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एक महिला के शरीर में दो कोख और दोनों में पल रहे थे बच्चे; 50 करोड़ में एक होता है इस तरह का मामला

जांच में सामने आई इस जानकारी के बाद डॉक्टर भी आश्चर्यचकित हैं।

Danik Bhaskar | Aug 01, 2018, 06:00 PM IST
एक्सपर्ट के अनुसार यह बेहद दुर्लभ मामला है जो 500 अरबों में से किसी एक में देखने को मिलता है। एक्सपर्ट के अनुसार यह बेहद दुर्लभ मामला है जो 500 अरबों में से किसी एक में देखने को मिलता है।

हेल्थ डेस्क. किसी औरत के जुड़वां और तीन-चार बच्चों की डिलीवरी एक साथ होने की बातें तो सुनी होंगी लेकिन ब्रिटेन की जेनिफर का मामला इससे भी अनोखा है। खुद जेनिफर भी उस समय चौंक गईं जब उन्हें पता चला कि उनकी दो कोख हैं और दोनों में ही बच्चे पल रहे हैं। आगे, तमाम कष्ट सहते हुई डिलीवरी के बाद दोनों बच्चे और मां स्वस्थ हैं। एक्सपर्ट के अनुसार यह बेहद ही दुर्लभ मामला है जो 50 करोड़ लोगों में से किसी एक महिला में देखने को मिलता है।

05 प्वाइंट्स में जानिए कब, क्या हुआ:


1.- जेनिफर ऐशवुड की उम्र 31 वर्ष है। जेनिफर के मुताबिक पहले भी एक बेबी हो चुका है लेकिन तब ऐसी स्थिति नहीं बनी थीं। लेकिन हाल ही हुई डिलीवरी में जो कुछ भी हुआ वह काफी चौकाने वाला था।

2.- जेनिफर के मुताबिक सब कुछ सामान्य चल रहा था। करीब प्रेग्नेंसी के 20 हफ्ते के बाद रेग्युलर जांच हुई। जांच में पता चला कि दो गर्भाशय विकसित हो गए हैं और दोनों में ही भ्रूण विकसित हो रहे हैं।

3.- जेनिफर और उसके पति दोनों ही इस बात को लेकर डरे हुए थे क्योंकि गर्भपात या प्री-मैच्योर डिलीवरी होने की आशंका थी। हालांकि पिछली डिलीवरी के मुकाबले इस बार थोड़ा ज्यादा बीमार थी। 34 हफ्ते के बाद दो बच्चे पिरान और पॉप्पी को जन्म दिया।

4.- जेनिफर को डिलीवरी के दो हफ्ते बाद डिस्चार्ज कर दिया गया और बच्चों के साथ घर आ गई लेकिन बच्चों को पीलिया होने के कारण उनका इलाज चलता रहा। दो गर्भाशय होने के कारण दोनों में एग फर्टिलाइज्ड हो गया और दो बेबी विकसित हो गए। जेनिफर के लिए ये किसी चतत्कार से कम नहीं था।

5.- जेनिफर के पति जो पेशे से एक फायरमैन हैं और दोनों ही काफी बिजी रहते हैं। बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी के कारण अक्सर नींद तक पूरी नहीं हो पाती है। जेनिफर फिलहाल दोहरी जिम्मेदारी के साथ दोहरे प्यार के अहसास को भी महसूस कर रही हैं।

क्या है डबल यूटेरस का मामला
वेबसाइट मेयोक्लीनिक के अनुसार, यह काफी दुर्लभ मामला होता है। इस स्थिति को यूट्रस डाईडेल्फिस या डबल यूटेरस भी कहते हैं। ये औरत में जन्मजात होती है जिसमें दो सर्विक्स होते हैं। कुछ मामलों में दो वैजाइना भी हो सकती हैं। डबल यूट्रस की स्थिति तब बनती है जब महिला में यूटेरस दो छोटी-छोटी ट्यूब में बंट जाता है। दोनों ही ट्यूब अंदर से खोखली होती हैं। कई बार ये जुड़ी हुई भी हो सकती हैं। दोनों ही ट्यूब सर्विक्स से जुड़ी रहती हैं। यूट्रस के औसत आकार के मुकाबले ये दो गर्भाशय थोड़े छोटे होते हैं। ऐसी स्थिति क्यों बनती हैं इसका अब पता नहीं चला सका है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है।

गर्भपात का बड़ा खतरा : ऐसी महिलाओ में गर्भपात और प्री-मैच्योर डिलीवरी होने की आशंका अधिक रहती है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने का भी खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती है ताकि जान के जोखिम को कम किया जा सके।

डबल यूटेरस वाली स्थिति की पहचान: ज्यादातर महिलाओं को इस बारे में जानकारी नहीं होती है। लेकिन कुछ लक्षण अगर महसूस होते हैं तो डबल यूटेरस की आशंका रहती है। जैसे अगर महिला को बार-बार गर्भपात हो रहा है, अक्सर ब्लीडिंग होती है, पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक दर्द रहता है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। विशेषज्ञ कुछ जांचों जैसे पेल्विक टेस्ट, गर्भाशय का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई की मदद से पता लगाते हैं।

यह काफी दुर्लभ मामला होता है। इस स्थिति को यूट्रस डाईडेल्फिस या डबल यूट्रस भी कहते हैं। यह काफी दुर्लभ मामला होता है। इस स्थिति को यूट्रस डाईडेल्फिस या डबल यूट्रस भी कहते हैं।
ऐसी स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती है ताकि जान के जोखिम को कम किया जा सके। ऐसी स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती है ताकि जान के जोखिम को कम किया जा सके।
डबल यूट्रस की स्थिति तब बनती है जब महिला में यूट्रस दो छोटी-छोटी ट्यूब में बंट जाता है। दोनों ही ट्यूब अंदर से खोखली होती हैं। डबल यूट्रस की स्थिति तब बनती है जब महिला में यूट्रस दो छोटी-छोटी ट्यूब में बंट जाता है। दोनों ही ट्यूब अंदर से खोखली होती हैं।
अगर महिला को बार-बार गर्भपात हो रहा है, अक्सर ब्लीडिंग होती है, पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक दर्द रहता है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। अगर महिला को बार-बार गर्भपात हो रहा है, अक्सर ब्लीडिंग होती है, पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक दर्द रहता है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।