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Inside Story: 19 साल पहले किसी ने नहीं मानी थी निपाह वायरस खोजने वाले साइंटिस्ट की बात

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. निपाह वायरस के संक्रमण से केरल में 16 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। इतना ही नहीं इस वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज करने वाली नर्स लिनी की भी सोमवार सुबह मौत हो गई है। पहली बार इस वायरस पता डॉ. कॉ बिंग चुआ ने 1999 में लगाया था। उस दौरान डॉ. बिंग मलेशिया की यूनिवर्सिटी आॅफ मलाया से ग्रेजुएशन कर रहे थे। जब डॉ. बिंग ने इसके बारे में लोगों को बताया तो किसी ने उनकी बात नहीं मानी थी। यहां तक कि उनके प्रोफेसर ने भी इस एक्सपेरिमेंट को फेंक देने की बात कही थी। डॉ. बिंग इन दिनों टेमसेक लाइफ साइंसेस, सिंगापुर में बतौर साइंटिस्ट काम कर रहे हैं। 5 प्वाइंट्स में डॉ. कॉ बिंग चुआ की जुबानी जानते हैं कि कैसे हुई थी इस वायरस की खोज...

1. डॉ बिंग कहते हैं कि,  'साल 1999 में रविवार की एक शाम जब पहली बार मैंने सैंपल को स्लाइड पर रखकर टे​स्ट किया तो चौक गया था। स्लाइड किसी हरे रंग की रोशनी की तरह चमक रही थी। यह एक ऐसा दुर्लभ और खतरनाक वायरस वारयस था जिसे दुनिया में पहली बार देखा गया था। 

 

2. इस वायरस की एनालिसिस से एक बात साफ थी कि इससे आसानी से खत्म नहीं किया जा सकता है। मलेशिया के सुंगई निपाह गांव के लोग सबसे पहले इस वायरस से संक्रमित हुए थे। इसलिए इस वायरस का नाम निपाह रखा गया था। 

 

3. निपाह वायरस को डब्ल्यूएचओ ने दुनिया के दुर्लभ और खतरनाक वायरस की लिस्ट में शामिल किया था। इसकी भयावहता को देखने के बाद इस पर एक फिल्म 'कंटेजियन' भी बनी थी। 106 मिनट की यह फिल्म 3 सितंबर 2011 को रिलीज हुई थी। 'कंटेजियन' का मतलब होता है संक्रमण।

 

4. पिछले कई सालों से इस वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने के लिए की कोशिश की जा रही है। इसके खतरे से बचाने के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

 

5. 1999 में पूरे मलेशिया में जब यह वायरस तेजी से फैल रहा था तब इसके बारे में सिर्फ मुझे ही पता था। लेकिन जब मैंने इसे खोजा तो मेरी बात किसी ने नहीं मानी थी। एक दिन जब अपने प्रोफेसर से इसे देखने को कहा तो उन्होंने इस एक्सपेरिमेंट को फेेंकने की बात कही थी। लेकिन मैं नहीं रुका और इसे अमेरिका में लैब टेस्टिंग के लिए भेजा।'

 

सबसे पहले ब्रेन पर अटैक करता है निपाह वायरस
यूनिवर्सिटी आॅफ मलाया के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सीटी टैन के मुताबिक निपाह वायरस इबोला से अधिक खतरनाक वायरस है क्योंकि यह सीधे ​ब्रेन पर अटैक करता है। 1998 में मलेशिया में हुए वायरस इंफेक्शन से निपटने के लिए मलेशिया सरकार ने आर्मी की मदद लेकर देशभर के सुअरों को मार दिया था। इसके बाद संक्रमण के मामलों में कमी आई थी। सुअर पालन करने की फर्म से तेजी से वायरस इंफेक्शन होने के कारण करीब एक दशक से ज्यादा समय इससे निपटने में लगा था। 

 

एक्स्ट्रा शॉट्स :   एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस का इंफेक्शन सबसे ज्यादा दिसंबर और मई महीने में होता है। 1999 में मलेशिया में पहली बार निपाह वायरस का पता लगाया गया था। 

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