--Advertisement--

महाभारत 2019: कांग्रेसी कहकर हमको गाली देते हैं, पर मैंने क्या लाभ लिया- शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

साक्षात्कार में स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि आपके सामने जो संत भेष में हैं वे राजनैतिक दलों की दृष्टि में प्रचारक हैं।

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 08:18 AM IST
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि गो-हत्या मुसलमानों के लिए नहीं, डॉलर के लिए हो रही है। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि गो-हत्या मुसलमानों के लिए नहीं, डॉलर के लिए हो रही है।

नई दिल्ली. महाभारत 2019 के तहत दैनिक भास्कर ने ज्योतिषपीठ एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और गोवर्धन मठ, पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से राजनीति और सामाजिक विषयों पर खास बात की। जिसमें एक सवाल के जवाब में स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि कांग्रेसी कहकर हमको गाली देते हैं, पर मैंने क्या लाभ लिया? वहीं स्वामी निश्चलानंद का कहना है कि आपके सामने जो संत भेष में हैं वे राजनैतिक दलों की दृष्टि में प्रचारक हैं। साक्षात्कार के प्रमुख अंश।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से सवाल-जवाब

Q. क्या देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा है? हिंदू-मुस्लिम विवाद अक्सर सामने आ रहे हैं?

A. इसका कारण राजनीति है, धर्म नहीं। हमें मुस्लिम भाइयों से यह कहना है कि आपको नमाज पढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। जहां आपकी मस्जिद है, वहां कोई तोड़ने-फोड़ने नहीं जाता। हमारा-आपका झगड़ा किस बात का है? अभी देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा है।

Q. कांग्रेस के नेता आपके पास सलाह लेने आते हैं, मोदी या उनके मंत्री भी सलाह लेने आए हैं?
A.
हमारे मन में कोई भेद-भाव नहीं है। हम जब छत्तीसगढ़ में जाते हैं तो रमन सिंह के घर ही ठहरते हैं। जहां तक सम्मान की बात है तो अन्याय हो रहा है। जो सम्मान दलाई लामा को है क्या वो शंकराचार्य को है? मोदी प्रधानमंत्री हैं, क्या वे यहां दर्शन करने आए? आते तो क्या हम डंडा मारते? वो तो ये चाहते हैं कि हम उनसे अपॉइंटमेंट लें और जाकर मिलें। कांग्रेस के बहुत से लोग हमारे पास आते हैं, हम कभी भी किसी से कोई व्यक्तिगत कार्य नहीं बोलते। (गुस्से में) कांग्रेसी कहकर हमको गाली तो देते हैं, लेकिन कांग्रेसी बनकर मैने कौन-सा लाभ ले लिया? ये तो आप बताइए।

Q. कर्नाटक चुनाव के बाद के घटनाक्रम को आप कैसे देखते हैं?
A. सबसे बड़ी बात तो यह थी कि 104 सीट आने के बाद हर जगह नगाड़े बज रहे थे। नगाड़े आप तब बजाते जब आपको बहुमत मिल गया होता। क्या जरूरत थी, ऐसा करने की। आप यह क्यों कहते हैं कि हम सब जगह अपना राज स्थापित कर लेंगे। आप तो सबकी सेवा करिए और वो करिए जो आप कह रहे थे। प्रधानसेवक, चौकीदार बनकर रहिए। झूठ मत बोलिए।

Q. ऐसे संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना ही नहीं?
A.
इस प्रकार के सम्मान के पात्र कुछ विशिष्ट व्यक्ति ही होते हैं। समाज में जिसका सम्मान है। ऐसे ही लोगों को सम्मानित किया जाता है। किंतु जो सरकार के ही सम्मान से सम्मानित हो रहे हैं, वो इसके पात्र नहीं हैं।

Q. मोदी सरकार के बीते चार साल के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?
A.
हम लोगों को मोदी के कार्यकाल से बहुत निराशा हुई है। निराशा का कारण उनका प्रधानमंत्री होना नहीं है। उन्होंने कहा था कि ‘यूपीए सरकार के जमाने में भारत गो-मांस का निर्यात करता है। इससे मेरा हृदय जल रहा है, अापका जलता है कि नहीं?’ हमें उम्मीद थी कि उनके प्रधानमंत्री बनते ही यह कलंक मिट जाएगा। आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अपितु बढ़ा ही है। दूसरा, कॉमन सिविल कोड लाएंगे, वह भी नहीं आया। कश्मीर की स्थिति, धारा 370 भी समाप्त नहीं हुई। आतंकवाद में कोई कमी नहीं आई। हमें उम्मीद थी कि काशी में गंगोत्री से गंगा की अविरल धारा लाएंगे, लेकिन नहीं आ पाई। हमारा तो मुंह ही बंद कर दिया इन्होंने। अगर अब इनकी सरकार गई तो लोग कहेंगे- हिंदुओं की सरकार बनी थी, तब तुमने गो-हत्या बंद क्यों नहीं करवाई।

Q. गो-रक्षकों पर प्रधानमंत्री मोदी के कथन पर आप क्या कहेंगे?
A.
भारत में आंशिक रूप से गो-हत्या बंद है। कुछ प्रदेशों में गो-हत्या धड़ल्ले से होती है। गो-भक्त ऐसा होने से रोकते हैं। प्राय: यह देखा जाता है कि पुलिस रुपए लेकर गो-हत्या करने वालों को छोड़ देती है। इससे गो-भक्तों का दिल दुखता है। पुलिस वाले नहीं देखते हैं तो इनके हाथ-पैर भी चलते हैं। आप ये क्यों कहते हैं कि ये असामाजिक तत्व हैं? देश के हित में गो-हत्या बंद होना चाहिए। गो-हत्या मुसलमानों के लिए नहीं हो रही है, डॉलर के लिए हो रही है। गोमाता केवल हिंदू की नहीं है, मुसलमान की भी है।

Q. मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण नहीं कर पाई?
A.
प्रारंभ से ही जनता को भ्रम में रखा गया है। मामला कोर्ट में था और कोर्ट से वहां स्टे लगा हुआ है। आप कोर्ट में तो कुछ कर नहीं रहे हैं और जनता से कहते हैं कि हमें वोट दो तो हम मंदिर बना देंगे। ये धोखा है। राम मंदिर के लिए इन्होंने शिलान्यास करवाया था, शिलान्यास गर्भगृह से दूर करवाया। जबकि जनता की मांग थी कि जहां भगवान राम का जन्म हुआ है, उसी जन्मभूमि पर राम मंदिर बनाया जाए। जब हम गए थे शिलान्यास करने तो इसी भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने हमें कैद कर लिया था। हमने राम जन्मभूमि पुनर्निर्माण समिति बनाई और उसमें एक पक्ष बने। हमने सिद्ध कर दिया कि इस जन्मभूमि पर मस्जिद पहले भी कभी नहीं थी, आज भी नहीं है।

Q. बांग्लादेशी शरणार्थी और रोहिंग्या मामले में सरकार के रुख पर आपकी क्या राय है?
A.
सरकार में ताकत है तो देश में जहां शरणार्थी आ रहे हैं, उन्हें वहीं बसवाओ। म्यांमार से रोहिंग्या निर्वासित हो रहे हैं तो उन्हें म्यांमार में ही बसवाना चाहिए।

Q. दलितों में वर्तमान में बेहद असंतोष उभर रहा है? आपके प्रयास इस दिशा में क्या हैं?
A.
दलित समाज के अभिन्न अंग हैं। उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर हमारे पास भोजन है और दलित और हम दो ही खाने वाले हैं, तो हम चाहेंगे कि दलित पहले खाए। बचे तो हम खाएं। हम समझा रहे हैं और हम काम कर रहे हैं उनके बीच। हम दलितों-आदिवासियों के बीच जाते हैं, जाएंगे।

Q. कांग्रेस नेता अब मंदिर, मठों की लगातार परिक्रमा कर रहे हैं, कांग्रेस में आया बदलाव कैसा है?
A.
मंदिर जाएं, आपत्ति नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि भारत में अभी ऐसे लोग हैं, जो निर्णायक हैं और उनकी शरण में आपको जाना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: आपके सामने जो संत भेष में हैं, दलों की दृष्टि में वो प्रचारक हैं- स्वामी निश्चलानंद...

स्वामी निश्चलानंद के मुताबिक, विभाजन के बाद भारत जैसा होना चाहिए था, उस ढंग से नींव डालते तो समस्या नहीं होती। स्वामी निश्चलानंद के मुताबिक, विभाजन के बाद भारत जैसा होना चाहिए था, उस ढंग से नींव डालते तो समस्या नहीं होती।

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से भास्कर के सवाल-जवाब

 

Q. संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना ही नहीं? 

A. सही और गलत तो राजनेता जानें। अपने-अपने दल के प्रचारक बनाने के लिए संतों का उपयोग हुआ। परंपरा के संतों का उत्पीड़न हुआ। संत भेष में जो व्यक्ति आए, वो आपकी दृष्टि में संत हैं, लेकिन राजनेताओं की दृष्टि में तो वो पार्टी के कार्यकर्ता-प्रचारक हैं। संत को सुविधा चाहिए उनको (राजनीतिक दलों को) प्रचारक चाहिए। दाेनों में तालमेल है। ये विकृति अंग्रेजों की डाली हुई है।

 

Q. कांग्रेस नेता अब मंदिर, मठों की परिक्रमा कर रहे हैं, यह बदलाव कैसा है?
A. इसका नाम बदलाव नहीं है। यह दिशाहीन अवसरवादिता है। धार्मिकता नहीं है।

 

Q. गो-रक्षकों पर मोदी की टिप्पणी पर आपकी क्या राय है?
A.
 गो-रक्षक गलत हैं, मोदीजी ने यह नहीं कहा। 

 

Q. मोदी सरकार के 4 साल को आप कैसे देखते हैं?
A. 
किसी राजनीतिक दल या राजनेता की समीक्षा मैं नहीं करता। सत्ता लोलुपता, अदूरदर्शिता की चपेट से कोई भी दल मुक्त नहीं है। मैकाले की चलाई शिक्षा पद्धति से जिनका मस्तिष्क और हृदय बना है, वो भारत को स्वस्थ्य राजनीति नहीं दे सकते। वो किसी भी दल के क्यों ना हों। वो भारत को परख भी नहीं सकते।

 

Q. क्या देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा है? हिंदू-मुस्लिम विवाद अक्सर देश के विभिन्न कोनों से आते रहते हैं?
A. 
ये सब राजनीतिक दलों के हथकं‌डे हैं। संप्रदाय शब्द का अर्थ विकृत ढंग से लिया गया है। संप्रदाय का अर्थ है सनातन परंपरा से, ज्ञान विज्ञान को प्राप्त करने की विधा। सनातन गुरु परंपरा। विवाद राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं की देन है। सद्भावपूर्वक संवाद न होने के कारण विवाद होता है। सिर्फ हिंदू-मुस्लिम का ही एक विवाद नहीं है। पति-पत्नी तलाक के लिए भी विवाद होता है। व्यक्ति और समाज की संरचना गलत है, उसका विस्फोट है यह।

 

Q. इस समय आप देश में राजनीतिक रूप से पांच सबसे बड़ी समस्याएं कौन-सी देखते हैं?
A.
 सत्ता लोलुपता और अदूरदर्शिता भारत में राजनीति का पर्याय बन चुकी हैं। सैद्धांतिक धरातल पर भारत घोर परतंत्र देश है। इसकी शिक्षा की प्रणाली सनातन वैदिक आर्य सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। शिक्षण संस्थान आदि में विसंगति की पराकाष्ठा है। रक्षा की प्रणाली, सेवा और उद्योग के प्रकल्प भी भारत में अपने नहीं हैं। संविधान की आधारशिला भी भारत की अपनी नहीं है। संवैधानिक धरातल पर हिंदू एक नंबर का नागरिक नहीं है। पाश्चात्य जगत की अंधानुकृति भारत के पतन का एक मुख्य कारण है। हमारी कोई पहचान नहीं रह गई है। राजनीतिक दलों में भी अपने दल की सीमा में सद्‌भावपूर्वक संवाद खत्म हो गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने जैसे पत्रकारिता का सहारा लेकर वक्तव्य प्रसारित किया, उससे सिद्ध होता है कि न्यायतंत्र में भी पर्याप्त विसंगति है।

 

Q. मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण नहीं कर पाई?
A. 
अभी सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। निर्णय कब आएगा? अनुकूल निर्णय आएगा या प्रतिकूल निर्णय आएगा? निर्णय में कितना समय लगता है? निर्णय हिंदुओं के प्रतिकूल आया, तब क्या होगा? अनुकूल ही आ गया, तो मुस्लिम क्या प्रतिक्रिया करेंगे? इसलिए सब भविष्य के गर्भ में है। विभाजन के बाद का भारत जैसा होना चाहिए था, उस ढंग से नींव डाली जाती तो यह सब समस्या ही नहीं होती।

 

Q. श्रीश्री रविशंकरजी मंदिर मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं, यह तो आपको करना चाहिए?
A.
 मुझे मध्यस्थता करने की क्या जरूरत है। मध्यस्थता तब होती है, जब दोनों पक्ष स्वीकार करें। किसी ने उनको स्वीकार नहीं किया? आज रामलला तंबू में हैं। वो मेरे कारण हैं। मैंने अगर रामालय ट्रस्ट में हस्ताक्षर कर दिया होता तो मंदिर-मस्जिद दोनों का निर्माण हो गया होता। मैंने जो निर्णय दिया नरसिंहराव और वाजपेयी सरकार ने भी उसके विरोध में कदम उठाने का साहस नहीं किया। मुस्लिम तंत्र भी हमारे प्रतिकूल आज तक तो नहीं हुआ कभी, तो हमको मध्यस्थता करने की जरूरत क्या है?

 

Q. बांग्लादेशी शरणार्थी और रोहिंग्या मामले में सरकार के रुख पर आपकी क्या राय है? 
A.
 सरकार जाने सरकार की बात। हम तो यह जानते हैं कि अवैध रीति से मध्य प्रदेश हो या बंगाल, सब प्रांत भरे हुए हैं। कल अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं पर विपत्ति आ जाती है, तो वो कहां जाएंगे? कल अमेरिका की सरकार ही खदेड़ना प्रारंभ कर दें, तो हमारे व्यक्तियों को हम लेंगे कि नहीं? इसलिए किसी भी नीति के निर्धारण में पूरे राष्ट्रीय-विश्वस्तर का दृष्टिकोण होना चाहिए। मानवता का पक्ष होना चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। यह देखना पड़ेगा कि व्यक्ति राष्ट्रद्रोही न हों, हमारे देश के प्रति आस्था रखते हों।

 

Q. दलितों में बेहद असंतोष उभर रहा है? 
A. 
असंतोष पैदा किया गया है। किसी भी जगह आप रहना चाहेंगे तो उसकी कुछ मर्यादाएं होती हैं। असंतोष राजनेताओं ने पैदा किया। ब्राह्मणों के यहां यज्ञोपवित, विवाह, दाह-संस्कार, यज्ञ, श्राद्ध आदि कर्म होता था, उसमें सबकाे लाभ होता था कि नहीं? कटुता स्वतंत्रता के बाद पैदा की गई है।

X
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि गो-हत्या मुसलमानों के लिए नहीं, डॉलर के लिए हो रही है।स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि गो-हत्या मुसलमानों के लिए नहीं, डॉलर के लिए हो रही है।
स्वामी निश्चलानंद के मुताबिक, विभाजन के बाद भारत जैसा होना चाहिए था, उस ढंग से नींव डालते तो समस्या नहीं होती।स्वामी निश्चलानंद के मुताबिक, विभाजन के बाद भारत जैसा होना चाहिए था, उस ढंग से नींव डालते तो समस्या नहीं होती।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..