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लुप्त हो जाएंगे पेशेवर मातम मनाने वाले

9 वर्ष पहले
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ताइपे. किसी के कहने पर दहाड़े मार मार कर रोना कोई हँसी-खेल नहीं है, लेकिन ताइवान की ल्यू जिन लिन ऐसा हर रोज़ करती हैं और इसके बदले में उन्हें पैसा मिलता है.

यानी ऐसे लोगों की मौत पर शोक व मातम मनाना और रोना उनका पेशा है, जिन्हें न तो वो जानती हैं और न ही कभी उन्हें देखा है. वो ताइवान की सर्वेश्रेष्ठ पेशेवर रोने वाली यानी रुदालियों में से एक हैं. दरअसल ये ताइवान की एक बहुत पुरानी परंपरा है जो कि अब तेज़ी से खत्म हो रही है.

मातम के व्यवसायीकरण को कुछ लोग विवादास्पद मानते हैं लेकिन ल्यू जैसे पेशेवरों का कहना है कि उनका पेशा ताइवान की एक पुरानी परंपरा है, जहां ये माना जाता है कि मृत व्यक्ति के लिए जितना ज्यादा और तेज़ आवाज़ में शोक मनाया जाएगा तो वो ‘दूसरी दुनिया’ में आसानी से चला जाएगा.

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