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\'इशरत ने दिया है अवार्ड वापसी का मौक़ा\'

5 वर्ष पहले
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मुंबई के 26/11 हमले के अभियुक्त डेविड हेडली ने दावा किया है कि साल 2004 में गुजरात में पुलिस एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहां आत्मघाती हमलावर थी.

हेडली ने मुंबई के कोर्ट में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए गवाही के दौरान कहा कि इशरत जहां फिदायीन थी और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी थी.

हेडली ने ये भी बताया कि इशरत मुजम्मिल नाम के लश्कर के चरमपंथी के साथ काम करती थी.

हेडली के अनुसार इशरत लश्कर की महिला विंग के लिए आत्मघाती हमलावार के तौर पर काम करती थीं. इशरत सहित चार लोग 2004 में गुजरात पुलिस की मुठभेड़ में मारे गए थे.

इसे लेकर पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि इशरत की तरफ से केस लड़ रहीं उनकी मां की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इशरत के चरमपंथियों से कोई भी संबंध नहीं थे.

उन्होंने एक बयान में कहा, \"हेडली के बयान से कुछ भी नहीं बदला है. सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का सवाल ग़ैर क़ानूनी है.\"

हेडली ने ये भी कहा कि लश्कर ने भारत प्रशासित कश्मीर के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात के कई हिस्सों में हमले की योजना बनाई थी.

वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा, \"हेडली ने वर्ष 2013 में भी इशरत की तरफ इशारा किया था लेकिन उस वक़्त कोई भी इस सच को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था.\"

15 जून 2004 को अहमदाबाद के पास हुई मुठभेड़ में 19 साल की इशरत जहां और तीन अन्य लोग मारे गए थे.

उस समय गुजरात पुलिस ने ये कहा था कि इशरत और उनके तीन दोस्त तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के इरादे से अहमदाबाद पहुंचे थे, जहां पुलिस के साथ मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई थी.

इस मामले की जाँच के बाद अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने इशरत जहाँ एनकाउंटर को फ़र्जी बताया था.

लेकिन राज्य सरकार ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी और सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है.

सोशल मीडिया पर भी ये मुद्दा छाया रहा.

@hemaljadav लिखते हैं, “इशरत जहां ने एक बार फिर लोगों को मौक़ा दिया कि वो अपने अवॉर्ड वापस कर सकें.”

@Ish_Bhandari ने लिखा, “इशरत जहां के अधिकार के लिए चिंता करने वाले काश उन निर्दोष लोगों के लिए भी उतने ही चिंतित होते जो आतंकी घटनाओं में मारे जाते हैं.”

टीवी पत्रकार बरखा दत्त ने लिखा, “ये ख़ासा टर्निंग प्वाइंट है. किसी भारतीय कोर्ट में हेडली की इशरत जहां पर गवाही. इससे बहस पूरी तरह से बदल गई है.”

@saba_kaul लिखती हैं, “तीस्ता जी, अब बताइए. क्या इशरत जहां को ग़लत फंसाया गया?”

@sanjkoul ने लिखा, “नीतीश कुमार ने इशरत जहां को बिहार की बेटी बताकर उनका बचाव किया था. उनसे उम्मीद ही क्या की जा सकती है?

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