में से 2 रिप्ले ऑपरेटर वार और वार-2 को हर चेक और घटना के रिव्यू के लिए कैमरे के सबसे संभावित एंगल को पहले से चुनेंगे और 2 रिप्ले ऑपरेटर उन्हें अंतिम एंगल उपलब्ध कराएंगे।

    अनुभव के आधार पर चुने गए वार टीम के सदस्य
    - वार टीम के लिए रेफरियों का चयन का मानदंड मुख्य रूप से उनके अनुभव के आधार पर किया गया है। वार असिस्टेंट रेफरी चुनते समय इस पर जोर दिया गया है कि जो उम्मीदवार है, उसका अपने राष्ट्रीय और कन्फेडरेशन मुकाबलों के दौरान वीडियो मैच अधिकारी के रूप में कैसा प्रदर्शन रहा है। यह भी देखा गया कि फीफा से संबद्ध मैचों और प्रिपेरटोरी सेमिनार के दौरान उन्होंने अपनी वार नॉलेज और स्किल्स का कितना इस्तेमाल किया।

    2010 वर्ल्ड कप के बाद उठी थी वीडियो रेफरल की मांग
    - कुछ मानना है कि फुटबॉल में तकनीक के इस्तेमाल की ज्यादा जरूरत नहीं है। हालांकि 2010 फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड-जर्मनी के बीच हुए क्वार्टर फाइनल मैच के बाद हर किसी ने सवाल उठाए कि यदि वीडियो प्रूफ जैसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ होता तो मैच का परिणाम दूसरा होता।

    - इस मैच में इंग्लैंड की टीम जर्मनी के हाथों 4-1 से हार गई थी। मैच के दौरान इंग्लैंड के फ्रैंक लैंपर्ड ने गेंद को जर्मनी के गोलपोस्ट में पहुंचा दिया था, लेकिन रेफरी ने उसे गोल नहीं दिया था।

    - इंग्लैंड के तत्कालीन कोच फाबियो कापेलो ने कहा था, "साफ-साफ 2-2 गोल हुए थे। जो हुआ उसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था। यदि दूसरा गोल दिया गया होता तो शायद पूरा मैच ही बदल जाता। मैं इस गलती को न तो समझ और न ही माफ कर सकता हूं।"

  • फीफा वर्ल्ड कप: 88 साल में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल, मॉस्को से 64 मुकाबलों पर नजर रखेगी वार टीम, sports news in hindi, sports news
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Fifa World Cup: First Time Use Video Referral In 88 Years, News And Updates
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Football

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×