जामिया में आइशी बोलीं-कश्मीर पर लगी पाबंदी को इस प्रदर्शन में नहीं भूल सकते

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Jan 16, 2020, 07:20 AM IST
New Delhi News - ishi in jamia can not forget the ban on boli kashmir in this demonstration
जामिया हिंसा के एक महीने पूरे होने पर बुधवार दिल्ली सहित देशभर की अलग-अलग यूनिवर्सिटी के छात्र-शिक्षक, संगठनों के प्रतिनिधि और सिविल सोसायटी के लोग को यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-7 के पास जुटे। पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग और नागरिकता संशोधन कानून वापस को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा रामजस कॉलेज में भी संविधान की प्रस्तावना पढ़ने का कार्यक्रम छात्रों की तरफ से रखे जाने और उसकी अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर तनात की स्थिति में भारी पुलिस बल तैनात रहा। देर शाम जाकिर हुसैर कॉलेज में बाहर भी नागरिकता कानून के खिलाफ नारेबाजी की गई।

‘चलो जामिया’ नारा दिए जाने के बाद एकत्रित लोगों ने दिनभर खूब नारेबाजी की। सेंट स्टीफन काॅलेज के स्टूडेंट्स और पिंजड़ा तोड़ आंदोलन से जुड़े स्टूडेंट्स भी समर्थन में पहुंचे। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष भी जामिया पहुंची। आइशी ने यहां कश्मीर में लगी पाबंदी का मुद्दा उठाया। यहां तक कहा कि प्रदर्शन में हम कश्मीर को नहीं भूल सकते। हम कश्मीरियों को पीछे नहीं छोड़ सकते, क्योंकि वहीं से संविधान पर आक्रमण इस सरकार ने शुरू किया था। हमें शाहीन बाग की हिम्मती महिलाओं से प्रेरणा लेकर आंदोलन जारी रखना चाहिए। पुलिस ने कैंपस में घुसकर लाइब्रेरी तोड़ी और मस्जिद पर भी हमला किया, इस पर हम चुप नहीं बैठेंगे। पूर्व राज्यसभा सांसद बिनी विश्वाम भी जामिया पहुंचे। उन्होंने कहा छात्र शक्ति के बल पर नहीं रोके जा सके। हम सब साथ मिलकर इस काले कानून को हरा देंगे। एम्स के डॉक्टर्स भी समर्थन में पहुंचे। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने कहा कि जो भी विरोध कर रहा है उसे नक्सली कहा जा रहा है।

जामिया मामला
राष्ट्रपति को पोस्ट कार्ड लिखे जाएंगे, अनशन जारी

जामिया आंदोलन की को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने बुधवार को देशभर के नागरिकों के लिए एक अपील जारी करके हर दिन एक घंटा नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को दें। ताकि भारत की बहु सांस्कृतिक पहचान की रक्षा कर सकें। प्रदर्शन में अलग-अलग धर्म के तीन से ज्यादा लोग शामिल हों। 16 जनवरी को संविधान प्रस्तावना पाठ, 17 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति को पोस्टकार्ड लिखें जिसमें उनसे अनुरोध हो कि सरकार नागरिकता को वापस ले और विधेयक लाकर एनपीआर को लागू करने से रोके। इसके अलावा अन्य कार्यक्रम होंगे।

इधर, पुलिस पर कार्रवाई को कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा जामिया

पुलिस पर कार्रवाई के लिए जामिया यूनिवर्सिटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। फैसला बुधवार को हुई एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग लिया। यूनिवर्सिटी में बीते 15 दिसंबर 2019 की रात पुलिस लाइब्रेरी में घुसी थी। आरोप है कि वहां पुलिस ने छात्रों के साथ गलत व्यवहार किया। काउंसिल की मीटिंग में फैसला हुआ कि कोर्ट में धारा 156(3) के तहत अर्जी दी जाएगी व कोर्ट से पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की जाएगी।

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