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डाउनलोड करेंजोधपुर. शहरवासियों के लिए शनिवार को महावीर कॉम्प्लेक्स में बड़ी स्क्रीन पर आईपीएल मैच का प्रसारण किया गया। जबकि हमारा हक तो अपने स्टेडियम में लाइव मैच देखने का है। 1986 में शुरू हुआ बरकतुल्लाह खां स्टेडियम 2 इंटरनेशनल मैच की मेजबानी कर भी चुका है। इसमें मैच को लेकर जो कमियां मिलीं उन्हें भी करोड़ों रुपए खर्चकर पूरा किया गया। इसके बावजूद भी अब तक यहां आईपीएल का एक भी मैच नहीं हुआ। मुद्दा स्टेडियम के मालिकाना हक से जुड़ा है। बीसीसीआई की नई शर्ताें में पहली शर्त है कि शहर का स्टेडियम राज्य अथवा जिला क्रिकेट संघ का व्यक्तिगत होना चाहिए। यदि नहीं है तो संबंधित एजेंसी और राज्य संघ के बीच एमओयू हो। जबकि यहां बरकतुल्लाह खान स्टेडियम जोधपुर विकास प्राधिकरण की संपति है । इसी शर्त के कारण 10 बरस से जेडीए और राज्य संघ के बीच एमओयू लंबित है।
इस मामले में न तो सरकार दखल दे रही है और न ही बीसीसीआई या राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी। यहां तक कि मंत्री से लेकर सांसद तक इस भव्य स्टेडियम में आईपीएल या वनडे मैच नहीं करा पा रहे। फरवरी में आईपीएल मैच आयोजन करने वाली टीम जोधपुर आई भी, लेकिन यहां मैच कराने की बजाय वह यह संभावना देख गई कि यहां के फैन्स बड़े पर्दे पर मैच देखकर ही संतुष्ट हो जाएंगे। लिहाजा उन्होंने महावीर कॉम्पलैक्स में शनिवार-रविवार को होने वाले मैच बड़े पर्दे पर दिखाने की व्यवस्था कर दी।
जेडीए: आरसीए प्रस्ताव दे तो जल्द सुविधा जुटा दें
जेडीए व आरसीए के बीच एमआेयू के लिए राजस्थान रॉयल्स ने प्रस्ताव दिया था, लेकिन बिना रजिस्टर्ड संस्था किस आधार पर फैसला लेता। अगर आरसीए इसका प्रस्ताव देता है तो बिना विलंब हस्ताक्षर करूंगा। साथ ही जेडीए दस दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटा देगा। तीन माह पूर्व आरसीए व बीसीसीआई को लेटर भी भेजा है। जेडीए तो खुद चाहता है कि एमआेयू होता तो रखरखाव बेहतर होगा, आय भी होगी।
-डॉ. महेंद्रसिंह राठौड़, अध्यक्ष जेडीए
आरसीए: एमओयू पर आगामी सत्र में विचार करेंगे
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन और जोधपुर विकास प्राधिकरण के बीच एमओयू लंबित है। इसके अभाव में बरकतुल्लाह खान स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय अथवा आईपीएल मैच होना संभव नहीं हैं। एमआेयू की संभावना के बारे में चर्चा कर आगामी सत्र में मैच की संभावना पर विचार किया जाएगा। स्टेडियम का दौरा कर मैदान की स्थिति और सुविधाओं का आंकलन किया जाएगा।
-राजेंद्र सिंह नांदू, सचिव, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन
50 करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बाद भी कमी
सुरक्षा दृष्टि से बीसीसीआई ने एक शर्त यह भी रखी है कि दर्शक दीर्घा में कुर्सियां स्थाई रूप से लगी होनी चाहिए। यहां एक-दो ब्लॉक को छोड़ शेष ब्लॉक्स में स्थाई चेयर्स नहीं लगी हैं।
नेट्स की सुविधा नहीं
नेट्स की उच्चस्तरीय सुविधा का अभाव है। वर्तमान सरकार ने सीएम बजट घोषणा में स्टेडियम में 16 विकेट्स बनाने की घोषणा की थी, लेकिन जेडीए ने इजाजत नहीं दी।
रखरखाव का अभाव
रखरखाव के अभाव में आउटफील्ड की हालत खस्ता है। विकेट की सारसंभाल नहीं होती है। बॉक्सेस,ड्रेसिंग रूम और अन्य रूम्स व्यवस्थित नहीं है।
8 करोड़ से फ्लड लाइट लगवाई
मैच न होने के पीछे तर्क दिया कि यहां फ्लड लाइट नहीं हैं। ऐसे में करीब चार साल पहले 8 करोड़ खर्च करके फ्लड लाइटें लगवाईं। आयोजकों ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताया।
10 करोड़ से टर्फ विकेट पवेलियन बेहतर बनाया
टर्फ विकेट व उम्दा पवेलियन जरूरी बता मैच टाले। 10 करोड़ से 5 टर्फ विकेट, ग्राउंड मेंटिनेंस, पवेलियन में कुर्सियां लगवाईं। ऐसे कैमरा स्टैंड हैं जहां से आसानी से लाइव टेलिकास्ट हो सकता है।
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