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झारखंड: दिल्ली पहुंचे हेमंत सोरेन

9 वर्ष पहले
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झारखंड संकट पहुंचा दिल्ली दरबार में

शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का एक दल मंगलवार की देर शाम दिल्ली पहुंचा जहाँ वो एक बार फिर सरकार बनाने की कोशिश में लग गया है. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से बातचीत कर रहा है.

इससे पहले झारखण्ड मुक्ति मोर्चा नेताओं नें मंगलवार की सुबह झारखण्ड के राज्यपाल सैय्यद अहमद से मिलकर अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार से समर्थन वापसी का पत्र सौंपा.

थोड़ी देर के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी राज्यपाल से मिले और उन्होंने अपने इस्तीफ़े के साथ-साथ विधान सभा को भंग करने की सिफारिश भी राज्यपाल से कर दी.

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए मुंडा नें कहा कि मंगलवार की सुबह उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी और विधान सभा को भंग करने का फ़ैसला मंत्रिमंडल ने लिया है. मंत्रिमंडल की बैठक में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विधायक शामिल नहीं हुए थे.

कांग्रेस का कहना है कि अर्जुन मुंडा की सिफ़ारिश इसलिए भी मायने नहीं रखती क्योंकि उनकी सरकार पहले ही अल्पमत में आ चुकी थी जब झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने समर्थन वापसी की घोषणा की थी.

ताज़ा राजनीतिक घटना क्रम के बाद सियासी जोड़तोड़ का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि वो झारखण्ड में चुनाव चाहती है. भाजपा के अनुसार चुनाव ही इस पूरे घटनाक्रम का एक मात्र विकल्प है.

वहीं बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली पार्टी झारखण्ड विकास मोर्चा ने भी राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वो राज्य की विधान सभा को भंग कर दें.

मगर कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में राज्यपाल का फ़ैसला ही अंतिम होगा क्योंकि उन्हें अधिकार है कि वो अपने विवेक से फ़ैसला ले सकते हैं.

कांग्रेस के बयान के बाद झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को झारखण्ड में सरकार बनाने की उम्मीद एक बार फिर जगी है.

यही वजह है कि संगठन के वरिष्ठ नेता दिल्ली कूच कर गए हैं और वो वहां कांग्रेस के नेताओं से नई सरकार बनाने पर विमर्श कर रहे हैं.

कांग्रेस पर निगाहें

कांग्रेस ने पहले तो वैकल्पिक सरकार बनाने की बात से इनकार किया मगर झामुमो के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के संकेत के बाद ही हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पार्टी के नेता दिल्ली पहुंचे हैं.

संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बात पर सहमती बने कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सरकार बनाए और कांग्रेस बाहर से उसका समर्थन करे.

मगर हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन के लिए अब ये ज़रूरी है कि वो कांग्रेस के अलावा दूसरे दलों से भी अपने लिए समर्थन जुटा पाएं.

आजसू भी अहम

इसकी संभावना कम ही लग रही है क्योंकि राज्यपाल से जब अर्जुन मुंडा मिलने गए थे तो उनके साथ ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन पार्टी यानी आजसू के छह विधायक भी साथ थे जो इस बात का संकेत हैं कि आजसू झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के साथ नहीं है.

मगर रांची के वरिष्ट पत्रकार देवेन्द्र गौतम का कहना है कि आजसू के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि अब तक इस संगठन ने झारखण्ड में हमेशा सत्ता का समर्थन किया है. चाहे वो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यो या संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन.

देवेंद्र गौतम कहते हैं, "आजसू हमेशा सरकार बनाने वाले के साथ रही है.''

आजसू के अलावा भी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा को कई और विधायकों के समर्थन की ज़रूरत होगी अगर वो राज्य में नई सरकार बनाना चाहती है. इनमे चार निर्दलीय और राष्ट्रीय जनता दल भी शामिल हैं.

अब देखने वाली बात ये है कि क्या झामुमो कांग्रेस के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल, आजसू और निर्दलीय विधायकों को अपने साथ ले सकती है या नहीं.

फ़िलहाल राज्यपाल सैय्यद अहमद नें वैकल्पिक व्यवस्था होने तक अर्जुन मुंडा से कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने का अनुरोध किया है.