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डाउनलोड करेंभोपाल. इंदौर के मास्टर प्लान में प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई कम कर करोड़ों की इमारतों को मंजूरी देने में दोषी अफसरों के खिलाफ छह महीने बाद भी सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है। 30 मीटर की सड़क की चौड़ाई 18 मीटर करने के मामले में 5 ज्वाइंट डायरेक्टर और दो अफसर दोषी पाए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फाइल नगरीय विकास, आवास एवं पर्यारवण विभाग और टीएंडसीपी संचालनालय के बीच घूम रही है।
टीएंडसीपी के तत्कालीन संचालक संदीप यादव ने सितंबर 2017 में जांच करवाई थी। इंदौर में पदस्थ रहे पूर्व जेडी िवजय सावलकर, संजय मिश्रा, आरके सिंह, डीएल गोयल और नीरज आनंद लिखार के अलावा सहायक संचालक अरविंद कुमार जैन और आरसी सेन को दोषी पाया था। कार्रवाई के लिए तत्कालीन नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव से विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी। दोषी अफसरों को 27 सितंबर को शोकाज नोटिस देकर जवाब मांगा गया था।
यह था मामला
इंदौर के महत्वपूर्ण इलाके वाले छोटा बांगड़दा में गड़बड़ी हुई थी। टीएंडसीपी इंदौर के पूर्व जेडी विजय सावलकर ने मास्टर प्लान 2021 में प्रस्तावित 30 मीटर की जगह 18 मीटर सड़क के हिसाब से बिल्डिंग परिमशन जारी की थी। ये सारी मंजूरी 1 फरवरी 2008 के बाद दी गई थीं। इसके बाद बाकी जेडी भी इसी तरह मनमानी मंजूरी देते रहे।
अभी यह है स्थिति
मंत्रालय और टीएंडसीपी संचालनालय के बीच छह महीने से फाइल घूम रही है। टीएंडसीपी से जांच के बाद विभाग को लिखा गया था। इसके बाद प्रमुख सचिव के दफ्तर से फाइल वापस संचालनालय भेजी गई। इसमें स्पष्ट अभिमत मांगा गया था। वहीं फाइल आने के बाद महीनों पड़ी रही। अब संचालनालय से इसे मंत्रालय भेजा गया है। इसमें भी अफसरों का दोष पाया गया है, लेकिन कार्रवाई पर कुछ स्पष्ट नहीं है। अब प्रमुख सचिव को फैसला लेना है कि दोषी अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो।
टीएंडसीपी संचालक स्वाति मीणा ने बताया कि मैं अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकती हूं। ये मामला अभी विचाराधीन है। इसमें जब कोई फैसला होगा तो बताया जाएगा।
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