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जीने की राह कॉलम: गुरु या अवतार से जुड़ें, जीवन व्यवस्थित होगा

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पं. विजयशंकर मेहता | Last Modified - May 02, 2018, 01:56 AM IST

जीने की राह कॉलम: गुरु या अवतार से जुड़ें, जीवन व्यवस्थित होगा

मनुष्य का संचालन जो-जो बातें करती हैं उनमें से ये तीन भी प्रमुख हैं- देश, काल और परिस्थिति। देश मतलब वह क्षेत्र जहां आप रह रहे हों, काल यानी वक्त और परिस्थिति मतलब जो हालात या तो आपने पैदा कर लिए हैं या आपके जीवन में परिस्थितियां बनकर उतरे हैं। ये तीनों बदलते भी रहते हैं। समझदार मनुष्य को तीनों स्थितियों का उपयोग करते आना चाहिए। इस समय देश, काल, परिस्थिति पर कलियुग का प्रभाव है।

कलियुग को शास्त्रों में गलत बातों का भंडार कहा गया है। यह वह समय है, जब आदमी आसानी से अनुचित साधनों में उतर जाता है और इसीलिए आज कई लोग योग्य व सदाचरित होने के बाद भी अशांत हैं। यदि आप जीवन में शांति चाहते हैं तो इस देश-काल, परिस्थिति में किसी का सहारा लेना चाहिए। इसके लिए या तो जीवन में कोई गुरु आ जाए या अवतार पुरुषों से जुड़ जाइए।

आपका संबंध किसी भी सम्प्रदाय से हो, सभी धर्मों में कोई न कोई अवतार पुरुष अवश्य हुए हैं। अवतार पुरुष सबसे बड़ा काम यह करते हैं कि आपको प्रकृति से जोड़ देते हैं, आपका स्वयं से साक्षात्कार करा देते हैं। देखिए, यदि अलग-अलग, बिखरी पड़ी हो तो ईंट है, लेकिन जुड़ जाएं तो दीवार का रूप ले लेती हैं और दीवार व्यवस्थित हो जाए तो घर बन जाता है।

एक बिखरी हुई ईंट घर तक पहुंच सकती है, यदि उसे व्यवस्थित कर दिया जाए। गुरु या कोई अवतार जब जीवन से जुड़ता है तो मनुष्य ऐसे ही व्यवस्थित हो जाता है और फिर किसी भी देश-काल, परिस्थिति में वह अशांत नहीं रहता।

जीने की राह

पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com

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