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वाराणसी हादसा: छुट्टी पर आए जवान ने शुरू किया बचाव कार्य, लोगों से की अपील; जान जोखिम में डालकर मदद के लिए आए हजारों लोग

3 वर्ष पहले
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वाराणसी. चौकाघाट-लहरतारा निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो स्लैप मंगलवार को वाइब्रेशन (कंपन) के चलते गिर गए। हादसा शाम 5.25 बजे के करीब हुआ। स्लैप गिरने से एक बस, आधा दर्जन बाइक, कार और ऑटो उसकी चपेट में आ गए जिस कारण 18 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद मिर्जापुर के रहने वाले आईटीबीपी के जवान रवींद्र सैनी ने बताया कि वह रोडवेज बस पकड़ने जा रहे थे। पीछे ऑटो में बैठे थे। सामने स्लैप को अपनी आंखों से गिरता देखा। धमाके के साथ शोर शुरू हो गया और लोग भागने लगे। जवान ने हादसे के बाद लोगों से राहत और बचाव के लिए अपील की जिसके बाद हजारों लोग मदद के लिए सामने आए। 

- जवान ने बताया कि आधा दर्जन कारें पूरी तरह पिचक गईं। अंदर कई लोग फंसे थे जिन्हें बचाने के लिए कुछ लोग उसके साथ आए और रेस्क्यू शुरू हुआ। लोग ऐसे दबे थे कि इंच भर हिल भी नहीं पा रहे थे। बॉडी पार्ट कट गए थे। बस सांसे चल रही थी और मौत मांग रहे थे। एइ ऍन कॉलोनी के सामने कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने जा रहे दर्जनों यात्रियों और स्थानीय लोगों ने गाड़ियों में फंसे लोगों को बचाने का काम शुरू कर दिया। 

 

 

परिजनों से मांगे जा रहे पैसे
- BHU मोर्चरी में तैनत सफाईकर्मी द्वारा हादसे में मारे गए दो लोगों के परिजनों से 200 रुपए की मांग की गई।  मामले की सूचना डीएम योगेश्वर राम मिश्र को मिलने पर सफाईकर्मी बनारसी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और लंका थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

 

लोगों ने बताई हादसे की कहानी


हादसे में दबे रहे दो चचेरे भाई

- शंकर तालाब के रहने वाले दो चचेरे भाई हादसे में फंस गए। करीब 25 मिनट तक मौत से जंग लड़ते रहे। कबीर चौरा हॉस्पिटल में एडमिट शकील ने बताया हम दोनों भाई बाइक से राजतालाब गए थे। अचानक पहाड़ की तरह कुछ गिरा और हम दोनों बस और कार के बीच स्लैब में दब गए। मेरे भाई नसरुद्दीन को सिर में चोट लग चुकी थी। ऐसा लग रहा था कि कई सौ टन वजनी मौत हमारे ऊपर गिर गई है। हमारी चीख सुनकर लोगों ने मदद की और हम दोनों भाइयों को लोगों ने खींचकर किसी तरह से बाहर निकाला। 

 

सीने पर रखा था कई टन वजन 
- मंडलीय हॉस्पिटल में तीसरे घायल प्रदूम ने बताया वो मिर्जापुर के रहने वाले हैं और समान लेने बनारस जा रहे थे। अचानक ऑटो के किनारे का हिस्सा दबा कुछ समझ में नहीं आया। हम किनारे बैठे थे गर्दन पीछे करके बैठे थे और वजन बढ़ते-बढ़ते सीने तक आ गया। हिलना भी मुश्किल था। स्थानीय लोगों ने कहा बाहर आने का प्रयास करो लेकिन नहीं निकल सका जिसके बाद लोगों ने मेहनत करने बाहार निकाला। बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि मानो सीने पर कई टन वजन रखा हो।  

 

मां की तलाश में चक्कर काट रही बेटी

- कबीर चौरा अस्पताल में रात को अपनी मां को खोजती हुई एक युवती चंदन पहुंची। डेडबॉडी को देखकर कहती रही मेरी मां जिन्दा है पर आखिर कहां गई। चंदन ने बताया मां शांति देवी बनारस के डीआरएम के बंगले में काम करती है। वो कहां है पता नहीं। सभी घायलों और मृतकों को जाकर देखा वो नहीं मिली। चंदन के अनुसार छुट्टी होने के कई घंटे बाद भी मां अपने घर नहीं पहुंची जिसेक बाद चंदन अपने चचेरे भाई के साथ उनको ढूंढने निकल पड़ी।

 

नई कार ससुर के लिए बनी काल, दामाद किसी तरह बचा 
- वाराणसी के कैंट इलाके में जिस समय फ्लाईओवर का स्लैप गिरा उसकी चपेट में वाराणसी के नक्की घाट निवासी राजेश भास्कर नामक आ गए जो अपने ससुर भैरवनाथ के साथ नई गाड़ी खरीदकर वाराणसी के रोहनिया इलाके से आ रहा थे। रास्ते में ही उनके साथ हादसा हो गया उस समय राजेश गाड़ी ड्राइव कर रहा था और उसके ससुर बगल वाली सीट पर बैठे थे। ससुर की मौके पर ही मौत हो गयी और राजेश बुरी तरह से गाड़ी में फंस गया। करीब 45 मिनट तक वो फंसा रहा और उसके बाद किसी तरह कटर से गाड़ी काटकर उसे निकाला गया। उसका कहना है की हम बड़े अरमानों के साथ गाड़ी खरीदकर ले जा रहे थे सब कुछ खत्म हो गया।

 

एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत

- हादसे में गाजीपुर जिले के एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की मौत हो गई। परिजनों की मौत की सूचना पाते ही पूरे गांव में कोहराम की स्थिति पैदा हो गई। नंदगंज थाना क्षेत्र के सहेडी निवासी खुशहाल राम (65) बेसिक शिक्षा परिषद से रिटायर्ड शिक्षक थे। वह अपने पुत्र संजय राम को कैंसर की दवा दिलाने के लिए प्राइवेट बोलेरो से लेकर वाराणसी गए थे। 

 

5.45 बजे पहुंची पुलिस, तब तक मदद में जुटे थे लोग  

- मौके पर मौजूद कई लोगों ने बताया कि पुलिस के कुछ जवानों के पहुंचते ही लोग विरोध करने लगे। मौके पर करीब 10 हजार लोग मदद करने के लिए पहुंच गए थे। तमाम लोग मंजर देखकर बेहोश होते रहे और घर चले गए। 
- स्थानीय लोगों ने ऑटो और बस के बीच फंसे चचेरे भाई नसरुद्दीन और शकील को बमुश्किल बाहर निकाला गया। 6.10 बजे मौके पर मौजूद लोग हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए स्लैप को उठाने में मदद करने लगे। 7.40 बजे तक करीब आठ क्रेन मौके पर आ गई और एनडीआरएफ और लोगों की मदद से कार से बुजुर्ग महिला की लाश निकाली गई। 

 

क्रेन स्लैप को उठा पाने में असफल रहा तो जान जोखिम में डालकर दर्जनों लोग पिछले हिस्से पर चढ़े 
- मौके पर मौजूद महेश कुमार जायसवाल ने बताया कि पुलिस और लोगों ने रास्ते के पास की दीवार को तोड़कर क्रेन को बैक कराया। आठ क्रेन और करीब 100 से ऊपर लोग क्रेनों के पिछले हिस्से में चढ़ाये गए और स्लैप को उठाने का प्रयास किए गए। मदद करने वाले में हर-हर महादेव के नारे से एक किलोमीटर का इलाका गूंज उठा।
- 8.20 बजे 39 जीटीसी के 40 से ऊपर जवानों ने मोर्चा संभाला। क्रेनों के साथ जेसीबी लगवाकर स्लैप को हल्का ऊपर करवाकर एक कार को बाहर निकाला गया। 
- इस दौरान खून से सने डेडबॉडी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का क्रम जारी हुआ।
- 8.40 बजे बस को निकालने में एनडीआरएफ जुटी लेकिन पहली बार विफल रही। 9.15 बजे सेना, एमडीआरएफ और लोगों ने फिर से प्रयास शुरू किया और स्लैप को ऊपर उठा दिया और बस को दाएं-बाएं हिलाते आगे बढ़ा दिया गया। 

 

अक्टूबर, 2015 से शुरू हुआ था पुल निर्माण का काम
-वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और सिगरा थाना क्षेत्र के लहरतारा इलाके में इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 2 मार्च, 2015 को 12973.80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। अक्टूबर 2015 में पुल बनना शुरू हुआ।
- पुल का निर्माण पूरा करने की सीमा अक्टूबर 2018 तय थी, लेकिन अब तक 47 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। 
- पुल को बनाने का काम उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम द्वारा किया जा रहा है।

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