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इनेलो और बसपा का हरियाणा में गठबंधन, अभय चौटाला बोले- भाई-बहन जैसा गठबंधन

3 वर्ष पहले
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पानीपत.  हरियाणा में 20 साल बाद फिर इंडियन नेशनल लोकदल अौर बहुजन समाजवादी पार्टी में गठबंधन हो गया है। बुधवार को इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला और बसपा के उत्तर भारत के प्रभारी डॉ. मेघराज ने प्रेस कॉन्फेंस करके लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का एलान किया। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर कोई खुलासा नहीं किया। सिर्फ इतना कहा कि चुनाव से पहले देखा जाएगा कि कौन-सी पार्टी का उम्मीदवार कहां से जीत सकता है। सीएम-डिप्टी सीएम के पद भी दोनों दल मिलकर तय करेंगे। अभय ने कहा, "यह बहन- भाई के रक्षाबंधन जैसा गठबंधन है। हरियाणा कांग्रेस मुक्त हो चुका है। अब यह गठबंधन प्रदेश को भाजपा मुक्त करेगा।" अभय व मेघराज ने बताया कि अभी दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता संयुक्त रूप से संघर्ष करेंगे। दलित, पिछड़ा वर्ग और किसानों के हितों की लड़ाई लड़ेंगे। सामाजिक रूप से भाईचारे को मजबूत करेंगे। एसवाईएल के पानी को लेकर 1 मई को इनेलो के जेल भरो आंदोलन में बसपा भी साथ देगी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा।

 

पहले भी तीसरे मोर्चे की पहल यहीं से हुई थी

- अभय ने कहा "बसपा प्रमुख मायावती की अगुवाई में तीसरे मोर्चे के गठन की शुरुआत हरियाणा से हो गई है। 1987 में देश को कांग्रेस मुक्त बनाने की मुहिम इसी राज्य से चौधरी देवीलाल की अगुवाई में हुई थी। 1989 के लोकसभा चुनाव के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह की अगुवाई में विपक्षी दलों को एकजुट किया गया। उसी इतिहास को दोहराते हुए फिर से हरियाणा में इस बदलाव की नींव रखी है। 2019 में कैंद्र में मायावती के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी और गैर-भाजपा सरकार बनेगी।"

- अभय ने तीसरे मोर्चे में कांग्रेस को शामिल न करने की घोषणा की। वहीं, डॉ. मेघराज इसे लेकर पूछे सवाल को टाल गए। उन्होंने कहा कि इसका जवाब मायावती ही दे सकती हैं। अकाली दल को लेकर अभय ने कहा कि इसका जवाब वे ही देंगे।

 

इनेलो तीन टर्म से सत्ता से बाहर, बसपा के सहारे समीकरण बदलने की कोशिश

पिछले साढ़े 13 साल से इनेलो सत्ता से बाहर है। कार्यकर्ताओं में निराशा है। बसपा भी हरियाणा में किंगमेकर भी भूमिका में आना चाहती है। प्रदेश में दलितों का वोटबैंक करीब 30 प्रतिशत है। यह बसपा और कांग्रेस के पक्ष में ही ज्यादा रहते हैं। इनेलो की छवि जाट वोट बैंक को लेकर बनी हुई है। इनेलो को उम्मीद है कि एकजुटता से उन्हें लाभ होगा। 

 

जीटी बेल्ट और दक्षिण हरियाणा के बलबूते भाजपा आई, अब वहीं से मात देने की तैयारी

भाजपा को जीटी बेल्ट और दक्षिणी हरियाणा के बलबूते सत्ता मिली है। बसपा का परंपरागत वोट बैंक भी इन्हीं इलाकों में है। वहीं, इन्हीं इलाकों की कई सीटों पर इनेलो की हार का अंतर 3 वोट से लेकर 6 फीसदी तक रहा था। बसपा के साथ मिलकर इनेलो यहां के वोट लेना चाहता है।

 

बसपा को 4 से 7% वोट मिलते रहे हैं, ये जुड़े तो 15 से ज्यादा सीटों पर फायदा मुमकिन

विधानसभा चुनावों में बसपा को 4 से 7% वोट मिलते रहे हैं। पिछले चुनाव में बसपा 4.37% वोट के साथ चौथे स्थान पर रही थी। 13 सीटों पर तो 10 से 28% वोट मिले थे। वहीं, 17 सीटों पर इनेलो की हार का अंतर 3 वोट से लेकर 6% रहा था। अगर इनेलो काे बसपा के वोट मिल जाए तो 15 से ज्यादा सीटों का फायदा हो सकता है।

 

हिसाब लगाकर जुड़े

दोनों पार्टियों ने पहले हरियाणा के हालात पर चर्चा की। सत्ता की संभावना के लिए पूरा गणित लगाया। इसके बाद गठबंधन का प्रस्ताव मायावती के सामने रखा तो उन्होंने हामी भर दी।

 

पृथला क वेिधायक को बसपा ने किया सस्पेंड

पृथला से बसपा विधायक टेकचंद शर्मा को पार्टी ने सस्पेंड कर दिया है। मेघराज ने बताया कि टेकचंद पार्टी विरोधी काम कर रहे थे। चर्चा है कि शर्मा कई बार भाजपा के कार्यक्रमों में भी देखे गए थे।

 

1998 में गठबंधन चुनाव से पहले ही टूट गया था

इनेलो-बसपा में 1998 में भी गठबंधन हुआ। लोकसभा चुनाव साथ लड़ा, पर विधानसभा चुनाव से पहले 1999 में गठबंधन टटू गया। 2009 में बसपा का हजकां से गठबंधन हुआ, जो विस चुनाव से पहले टटू गया था।

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