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#Worldmilkday : दूध न पचे तो क्या होगा? दूध मांसाहार या शाकाहार, क्यों दूध से मिलने वाला कैल्शियम आसानी से नहीं पचता?

दूध में 88 फीसदी पानी और शेष प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट होता है।

Dainik Bhaskar

Jun 01, 2018, 05:23 PM IST
दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात का है। रात को सोने के कुछ देर पहले गुनगुना दूध पीने से नींद से जुड़े डिसआॅर्डर दूर होते हैं। दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात का है। रात को सोने के कुछ देर पहले गुनगुना दूध पीने से नींद से जुड़े डिसआॅर्डर दूर होते हैं।

हेल्थ डेस्क. जो भी फूड जितनी देर शरीर में रहता है वह शरीर पर अपने पाचन के लिए उतना ही दबाव डालता है। दूध भी 6-8 घंटे पचने में लेता है। खासबात है कि दूध शरीर में मौजूद दूसरी चीजों के साथ बड़ी मुश्किल से जुड़ता है। अमाशय में पहुंचने पर यह दही में बदल जाता है। ये दही अन्य पदार्थों के आसपास जमा होकर उन पर पाचक रसों को क्रिया को रोक देता है। इसलिए दूध न तो खुद को ठीक से पचने देता है और न ही दूसरी चीजों को पचने देता है। एक्सपर्ट के मुताबिक दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात का है। रात को सोने के कुछ देर पहले गुनगुना दूध पीने से नींद से जुड़े डिसआॅर्डर दूर होते हैं। इसके लिए अलावा सुबह नाश्ते में दूध ले सकते हैं लेकिन ध्यान रखें इसकी मात्रा एक गिलास से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसे ओट्स के साथ नाश्ते में शामिल करना बेहतर विकल्प है। हर साल 1 जून को वर्ल्ड मिल्क डे मनाया जात है। जानते हैं दूध के जुड़ी कुछ जरूरी बातें...

5 प्वाइंट्स : दूध न पचे तो क्या होगा

1. 3 साल तक ही स्त्रावित होता रेनिन एंजाइम दूध के पाचन के लिए शरीर में रेनिन नाम के एंजाइम की जरूरत होती है। ये एंजाइम अमाशय में मौजूद एक ग्रंथि से निकलता है। यह एक बच्चे जन्म से लेकर 3 साल तक ही स्त्रावित होता है। इसके बाद शरीर में इसका निर्माण होना बंद हो जाता है।
2. पाचन में मदद करता लेक्टेज एंजाइम ऐसे में सवाल उठता है कि जब रेनिन बनता ही नहीं है तो दूध का पाचन कैसे होता है। दरअसल रेनिन के अलावा लेक्टेज एंजाइम पाचन में मदद करता है। जो आंत में पाया जाता है।
3. उम्र के साथ घटता लेक्टेज एंजाइम उम्र के साथ लेक्टेज एंजाइम भी घटने लगता है। ऐसी स्थिति में बेचैनी, उल्टी, डायरिया, ऐंठन और गैस की समस्या होने लगती है।
4. दूध अधिक इकट्ठा होने पर बढ़ते बैक्टीरिया लंबे समय तक ये समस्या बनी रहती है तो दूध शरीर में इकट्ठा होने लगता है और नतीजतन बैक्टीरिया की ग्रोथ में बढोतरी होने लगती है।
5. पेट की बीमारियों बढ़ने का खतरा बैक्टीरिया अधिक बढ़ने पर पेट में कार्बन डाइट आॅक्साइड अधिक बनती है तो पेट से सम्बंधित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।

हड्डियों के लिए सिर्फ कैल्शियम जरूरी नहीं

हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है। इसके लिए दूध को डाइट में शामिल किया जाता है। लेकिन कैल्शियम इतनी आसानी से शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होता है। इसके लिए शरीर में फॉस्फोरस और विटामिन-डी की मौजूदगी जरूरी है। शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए कैल्शियम फास्फोरस का 2:1 का अनुपात होना जरूरी है। यदि यह अनुपात बढ़ता है तो हड्डियां मजबूत होती हैं। विटामिन-डी का सबसे बेहतर सोर्स धूप है। रोजाना सुबह 6-8 बजे के बीच 20 मिनट के लिए धूप में रहने से नेचुरल विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। कभी-कभी अत्यधिक कैल्शियम के कारण पथरी भी हो जाती है। इसके अलावा जब हम प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता वाली कोई चीज खाते हैं तो ये दोनों आपस में जुड़ जाते हैैं और कैैल्शियम का अवशोषण बाधित हो जाता है।

दूध मांसाहार या शाकाहार ?

दूध को मांसाहार मानने वालों का तर्क है कि दूध एक विशेष समय स्त्रावित होने वाला ऐसा लिक्विड है जिसका आधार ब्लड है। अमेरिका के मशहूर 'द बैबॉक इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल डेयरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट' के विशेषज्ञ माइकल वैटीआॅक्स की रिसर्च के मुताबिक एक किलो दूध तब बनता है जब 400 से 500 किलोग्राम खून दुग्ध ग्रंथियों से होकर प्रवाहित होता है। माना जाता है कि जैसा खून होता है वैसा दूध बनता है। दूध को लिक्विड मांसाहार मानने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इसका और खून का संगठन एक जैसा है।

कैल्शियम इतनी आसानी से शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होता है। इसके लिए शरीर में फॉस्फोरस और विटामिन—डी की मौजूदगी जरूरी है। कैल्शियम इतनी आसानी से शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होता है। इसके लिए शरीर में फॉस्फोरस और विटामिन—डी की मौजूदगी जरूरी है।
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दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात का है। रात को सोने के कुछ देर पहले गुनगुना दूध पीने से नींद से जुड़े डिसआॅर्डर दूर होते हैं।दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात का है। रात को सोने के कुछ देर पहले गुनगुना दूध पीने से नींद से जुड़े डिसआॅर्डर दूर होते हैं।
कैल्शियम इतनी आसानी से शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होता है। इसके लिए शरीर में फॉस्फोरस और विटामिन—डी की मौजूदगी जरूरी है।कैल्शियम इतनी आसानी से शरीर में एब्जॉर्ब नहीं होता है। इसके लिए शरीर में फॉस्फोरस और विटामिन—डी की मौजूदगी जरूरी है।
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