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इंटरनेशनल चॉकलेट डे : कभी तीखा हुआ करता था चॉकलेट का स्वाद, कोको के बीज में मसाले मिलाकर तैयार की जाती थी, बेहद दिलचस्प है इसका सफर

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 10:59 AM IST

स्पेन का खोजी हर्नेन्डो कोर्टेस एज‍टेक के राजा मान्तेजुमा के दरबार में पहुंचा था जहां उसने पहली बार चॉकलेट को पेश की।

international chocolate day 2018 how chocolate turned into a sweet desert
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लाइफस्टाइल डेस्क. शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसे चॉकलेट खाना पसंद न हो। मनपसंद डेजर्ट में सबसे ऊपर चॉकलेट का नाम ही आता है। आज इंटरनेशनल चॉकलेट डे है, जो अमेरिका सहित अन्य कई देशों में भी सेलिब्रेट किया जाता है। ज्यादातर लोगों को चॉकलेट का स्वाद पसंद है लेकिन यह हमेशा से मीठी नहीं थी, इसका स्वाद तीखा हुआ करता था। दरअसल, अमेरिकन लोग इसे बनाने के लिए कोको के बीजों को पीसकर उसमें कुछ मसाले और मिर्च मिलाते थे। इसी वजह से इसका स्वाद तीखा हुआ करता था। कई वर्षों तक लोग इसका प्रयोग एक पेय की तरह किया करते थे। इसके बाद डॉक्टर सर हैस स्लोने ने इस पेय की नई रेसिपी तैयार कर उसे खाने लायक बनाया और इसका नाम रखा कैडबरी मिल्क चॉकलेट। चॉकलेट का तीखे से मीठे बनने का सफर वाकई काफी दिलचस्प था। जानते हैं इसके सफर और खूबियों से जुड़ी 4 खास बातें...

शुरुआत: यूरोप में मिली थी मिठास, शाही ड्रिंक में थी शामिल
अपने शुरुआती दौर में चॉकलेट का टेस्ट तीखा हुआ करता था। ककाउ के बीजों को फर्मेंट करके रोस्ट किया जाता था और इसके बाद इसे पीसा जाता था। इसके बाद इसमें पानी, वनीला, शहद, मिर्च और दूसरे मसाले डालकर इसे झागयुक्त पेय बनाया जाता था। उस समय ये शाही पेय हुआ करता था। लेकिन चॉकलेट को मिठास यूरोप पहुंचकर मिली। यूरोप में सबसे पहले स्पेन में चॉकलेट पहुंची थी। स्पेन का खोजी हर्नेन्डो कोर्टेस एज‍टेक के राजा मान्तेजुमा के दरबार में पहुंचा था जहां उसने पहली बार चॉकलेट को पेश किया।

सफर : 4 हजार साल का पुराना है इतिहास
चॉकलेट का इतिहास लगभग 4000 साल पुराना है। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि चॉकलेट बनाने वाला कोको पेड़ अमेरिका के जंगलों में सबसे पहले पाया गया था। हालांकि, अब अफ्रीका में दुनिया के 70% कोको की पूर्ति अकेले की जाती है। कहा जाता है चॉकलेट की शुरुआत मैक्सिको और मध्य अमेरिका के लोगों ने की था। 1528 में स्पेन ने मैक्सिको को अपने कब्जे में लिया पर जब राजा वापस स्पेन गया तो वो अपने साथ कोको के बीज और सामग्री ले गया। जल्द ही ये वहां के लोगों को पसंद आ गया और अमीर लोगों का पसंदीदा पेय बन गया।

शोध : भारतीय महिलाओं को चॉकलेट अधिक पसंद
एक शोध में यह पाया गया कि पुरुषों की तुलना में भारतीय महिलाएं 25 फीसदी ज्यादा चॉकलेट उत्पाद ऑनलाइन मंगाती हैं। अध्ययन के अनुसार ऑनलाइन सभी मिठाइयों में से आधे से ज्यादा चॉकलेट की बनी होती हैं। वास्तव में इस प्लेटफार्म पर प्रमुख मांग वाली 60 फीसदी मिठाइयां चॉकलेट पर आधारित हैं। एक अन्य तथ्य के अनुसार इसमें 18-24 आयु वर्ग वाले लोग ज्यादा चॉकलेट उत्पादों को ऑनलाइन मंगाते हैं।

सेहत : बढ़ती उम्र का प्रभाव घटाती और वजन कंट्रोल करती है

एक अध्ययन के अनुसार दो सप्ताह तक रोजाना डार्क चॉकलेट खाने से तनाव कम होता है। चॉकलेट खाने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन नियंत्रित होते हैं। इसे ऑक्सीडेटिव तनाव घटाने के लिए बहुत शक्तिशाली माना गया है। इसकी वजह से सूजन, चिंता और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी समस्याएं उत्पन्न होती जाती हैं।

वर्ष 2010 में हुए एक शोध से पता चला है कि यह ब्लड-प्रेशर को कम करता है। यूरोपीय सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी के शोध में पाया गया है कि ज्यादा मात्रा में चॉकलेट खाकर दिल से जुड़ी कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहा जा सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं द्वारा 2015 में किए गए अध्ययन के अनुसार यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। कैलिफोर्निया के सैन डिएगो विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया है कि जो वयस्क नियमित रूप से चॉकलेट खाते हैं, उनका बॉडी मास इंडेक्स चॉकलेट न खाने वालों की तुलना में कम रहता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार चॉकलेट में मौजूद कोको फ्लैवनॉल बढ़ती उम्र के लक्षणों को जल्दी नहीं आने देता है। वहीं एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार रोजाना हॉट चॉकलेट के दो कप पीने से वृद्ध लोगों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनकी सोचने की क्षमता भी तेज होती है।

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