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आईवीएफ : नि:संतान दंपतियों के लिए सबसे आसान तकनीक

सफलता अन्य ट्रीटमेंट से ज्यादा

Danik Bhaskar | Aug 29, 2018, 12:03 PM IST

नि:संतान होना अब अभिशाप नहीं रह गया है। वैसे तो इन्फर्टिलिटी के कई मामले केवल दवाइयों से ही सुलझ जाते हैं। लेकिन जिन मामलों में दवाइयां या सर्जरी असर नहीं करती, वहां भी नि:संतान दंपती को घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं रह गई है। इसका बहुत ही आसान तरीका है आईवीएफ। यह तकनीक करीब 40 साल पहले अस्तित्व में आई थी। इसे इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन कहते हैं।

क्या है ये तकनीक?

यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एग और स्पर्म को शरीर के बाहर यानी लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। यह उन दंपतियों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार है जो अपनी इनफर्टिलिटी प्रॉब्लम की वजह से माता-पिता नहीं बन सकते। इसमें प्राय: दंपती के ही एग और स्पर्म का उपयोग किया जाता है। हालांकि जरूरत पड़ने पर डोनर एग या स्पर्म भी यूज किए जा सकते हैं। बोलचाल की भाषा में इसे टेस्ट ट्यूब बेबी टेकनीक भी कहते हैं।

इनफर्टिलिटी की प्रॉब्लम का सामना करने वाली महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यह उपयोगी और प्रभावी है। जिन महिलाओं की फैलोपिन ट्यूब ब्लाक होती हैं या जिन महिलाओं में ओवेल्यूशन की प्रॉब्लम होती है, उनके लिए आईवीएफ सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट है। इसी तरह जिन महिलाओं के अंडों की क्वालिटी खराब होती है, उस महिला के सर्वश्रेष्ठ अंडों को चुनकर उन्हें फर्टिलाइज किया जा सकता है या फिर डोनर एग्स भी लिए जा सकते हैं। जिन पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम हो या उनमें गतिशीलता कम हो तो उनके लिए भी आईवीएफ अच्छा विकल्प है।

सिंपल टेक्नीक, लेकिन सफलता सबसे ज्यादा :

यह प्योर सांइटिफिक टेक्नीक है। इसकी सफलता की दर ट्रीटमेंट की तुलना में कहीं ज्यादा है। इसमें फर्टिलाइजेशन की केवल प्रोसेस लैब में होती है। भ्रूण का पूरा विकास मां के पेट में होता है। यानी इसमें बेबी उसी तरह नॉर्मल होता है, जैसा कि सामान्य गर्भावस्था में होता है।

एक स्टडी के अनुसार इसकी सफलता की दर करीब 60 फीसदी है। इसका मतलब यह है कि अगर 100 दंपती आईवीएफ ट्रीटमेंट लेंगे तो उनमें से 60 को बच्चा पहली बार में ही मिल जाएगा। बचे हुए 40 में से कुछ को दूसरी बार कोशिश करने में सफलता मिल सकती है।

पहले आईवीएफ साइकल का फेल होना उम्मीदों का अंत होना नहीं :

जब दंपती आईवीएफ करवाते हैं तो वे बहुत उम्मीद के साथ प्रयास करते हैं। हर दंपती को यही लगता है कि वे अब माता-पिता बन ही जाएंगे। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि पहले आईवीएफ साइकल में ही हर दंपती को सफलता मिल जाए। इसलिए किसी भी आईवीएफ सेंटर और वहां के डॉक्टर्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे दंपती को इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार रखें कि हो सकता है पहला साइकल फेल हो जाए। लेकिन यह भी बताएं कि पहले साइकल का फेल होना उम्मीदों का खत्म होना नहीं है। आईवीएफ साइकल के फेल होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं, जैसे अंडों की क्वालिटी/कंवाटिटी से लेकर भ्रूण (एम्ब्रयो) के विकास और इसकी प्रत्यारोपण प्रक्रिया में समस्या होने तक। पहले साइकल के फेल होने के बाद डॉक्टर उसकी वजह की समीक्षा करते हैं। फिर दूसरे साइकल के दौरान उन कारणों को दूर करते हैं, जिनकी वजह से असफलता हुई। इस तरह दूसरे साइकल में सफलता की संभावना और भी बढ़ जाती है।

(अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800 102 9413 पर कॉल करें या https://www.bhaskar.com/befertile/ पर विजिट करें।)

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