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छत्तीसगढ़ ने पकड़ी जोरा नाला पर ओडिशा की करतूत, केंद्र से की शिकायत

3 वर्ष पहले
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 रायपुर. महानदी के बाद अब छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जोरानाला इंद्रावती नदी विवाद नए मोड़ पर है। छत्तीसगढ़ ने जोरानाला पर छत्तीसगढ़ को मिलने वाले पानी के बहाव को रोकने की कोशिश पकड़ी है। छत्तीसगढ़ के इरीगेशन विभाग ने पहली बार कड़ा रूख अख्तियार किया है। राज्य शासन ने सेंट्रल वॉटर कमीशन से मौके पर मानिटरिंग करने और गेजिंग स्टेशन लगाने की मांग की है।


- इंद्रावती नदी ओडिशा से होते हुए छत्तीसगढ़ में प्रवेश करती है और चित्रकोट होते हुए निकलती है। इसी तरह जोरानाला का पानी ओडिशा से बहते हुए शबरी नदी में मिलता है। धीरे-धीरे यह जोरा नाला इंद्रावती नदी में मिल जाता है। इस कारण इंद्रावती का पानी भी जोरा नाला होते हुए शबरी में मिल जाता है। छत्तीसगढ़ को यह शिकायत मिली थी कि बड़े पत्थर डालकर इसके प्राकृतिक बहाव को प्रभावित करने छेड़छाड़ की गई है। इस वजह से ओडिशा में पानी अधिक जा रहा है।

 

- दरअसल 2003 में दोनों सरकारों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके अनुसार दोनों राज्यों को 50-50 फीसदी पानी मिले। इस वजह से दोनों के ज्वाइंट पाइंट पर रेग्युलेटर लगाए गए ताकि पानी बराबर-बराबर दोनों राज्यों को मिल सके।

 

- इधर, कुछ समय से यह शिकायत मिल रही थी छत्तीसगढ़ को कम पानी आ रहा है। इरीगेशन सेक्रटरी सोनमणि वोरा ने जगदलपुर कलेक्टर को मौके का जायजा लेने भेजा। तब यह खुलासा हुआ कि पानी के बहाव को प्रभावित करने के लिए बड़े-बड़े पत्थर डाल दिए हैं।  इसलिए छत्तीसगढ़ को ओडिशा से कुछ कम पानी मिल रहा है। 

 

 यह सही है कि हमने इंद्रावती और जोरानाला के पानी के मामले को लेकर सेंट्रल वाटर कमीशन को पत्र लिखा है। गेजिंग स्टेशन बनाने का भी आग्रह किया है। ओडिशा के प्रमुख सचिव को भी पत्र भेजकर जानकारी दी है। 
सोनमणि वोरा, सचिव इरीगेशन डिपार्टमेंट।

 

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