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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब को जज ने किया नोटिस जारी, बुक में लिखी इस बात पर जताई आपत्ति

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को शुक्रवार को नोटिस भेजने के 2 घंटे बाद ही दोपहर 1 बजे हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह की बेंच ने खुद को इस मामले से अलग करते हुए नोटिस वापस ले लिया। पूर्व राष्ट्रपति को नोटिस उनकी किताब ‘द टर्बुलेंट इयर्स 1980-1996’ के कुछ अंशों को विवादित बताने वाली याचिका पर भेजी गई थी। किताब को पब्लिश करने वाली रूपा पब्लिकेशन को नोटिस जारी किया गया था। जस्टिस प्रतिभा सिंह ने मामले को एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल की बेंच के पास भेज दिया है।

 

अब एक्टिंग चीफ जस्टिस तय करेंगी कि याचिका पर सुनवाई कौन सी बेंच करेगी। अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। मामला मीडिया में आने के बाद दोपहर 3 बजे जस्टिस प्रतिभा सिंह ने याची के वकील विष्णु शंकर जैन को डांट लगाई। उन्होंने कहा कि पति मनिंदर सिंह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हैं। इस केस में कुछ विषय केंद्र सरकार से जुड़े हैं, इसलिए वह इस केस को नहीं सुन सकती हैं। याचिका वकील उमेश चंद पांडे, विष्णु शंकर जैन और रंजना अग्निहोत्री समेत 5 लोगों ने दायर की है। याचिका में किताब में से विवादित अंश हटाने का आग्रह किया गया है।  

 

न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश

 

 

याचिका में किताब के पृष्ठ संख्या 128-129 और 151-155 पर लिखी गईं बातों पर आपत्ति जताई गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि पृष्ठ संख्या 128-129 में लिखा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1 फरवरी, 1986 को राम जन्मभूमि मंदिर खुलवाने का आदेश दिया था, जो गलत फैसला था। सच यह है कि राम जन्मभूमि का ताला जिला जज फैजाबाद के आदेश से खुला था। याची के अनुसार, किताब में इस तथ्य के जरिए लोगों को यह बताने की कोशिश की गई है कि भारत में न्यायिक आदेश राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में होते हैं। इससे न्यायपालिका की छवि खराब होती है। यह न्यायालय की अवमानना है।

 

आहत हुई हैं हिंदुओं की भावनाएं

 

याची का दावा है कि किताब की पृष्ठ संख्या 151-155 पर लेखक ने विवादित ढांचे को बाबरी मस्जिद कहा है। ऐसा कहना गलत है। याचिका में कहा गया है कि प्रणब मुखर्जी सक्रिय राजनीति में रहे हैं। सरकार से भी जुड़े रहे हैं। उन्हें राम जन्मभूमि विवाद के बारे सब कुछ पता है। ऐसे में उन्हें विवादित ढांचे को बाबरी मस्जिद नहीं घोषित करना चाहिए था। इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

 

 

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों पर पड़ेगा असर

 

किताब में बीबीसी के रिर्पोटर मार्क टुली की 5 दिसंबर, 2002 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। याची के अनुसार, लेखक का इस तरह हिंदुओं के खिलाफ सीधी टिप्पणी करना और खुले तौर पर बाबरी मस्जिद का पक्ष लेना यह दर्शाता है कि ढहाया गया ढांचा मस्जिद थी। याचिका में कहा गया है कि लेखक की ओर से की गई इन टिप्पणियों से पक्षकारों के बीच सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों पर विपरीत असर पड़ता है।

 

 

पूर्व राष्ट्रपति की एकतरफा टिप्पणी से आघात - याची

 

याची भगवान राम के भक्त हैं। वह इन गलत तथ्यों से प्रभावित हुए हैं। याची ने कहा कि लेखक जो कि राष्ट्रपति जैसे जिम्मेदार पद पर आसीन रहे थे, उनकी ओर से की गई एक तरफा टिप्पणियों या तथ्यों से उन्हें दुख और आघात पहुंचा है। लोग पूर्व राष्ट्रपति की किताब में कही गई बातों को सही समझेंगे, जबकि ये ऐतिहासिक तथ्यों और मौजूद न्यायिक रिकॉर्ड के खिलाफ है।

 

 

 

 

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