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जैक मा को 30 फर्मों ने ठुकराया था, 19 साल में उन्होंने सबसे बड़ी एशियाई कंपनी बनाई

अलीबाबा का मार्केट कैप 420 अरब डॉलर

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 02:23 PM IST
Jack Ma face rejection by 30 firms he made Asia most valuable company

  • 1999 में अलीबाबा की शुरुआत करने वाले जैक मा ने रिटायरमेंट की घोषणा की
  • अलीबाबा ग्रुप में 66,000 से ज्यादा कर्मचारी

बीजिंग. जैक मा ने अलीबाबा से रिटायरमेंट की घोषणा की है। 10 सितंबर 2019 को अपने 55वें जन्मदिन पर वे चेयरमैन का पद छोड़ देंगे। उनकी जगह डेनियल झेंग अलीबाबा ग्रुप के नए चेयरमैन बनेंगे। जैक मा ने 1988 में ग्रेजुएशन करने के बाद 30 नौकरियों के लिए आवेदन किया था, लेकिन एक में भी नहीं चुने गए। 11 साल बाद उन्होंने अलीबाबा शुरू की थी। यह आज एशिया की सबसे ज्यादा वैल्यू (420 अरब डॉलर) वाली कंपनी है।

रेस्टोरेंट चेन केएफसी में जॉब के लिए 24 लोगों ने अप्लाई किया था। इनमें से मा को छोड़ सभी सेलेक्ट हुए। केएफसी के स्वामित्व वाले यम ब्रांड्स का मार्केट कैप सिर्फ 28 अरब डॉलर है।
हार्वर्ड ने 10 बार रिजेक्ट किया: हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉलेज में दाखिला लेने के लिए आवेदन किया। लेकिन, प्रवेश परीक्षा में दो बार फेल हुए। तीसरी बार में सफल हुए और हेंगझू टीचर्स इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिला। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2016 में जैक मा ने खुद कहा कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें 10 बार रिजेक्ट किया। मा 1995 में ट्रांसलेशन के काम से जुड़े हुए थे। उस दौरान अमेरिका जाना हुआ तो पहली बार इंटरनेट को समझा। इसके बाद उन्होंने चीन में इंटरनेट कंपनी बनाने का फैसला किया। चीन लौटकर चाइना पेजेज नाम शुरू की। इसमें चीन की कंपनियों की जानकारियां थीं। यह सफल नहीं हुई।

मा ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मेरे दादा हर रोज 16 घंटे काम करते थे। उन्हें लगता था कि वह व्यस्त हैं। हम हफ्ते में 5 दिन सिर्फ 8 घंटे काम कर सोचते हैं कि बहुत बिजी हैं। अगले 30 साल में ऐसा भी होगा कि लोग सप्ताह में सिर्फ चार घंटे काम करेंगे।' अमेरिका में 2017 के गेटवे समिट में मा ने कहा, जब वो ऑटोबायोग्राफी लिखेंगे तो इसमें उनकी जिंदगी का नहीं बल्कि अलीबाबा को आगे बढ़ाने के दौरान हुई 1,001 गलतियों का जिक्र होगा।

पर्यटक ने जैक नाम दिया था: क्लास में साथियों से अक्सर जैक मा का झगड़ा हो जाता था। मा बचपन में बेहद दुबले-पतले थे। लियू शियिंग और मार्था अवेरी की किताब अलीबाबा के मुताबिक जैक मा बचपन के झगड़ों को याद करते हुए कहते हैं कि 'मैं अपने विरोधियों से कभी नहीं डरा, भले ही वो मुझसे बड़े हों। जैक मा का नाम पहले मा युन था। वो अपने शहर हेंगझू आने वाले सैलानियों के गाइड बनकर उन्हें घुमाते थे। बदले में उनसे इंग्लिश सीखते थे। एक पयर्टक से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई। उसने जैक नाम दिया।

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