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सिर्फ 5 दिन में हो गया था तैयार रामसेतु, इस इंजीनियर का था पूरा प्लान

रामसेतु हिंदुओं की आस्था का भी केंद्र हैं, इसलिए भी ये महत्वपूर्ण है।

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 01:49 PM IST
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यूटिलिटी डेस्क. रामसेतु को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च के नए अध्यक्ष अरविंद जामखेडकर ने कहा है कि राम सेतु प्राकृतिक है या फिर इंसान ने इसे बनाया है, इसकी जांच हम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि खुदाई जैसे काम इतिहासकारों के नहीं हैं। इसके लिए एएसआई जैसी एजेंसियां हैं। इसके बाद रामसेतु एक बार सुर्खियों में आ गया है।
इधर डिस्कवरी कम्युनिकेशन ने अपने साइंस चैनल के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो ट्वीट किया है। जिसमें कहा गया है - प्राचीन हिंदू माइथॉलजी में श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाला पुल असली है? साइंस की रिसर्च कहती है- हां। चूंकि रामसेतु हिंदुओं की आस्था का भी केंद्र हैं, इसलिए भी ये महत्वपूर्ण है। धर्म ग्रंथों में रामसेतु के बारे में क्या लिखा है, आज हम आपको ये बता रहे हैं।

5 दिन में बना था रामसेतु
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम अपनी सेना सहित लंका जाकर रावण से युद्ध करना चाहते थे, उस समय रास्ते में समुद्र होने के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा था। उस समय वानरों और भालुओं की सेना ने 5 दिन में रामसेतु का निर्माण किया था।
पहले दिन वानरों ने 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया। यह पुल 10 योजन चौड़ा था। (एक योजन लगभग 13 से 15 किलोमीटर)

इस इंजीनियर ने बनाया था रामसेतु
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रामसेतु का निर्माण मूल रूप से नल नाम के वानर ने किया था। नल शिल्पकला (इंजीनियरिंग) जानता था क्योंकि वह देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा का पुत्र था। अपनी इसी कला से उसने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।



रामसेतु के बारे में ग्रंथों में और क्या लिखा है, जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

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श्रीराम ने स्वयं तोड़ दिया था रामसेतु
पद्म पुराण के सृष्टि खंड के अनुसार जब श्रीराम रावण का वध कर सीता सहित अयोध्या लौट आए और उनका राज्याभिषेक हो गया तब एक दिन उनके मन में विभीषण से मिलने का विचार आया। तब वे लक्ष्मण को राज्य का भार सौंपकर भरत को अपने साथ लेकर लंका गए। पुष्पक विमान से जाते समय रास्ते में श्रीराम ने भरत को वह पुल भी दिखाया जो वानरों और भालुओं की सेना ने बनाया था।
श्रीराम और भरत को लंका में देखकर विभीषण बहुत प्रसन्न हुए। श्रीराम तीन दिन तक लंका में ठहरे। जब श्रीराम पुन: अयोध्या जाने लगे तो विभीषण ने उनसे कहा कि आपके द्वारा बनाया जो पुल है, उस मार्ग से जब मानव यहां आकर मुझे सताएंगे, उस स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? विभीषण के ऐसा कहने पर श्रीराम ने अपने बाणों से उस सेतु के दो टुकड़े कर दिए। फिर तीन भाग करके बीच का हिस्सा भी अपने बाणों से तोड़ दिया।

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