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FIFA विवाद : मैच में बाधा ना आए, इसलिए 20 लाख कुत्तों को मारने के दे दिए आदेश

फीफा वर्ल्ड कप 2018 में एक हफ्ता बचा है और इससे पहले ही यह विवादों में आ गया है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 19, 2018, 01:34 PM IST

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    नेशनल डेस्क।रूस में होने जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2018 में अब एक हफ्ता बचा है और इससे पहले ही यह विवादों में आ गया है। ताजा विवाद मेक्सिको की टीम को लेकर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस रवाना होने से पहले टीम के कई खिलाड़ियों ने प्रॉस्टीट्यूट्स के साथ पार्टी की। हालांकि मैनेजमेंट ने यह कहकर टीम को क्लीन चिट दे दी कि खिलाड़ी खाली समय में कुछ भी करने को स्वतंत्र हैं। इधर, मॉस्को में वर्ल्ड कप के दौरान टूरिस्ट्स के लिए रोबॉट सेक्स ब्रॉथल खोने जाने को लेकर भी विवाद उठ खड़ा हुआ है।

    रूस को साल 2010 में वर्ल्ड कप की मेजबानी देने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से ही फुटबॉल वर्ल्ड कप को लेकर यह लगातार विवादों में बना रहा है। ये विवाद भी ऐसे रहे जो इससे पहले इस आयोजन से जुड़े किसी भी देश के साथ नहीं हुए होंगे। इनमें कुत्तों को मारने से लेकर रूस की तुलना नाजी हिटलर के जर्मनी के साथ करने तक शामिल हैं।

    आगे की 5 स्लाइड्स में देखिए फीफा वर्ल्ड कप 2018 से जुड़े ऐसे ही 5 विवादों के बारे में :


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    विवाद नंबर 1 : 20 लाख स्ट्रीट डॉग्स को मारने के निर्देश

    फुटबॉल वर्ल्ड कप के पहले 11 शहरों में 20 लाख स्ट्रीट डॉग्स और बिल्लियों को मारने के लिए रूस सरकार ने 19.5 लाख डॉलर (करीब 13 करोड़ रुपए) का कांट्रैक्ट दिया। ये वे 11 शहर हैं जहां फुटबॉल मैच होने हैं। कुत्तों और बिल्लियों को मारने वाले स्क्वाड का नाम 'कैनी KGB' रखा गया है। इससे पहले रूस के ही सोची में विंटर ओलिम्पिक से पहले भी हजारों स्ट्रीट डॉग्स को मारा गया था।

    ऐसा क्यों किया?
    इन शहरों में कुत्तों और बिल्लियों की काफी तादाद हैं। पशुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि सरकार केवल अपने शहरों की इमेज सुधारने के लिए पशुओं की बलि ले रही है। यहां तक कि हजारों पक्षियों को भी जिंदा जला दिया गया।

    सरकार की सफाई :
    इस पर विवाद इतना बढ़ गया कि रूस के उप प्रधानमंत्री विटाली मुटको को दखल देना पड़ा। उन्होंने इस संबंध में एनिमल्स राइट्स के लिए काम करने वाले संगठनों के साथ मीटिंग भी की। उन्होंने आश्वस्त किया कि पशुओं को मारने के बजाय उन्हें शेल्टर्स में बंद किया जाएगा। हालांकि संगठनों का आरोप है कि उप प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद भी पशुओं की हत्या नहीं रुक रही।

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    विवाद नंबर 2 : पैसा देकर हासिल की वर्ल्ड कप की मेजबानी!

    दिसंबर 2010 में वर्ल्ड कप 2018 के लिए रूस के नाम की घोषणा की गई। ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल जैसे दावेदारों के बीच रूस के सिलेक्शन से कई लोगों को आश्चर्य हुआ। इससे रूस पर आरोप लगा कि उसने फीफा की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों को पैसा देकर बीड अपने पक्ष में करवाई।

    क्यों उठा संदेह?
    दरअसल, वर्ल्ड कप की मेजबानी के पहले ही 2009 में रूस से घोषणा कर दी थी कि वह फुटबॉल स्टेडियमों और प्रमुख शहरों में बुनियादी ढांचे को सुधारने में 12 अरब डॉलर खर्च कर रहा है। इससे संदेह उठा कि उसने मेजबानी की घोषणा से पहले ही इतने कॉन्फिडेंस से प्लान कैसे लागू कर दिया। फिर जब रूस का नाम घोषित हुआ आरोप को और भी बल मिला।


    क्या हुआ?
    आरोपों की जांच के लिए फीफा की एथिक्स कमेटी ने जांच कमेटी बनाई। माइकल गार्सिया को जांच कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। उधर अमेरिकन अटॉर्नी ने भी पूरे मामले की अपने स्तर पर जांच करवाने की घोषणा की। 2017 में पूरी रिपोर्ट जारी की गई। यह रिपोर्ट खोदा पहाड़, निकली चूहिया साबित हुई। बाद में पुतिन ने आरोप लगाया कि फीफा के तत्कालीन प्रेसिडेंट सेप ब्लैटर को पद से हटाने की यह केवल अमेरिकी साजिश थी।

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    विवाद नंबर 3 : रूसी जासूस की ब्रिटेन में हत्या, रॉयल फैमिली ने किया इवेंट का बहिष्कार

    इसी साल 4 मार्च को रूस की खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी सर्जेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया ब्रिटेन के सेलिस्बरी में मृत पाए गए। जांच में उन्हें जहर देकर उनकी हत्या करने की बात सामने आई। 1990 के दशक में स्क्रिपल ने डबल एजेंट का काम किया था। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी के लिए काम करने के आरोप में उन्हें रूस में गिरफ्तार किया गया था। बाद में सर्जेई ब्रिटेन में बस गए थे।

    क्यों हुआ विवाद?
    सर्जेई की हत्या को ब्रिटिश सरकार ने काफी गंभीरता से लिया और इसके लिए रूस को जिम्मेदार माना। इससे दोनों देशों के संबंध इस कगार पर पहुंच गए कि ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने तो रूस की तुलना नाजी जर्मनी से कर डाली। इस पर रूस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई। मांग उठने लगी कि ब्रिटेन को फीफा वर्ल्ड कप का बहिष्कार करना चाहिए।

    क्या निकला रास्ता?
    फुटबॉल ब्रिटेन का सबसे पॉपुलर गेम है। ऐसे में सरकार ने ब्रिटिश फुटबॉल टीम को तो रूस भेजने का फैसला किया, लेकिन यह घोषणा भी कर दी कि न तो टूर्नामेंट के किसी मैच में और न ही उद्दघाटन और समापन समारोह में ब्रिटेन का कोई मिनिस्टर शामिल होगा। रॉयल फैमिली ने भी फीफा वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने का फैसला किया है। फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में यह पहली बार है जब रॉयल फैमिली का कोई सदस्य इस इवेंट से दूर रहेगा।

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    विवाद नंबर 4 : डोपिंग विवाद

    साल 2014 में जर्मनी के ब्राडकास्टर ARD ने एक रिपोर्ट पब्लिश की जिसमें बताया गया कि रूस में साल 2011 से ही सरकार की मदद से डोपिंग की जाती रही। साल 2015 में वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) ने अपनी रिपोर्ट में रूस की आलोचना की। नवंबर 2015 में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलीट्स फेडरेशन्स ने रूस को तमाम एथलीट्स इवेंट्स में भाग लेने पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया।

    क्या हुआ विवाद?
    डोपिंग विवाद के बाद वाडा ने रिचर्ड मैकलारेन की अगुवाई में जांच कमेटी बनाई। इस जांच कमेटी ने पाया कि साल 2011 से 2015 के बीच रूस के कम से कम 1000 खिलाड़ियों को ड्रग्स दिए गए। इनमें 33 फुटबॉलर भी शामिल थे। इस विवाद के बाद रूस के फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन करने की क्षमता पर ही सवालिया निशान लग गए। ब्रिटेन और स्वीट्जरलैंड इस आधार पर रूस से फीफा का इवेंट छीनने का असफल प्रयास किया।


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    विवाद नंबर 5 : क्रिमिया पर कब्जा

    साल 2014 में रूस ने क्रिमिया को यूक्रेन से अलग करके अपने देश में मिला लिया। इस पर ब्रिटेन और अमेरिका ने इसकी तुलना हिटलर के नाजी जर्मनी तक से कर डाली।

    इवेंट छीनने की मांग, लेकिन खारिज :

    ब्रिटिश और अमेरिकी सांसदों ने फीफा के प्रेसिडेंट सेट ब्लैटर को पत्र लिखकर फुटबॉल वर्ल्ड कप का इवेंट छीनने की मांग की। हालांकि ब्लैटर ने इस मांग को खारिज कर कहा कि वर्ल्ड कप की मेजबानी रूस को दी जा चुकी है। इससे पीछे नहीं हटा जा सकता।

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Web Title: FIFA World Cup Top Controversy/फीफा वर्ल्ड कप 2018 विवाद
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