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दबाव में बेफिकरी रख सजगता से फैसले लें- जीने की राह

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पं. विजयशंकर मेहता | Last Modified - Jul 13, 2018, 11:10 PM IST

दबाव में बेफिकरी रख सजगता से फैसले लें- जीने की राह

किसी काम को करते समय, कोई निर्णय लेते वक्त यदि आप बहुत दबाव में आ जाएं तब क्या किया जाए? दबाव के साथ ही काम करते रहें और लगातार दबाव बना रहा तो वह तनाव में बदल जाता है और लगातार तनाव डिप्रेशन में पटक सकता है। इस स्थिति से पहले ही चरण में मुक्ति पा लीजिए। जैसे ही दबाव आए, थोड़ा रुककर आपकी सोचने-समझने की जो प्रक्रिया चल रही होगी उसको पांच चरण में बांट दें। चार तो स्पष्ट चरण होंगे और पांचवें में उसको क्रियान्वित करना होगा।

पहला चरण होगा सोच। इसमें चिंता झलकती है, एक फिक्र उतर आती है, कभी-कभी पछतावा भी होता है। दूसरा होता है विचार। इसमें हम हमारे शब्दों की जांच-पड़ताल करने लगते हैं। फिर जब इन दोनों को क्रॉस करते हैं तो चिंतन शुरू हो जाता है। इसमें एक फिलासॉफी होती है। आप थोड़े परिपक्व हो चुके होते हैं और यहीं से स्वयं को राय देते हैं तथा दूसरों की सलाह लेने लगते हैं। तो सोच, विचार, चिंतन और राय.. थोड़ा-सा दूर खड़े होकर इन चारों को देखना और उसके बाद करिएगा मंथन। किसी नवीन तत्व को खोजने के लिए जो परिश्रम किया जाता है वह मंथन है।

जब इन चारों का मंथन करेंगे तो आपके हाथ एक समाधान लगेगा जो कह रहा होगा कि सबसे पहले दबाव से मुक्त हों। जो होना है, वह होकर रहेगा, लेकिन इसके लिए परिश्रम नहीं छोड़ना है। एक मस्ती, एक बेफिकरी रखो और पूरी सजगता के साथ निर्णय ले डालो। यह होगा मंथन का परिणाम और यहीं से आप दबावमुक्त हो जाएंगे।


पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com

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