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IPL-MNC खींचतान: मैच को जयपुर से बाहर ले जाने का दबाव, नहीं झुका निगम

3 वर्ष पहले
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जयपुर. आईपीएल मैचों के दौरान विज्ञापन होर्डिंग, सफाई व फायर एनओसी जैसे मामलों पर नगर निगम आयोजकों को राहत देने के मूड में नहीं है। जयपुर में मैच कराए जाने पर निगम ने आयोजकों से चार करोड़ रुपए वसूलने का एस्टीमेट तैयार किया है। हर मैच के दौरान 30 लाख रुपए नकद दिए जाने के मामले में निगम और आयोजकों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। निगम ने मुख्य सचिव की मौजूदगी में 30 लाख रुपए के भुगतान पर सहमति होने की बात कही है वहीं आयोजकों ने इससे इंकार किया है। इधर, आईपीएल आयोजकों ने भरोसा दिलाया है कि जयपुर से मैच किसी भी सूरत में बाहर नहीं जाएं यह उनकी प्राथमिकता होगी। आयोजकों ने निगम के साथ चल रही खींचतान के जल्द खत्म होने की संभावना जताई है।


मैच के दौरान स्वच्छता की शपथ नहीं लिए जाने पर भी निगम ने कड़ी नाराजगी जताई है। मेयर अशोक लाहोटी ने इस मामले में बीसीसीआई को पत्र लिखे जाने की बात कही है। लाहोटी का कहना है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि मैच से पहले स्टेडियम में स्वच्छता की शपथ दिलाई जाएगी, लेकिन अब आयोजक बीसीसीआई का हवाला देकर इससे मुकर रहे हैं। निगम ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि आईपीएल आयोजक हर बात को बीसीसीआई के क्षेत्राधिकार में बताकर टाल रहे हैं। 


डिप्टी मेयर मनोज भारद्वाज ने निगम के द्वारा आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स से शुल्क वसूली को सही ठहराया है। भारद्वाज का कहना है कि आईपीएल राष्ट्रीय गेम नहीं है यह कमर्शियल गेम है। राजस्थान रॉयल्स से वहीं शुल्क वसूले जा रहे है जिनका हर शहरवासी शुल्क देता है और वह शुल्क शहर के विकास में खर्च होता है।  ऐसे में सभी शुल्क वसूलने के बाद ही आगामी मैच की अनुमति दी जाएगी।

 

निगम का तर्क : यहां करोड़ों की बोली और हमारे पास फेज वायर तक खरीदने का पैसा नहीं 
नगर निगम के मेयर अशोक लाहोटी के अनुसार आईपीएल पूरी तरह व्यावसायिक आयोजन है। इसमें खिलाड़ियों की बोली से लेकर सट्टा तक लगता है। खेल प्रेमियों के लिए यह अच्छा अायोजन है लेकिन शहर की जनता को इससे सीधे तौर पर कोई फायदा नहीं है। इसके आयोेजन के दौरान इंफ्रा स्ट्रक्चर के सुधार पर अतिरिक्त भार और पड़ रहा है। पांच करोड़ रुपए आईपीएल में खेलने वाले एक नामी खिलाड़ी की कीमत से भी आधा है। अगर यह पैसा निगम के खाते में आता है तो सफाई सुधार, पार्क सुधार, रोड लाइट मेंटिनेंस और सड़कों के नवीनीकरण के लिए ही उपयोग होता। निगम के पास फेज वायर तक खरीदने के लिए पैसा नहीं हैं। 


आयोजकों की दलील : हमारी पूरी कोशिश है कि रॉयल्स के सभी मैच जयपुर में हों
राजस्थान रॉयल्स के वाइस प्रेसिडेंट राजीव खन्ना के मुताबिक बैठक में 30 लाख रुपए तत्काल देने के लिए कोई सहमति नहीं बनी थी। फायरमैन के लिए 9.5 लाख ड्राफ्ट भेजा, लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ। कुछ छोटी-मोटी अड़चनें हैं जो जल्द ही दूर जाएंगी। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि रॉयल्स के सभी घरेलू मैच जयपुर में ही हो। रॉयल्स की टीम भी अपने फैंस को दिल से चाहती है। जहां तक मैच से पहले स्वच्छता की शपथ की बात है तो वह बीसीसीआई नियमों के कारण नहीं ली गई। बीसीसीआई के नियम हमें इसकी स्वीकृति नहीं देते। इसके लिए पब्लिक प्लेस पर जल्द ही एक बड़ा इवेंट कर सभी खिलाड़ी स्वच्छता की शपथ लेंगे। 

 

 

जायज सवाल- सशर्त थी मैच की अनुमति, फायरमैन भगा दिए...आग कौन बुझाता?

निगम ने पहले मैच की एनओसी सशर्त दी थी। इससे पहले यह तय हुआ था कि राजस्थान रॉयल्स टीम को तभी एनओसी मिलेगी, जब वह स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर रहेगी और सफाई सुधार के लिए प्रचार करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। निगम प्रशासन ने मैच की व्यवस्थाओं के लिए 3.50 करोड़ के विज्ञापन होर्डिंग शुल्क के अलावा सफाई व अन्य के लिए 1.56 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च का एस्टीमेट दिया। ताकि फायर फाइटिंग, सफाई व्यवस्था, रोड लाइट व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर की अतिरिक्त व्यवस्था की जा सके। मुख्य सचिव के सामने तय हुआ था कि निगम की ओर से 100 फायर फाइटर मैन लगाएगा। इसके एवज में आईपीएल के आयोजक प्रति कर्मचारी 1 हजार रुपए का भुगतान करेंगे। स्कोर टावर को वॉच टावर की तरह उपयोग करना होगा। विज्ञापन शुल्क का मामला बीसीसीआई तय करेगी। फायर फायर मैन   के पास तक नहीं बनाए और उन्हें भीतर नहीं जाने दिया गया। अगर आग लगती तो बुझाता कौन? 

 

200 करोड़ कमाएगा आईपीएल, निगम ने अपने काम का पैसा ही तो मांगा है

3.50 करोड़ रुपए विज्ञापन होर्डिंग का शुल्क।
2.50 लाख रुपए सीवर लाइन उपयोग और रखरखाव का शुल्क।
5 लाख रुपए फूड स्टॉल के लासइेंस का शुल्क।
2.55 लाख रुपए मच्छर-मक्खी मारने के लिए फोगिंग करने का शुल्क।
2.10 लाख रुपए मोबाइल टॉयलेट शुल्क।
9.80 लाख रुपए फायर ब्रिगेड की गाड़ी और फायर मार्शल की व्यवस्था के लिए। 
31.25 लाख रुपए प्रशासनिक शुल्क (25 प्रतिशत) भी वसूल करना है।

 

 

 

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