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इटली से आया यह राम...

7 वर्ष पहले
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वैभव दीवान

बीबीसी संवाददाता

दिल्ली में पिछले दिनों एक ऐसी रामलीला देखने को मिली जिसमें ऑपेरा के साथ कई भारतीय नृत्य-गायन शैलियां शामिल थीं.

दिल्ली में आयोजित पाँचवें अंतरराष्ट्रीय पौराणिक कला महोत्सव में विश्व के पांच देशों से 100 से ज़्यादा कलाकार शामिल हुए.

इटली के अलावा भारत के कई राज्यों से भी आए फ़नकारों ने इस महोत्सव को अनोखा अनुभव बनाया.

गाते हुए नाटक को परफॉर्म करने की कला को ऑपेरा कहते हैं. इसका जन्म 15वी शताब्दी में इटली के फ़्लोरेंस शहर में हुआ. अब इसमें हिंदुओं की पौराणिक कथा रामायण का मंचन किया गया.

\'भारतीय, इतालवी संगीत\'

योगिनी बिजोयलक्ष्मी होता ने सात महीने पहले रंगों और साज़ों से सजी इस रामलीला को बनाने के बारे में सोचा था.

वह कहती हैं, \"ऑपेरा ने मेरा दिल छू लिया था. उसी तरह रामायण हमारे दिल को कई तरह से छूती है और इन दोनों को एक साथ लाना एक अलग अनुभव था.\"

इस रामलीला में बिजोयलक्ष्मी होता की बेटी रीला होता सीता के रूप में दिखीं. पेशेवर ओडिसी नृत्यांगना रीला इस रामलीला की क्रिएटिव डायरेक्टर भी थीं.

उनका कहना है, \"रामलीला को ऑपेरा के अंदाज़ में दिखा कर हमने यह साबित कर दिया कि रामायण को देखने और जानने के लिए भाषा और बोली की ज़रूरत नहीं.\"

इस रामलीला में इटली के संगीतकार अन्तोनिओ कोकोमाज़ी ने संगीत दिया. वह स्टेज पर चल रही रामलीला के दौरान अपने सिम्फ़नी ग्रुप के साथ मिलकर कलाकारों के सुरों से ताल मिला रहे थे.

इसी मंच पर भारत के अलग-अलग वाद्यों का भी समागम दिखा. इस रामलीला में भारतीय संगीत दिया पंडित राजन-साजन मिश्रा ने.

\'यक्षगान\'

इस मंचन की ख़ास बात यह थी कि राम और लक्ष्मण के संवाद तो इटालियन ऑपेरा में गाए जाते लेकिन सीता अपनी बात गाकर नहीं बल्कि नृत्य और अदाओं के सहारे समझाती.

इस रामलीला में दैत्यों और रावण के रूप को दिखने के लिए- कर्नाटक की नाट्य शैली यक्षगान का प्रयोग किया गया.

यक्षगान मिश्रण है संगीत, नृत्य और नाटक का. इसमें कलाकार बड़े बड़े मुकुट और कपड़ों के साथ दिखते हैं, जिसमें मेकअप काफ़ी किया जाता है.

रामायण में जैसे जीव-जन्तुओं का अहम रोल था वैसे ही इस ऑपेरा स्टाइल रामलीला में भी बंदरों, हिरन और गरुड़ को दिखाया गया. कलाकारों को जानवरों की वेशभूषा पहने मंच पर देखा गया.

वाल्मीकि की रामायण को इटालियन रूप देने वाले डायरेक्टर मार्को पुची काटेना का कहना है कि उन्होंने रामायण के बारे में काफ़ी अध्ययन किया और उसके बारे में पढ़ने के बाद ही वो इसे ये रूप दे पाए.

हनुमान के रूप में इटालियन कलाकार फ़ेडरिको बनेति केसरी गमछा और ब्रह्मचारी रूप में दाढ़ी के साथ दिखे. इस रामलीला को जल्द ही विश्व के अन्य देशो में भी लेकर जाने की योजना है.

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