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आसाराम रेप केस का फैसला 25 अप्रैल को, राम-रहीम जैसे फसाद की आशंका

3 वर्ष पहले
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  • आसाराम दुष्कर्म केस के फैसले पर 25 अप्रैल को फसाद की आशंका
  • शहरवासियों की ‘साधकों’ से प्रार्थना, राम-रहीम केस के फैसले पर पंचकुला में हुए उपद्रव जैसे हालात जोधपुर में न बन जाएं
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  • आसाराम की ओर से साधकों को अपील की जाए कि वे जोधपुर न आएं: डीसीपी 
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  • 4 दिन बाद कोर्ट में देंगे जवाब, देश भर में अपील जारी करने का पैसा नहीं: शिवा 

जोधपुर. गुरुकुल की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोपी आसाराम को बेगुनाह बताने वाले हजारों मैसेज सोशल मीडिया पर अभियान के रूप में चल रहे हैं। और हर पेशी पर भी सैकड़ों लोग आसाराम को देखने आते हैं। अब तो 25 अप्रैल को केस का फैसला आने वाला है इसलिए पुलिस ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगा कर फैसला जेल में सुनाने की अपील कर दी है। पुलिस ने अपील में कहा कि आसाराम के समर्थक हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं करते हुए एकत्र होते हैं और इंटेलीजेंस इनपुट भी है कि फैसले के दिन हजारों लोग जोधपुर में जुट सकते हैं इसलिए कहीं ऐसा न हो कि राम-रहीम को सजा सुनाते वक्त पंचकुला में जो हालात पैदा हुए थे, वैसी परिस्थितियों से जोधपुर शहर को बचाने के लिए आसाराम की ओर से देश भर के समर्थकों को टीवी-समाचार पत्रों के माध्यम से अपील जारी कराई जाए कि वे जोधपुर नहीं आए। पुलिस की इस अर्जी पर आसाराम की ओर से चार दिन बाद मंगलवार को जवाब आएगा।

 

देश भर में अपील जारी करने का पैसा नहीं

- उधर, आसाराम का मुख्य साधक और जोधपुर की तमाम एक्टिविटी को देखने वाला शिवा भी कहता है कि उनके पास पैसा नहीं है कि वे देश भर में अपील जारी करवा दें। हालांकि वह यह जरूर कहता है कि उन्होंने सभी साधकों को संदेश भिजवा दिया है कि वे फैसले के दिन अपने घरों व देश के 400 आश्रमों में प्रार्थना सभाएं करें, मगर पुलिस कोई खतरा नहीं उठाना चाहती। इसलिए जेल से कोर्ट तक करीब एक हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी तथा शहर में कहीं भी समर्थकों को एकजुट नहीं होने देने के प्रबंध कर रही है।  

 

पुलिस हाईकोर्ट की शरण में जज जेल में ही सुनाए फैसला 
- डीसीपी (ईस्ट) अमनदीप कपूर ने 2 दिन पूर्व हाईकोर्ट में अर्जी दी कि 25 अप्रैल को फैसला आएगा तब कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। 4 साल से समर्थक आ रहे हैं। हाईकोर्ट ने 3 सालों में 3 आदेश दिए कि आसाराम समर्थकों को काबू करें। उसकी ओर से समाचार पत्रों व टीवी पर समर्थकों को जोधपुर न आने की अपील जारी कराई जाए, मगर उसकी ओर से पालना नहीं हो रही। कोई भी समर्थकों को कंट्रोल नहीं कर रहा, इसलिए फैसला जेल में सुनाएं तो शहरवासी संभावित परेशानी व नुकसान से बच सकेंगे। आसाराम के वकील ने मंगलवार को जवाब देने को कहा है। 

 

समर्थक आश्रम के आदेश पर भीड़ नहीं होने देने का भरोसा
- पुलिस व शहर की आशंका से परे आसाराम समर्थक आश्रम के आदेश पर हैं। अाश्रम ने जोधपुर नहीं आने का ऑफिशियल वक्तव्य जारी नहीं हुआ है। शिवा ने भास्कर को बताया कि अपील प्रकाशित व जारी कराने में करोड़ों रु. लगते हैं जो हमारे पास नहीं है। उसने आश्वस्त किया है भीड़ नहीं होगी, संदेश भेजे गए हैं कि फैसले के दिन 400 आश्रम व अपने घरों पर ही प्रार्थनाएं करेंगे। हंगामेे की मंशा नहीं है। शहर को विश्वास दिलाते हैं कि पंचकुला जैसे हालात नहीं होने देंगे। सत्तर-अस्सी साधक जोधपुर के आश्रम में रहते हैं, पांच सौ-हजार बाहर से दर्शन करने आ सकते हैं।  

 

सुरक्षा घेरे में रहेंगे जज भी 
- आसाराम केस का फैसला करने वाले जज मधुसूदन शर्मा फैसला लिखवा रहे हैं। अंतिम बहस के बाद जैसे ही उन्होंने कहा कि 25 को फैसला देंगे, उसी दिन से पुलिस ने उनके घर पर सुरक्षा पहरा बढ़ा दिया है। कोर्ट की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है ताकि कोई उपद्रवी रिकॉर्ड को नुकसान नहीं पहुंचाए और वहां तोड़फोड़ नहीं कर सके। फैसले के दिन सुरक्षा घेरे में ही उन्हें कोर्ट अथवा जहां हाईकोर्ट फैसला देने का आदेश करेगा, वहां तक ले जाएगी तथा फैसला देने के बाद उन्हें घर तक पहुंचाएगी। 

 

आसाराम: वकीलों ने कहा- जहां सुनवाई, वहीं सुनाया जाए फैसला
- आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने पुलिस के इस प्रार्थना पत्र का विरोध किया। उन्होंने कहा, कि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में हुई तो फैसला भी यहीं सुनाया जाए। पहले नियमों की पालना किए बगैर जेल में सुनवाई शिफ्ट करने के नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद विड्रॉ करना पड़ा था। जेल में कोर्ट का लगाने और फैसला सुनाने के लिए भी प्रावधान है। इसके अधिकार हाईकोर्ट की फुल कोर्ट को है। इसके अलावा सेशन कोर्ट को भी अधिकार है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति लेनी होती है। इस पर जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ ने अपना पक्ष लिखित में पेश करने के निर्देश दिए तो वरिष्ठ अधिवक्ता ने इसके लिए थोड़ी मोहलत मांगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 को तय की है।

 

खतरा
- 10,000 से ज्यादा भीड़ जुटने का इंटेलीजेंस इनपुट, हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद 3 साल से भीड़ में कमी नहीं।  

 

तैयारी 
- 1000 पुलिसकर्मी संभालेंगे जेल से कोर्ट तक का रास्ता, फैसला देने वाले जज मधुसूदन शर्मा की सुरक्षा बढ़ाई। 

 

उपाय 
- हाईकोर्ट से आग्रह जेल में ही फैसला सुनाया जाए, आसाराम की वेबसाइट व सोशल मीडिया पर शांति की अपील हो।  

 

 

 

 

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