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जयकिशन परमार का कॉलम: सॉफ्टवेयर, एफएमसीजी और फार्मा में करें निवेश

क्रूड में तेजी और रुपए में कमजोरी से महंगाई, ब्याज दर पर असर।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 11, 2018, 09:24 AM IST

जयकिशन परमार का कॉलम: सॉफ्टवेयर, एफएमसीजी और फार्मा में करें निवेश

बीते कुछ समय में कच्चे तेल के दाम में तेजी आई है और रुपया कमजोर हुआ है। क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है और रुपया 69 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब। इन दोनों से महंगाई, ब्याज दर और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रभावित हो रहे हैं। पहले हम देखेंगे कि कच्चा तेल ऊपर और रुपया नीचे क्यों जा रहा है। उसके बाद यह जानेंगे कि इन परिस्थितियों में पोर्टफोलियो कैसा होना चाहिए।
क्रूड महंगा क्यों हो रहा है : साल भर में कच्चा तेल 45 से 80 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। अभी ग्लोबल मार्केट में दाम 78 डॉलर के आसपास है। यह तेजी रूस और ओपेक देशों द्वारा सप्लाई कम करने से आई। दोनों ने रोजाना 18 लाख बैरल सप्लाई घटा दी। हाल ही इन्होंने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिका, यूरोप और जापान में आर्थिक तेजी से क्रूड की मांग भी बढ़ी।
रुपए में कमजोरी के कारण : कच्चा तेल महंगा होने से मई में व्यापार घाटा 15 अरब डॉलर तक पहुंचा। भारत करीब 80% क्रूड आयात करता है। दूसरा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व है जो ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है। इससे डॉलर मजबूत हुआ। तीसरा कारण कारण इन दोनों से जुड़ा है। भारतीय करेंसी कमजोर होने से विदेशी पोर्टफोलियो मैनेजर भारत में शेयर बेच रहे हैं जिससे डॉलर की डिमांड बढ़ रही है।
इस स्थिति में कहां निवेश करना बेहतर होगा:-
1. इंडियन ऑयल जैसी डाउनस्ट्रीम कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। सरकार कच्चे तेल की अधिक कीमत का असर कम करने के लिए ओएनजीसी पर अतिरिक्त सेस लगा सकती है। इसलिए अपस्ट्रीम कंपनियां इस समय निवेश के लिए बेहतर नहीं होंगी। डाउनस्ट्रीम कंपनियों पर बोझ पड़ा तो वे इसका भार ग्राहकों पर डालने के लिए स्वतंत्र हैं। रिफाइनरी कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनरी मार्जिन ऊंचा है। मौजूदा समय में डाउनस्ट्रीम कंपनियों को पोर्टफोलियो में रखना चाहिए।
2. सॉफ्टवेयर और फार्मा सेक्टर भी अच्छे हैं। दोनों की कमाई में एक्सपोर्ट का बड़ा योगदान है। इनका बड़ा मार्केट अमेरिका है। रुपया कमजोर होने से विदेशी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट सस्ते होंगे और कंपनियों पर दाम घटाने का दबाव कम होगा। निर्यात से डॉलर में जो कमाई होगी, रुपए में बदलने पर वह ज्यादा होगी। दोनों सेक्टर अमेरिकी इकोनॉमी पर काफी निर्भर करते हैं। निकट भविष्य में अमेरिका की ग्रोथ रेट तेज रहने की उम्मीद है। इससे इन कंपनियों की कमाई बढ़ेगी।
3. कमजोर रुपए और महंगे क्रूड से भारत में खपत प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है। भारत ने तीन साल तक सस्ते तेल का फायदा उठाया और इसकी वजह से ग्रोथ रेट भी तेज रही। इन परिस्थितियों में एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में डिमांड बनी रहने की उम्मीद है

- ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।
जयकिशन परमार, सीनियर इक्विटी एंड रिसर्च एनालिस्ट, एंजेल ब्रोकिंग

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