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हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए, अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सींच लेगा तब भी पेड़ में फल तो सही समय आने पर ही लगेंगे

Dainik Bhaskar

Jun 27, 2018, 06:28 PM IST

कबीर के दोहों में सफलता के सूत्र छिपे होते हैं, इन्हें अपना लेने से हम कामयाब हो सकते हैं।

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रिलिजन डेस्क। गुरुवार, 28 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा और कबीर जयंती है। कबीरदास के दोहों में सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे होते हैं। अगर इन सूत्रों को जीवन में उतार लिया जाता है तो हमारी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। यहां जानिए कबीर के 10 चर्चित दोहे…

# 1

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।

माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।

अर्थ: हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए। अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सींच लेगा तब भी पेड़ में फल तो सही समय आने पर ही लगेंगे।

# 2

कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार।

साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।।

अर्थ: हमारे बुरी बातें जहर की तरह होती हैं। अच्छे वचन अमृत के समान होते हैं। इसीलिए हमेशा मीठा और अच्छा बोलना चाहिए।

# 3

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।

अर्थ: हम जितनी मेहनत करते हैं, हमें उसका उतना ही फल मिलता है। गोताखोर गहरे पानी में जाता है तो कुछ न कुछ ले कर ही आता है, लेकिन जो डूबने के डर से किनारे पर ही बैठे रह हैं, उन्हें कुछ भी नहीं मिलता है।

# 4

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब।।

अर्थ: जो कल करना है, उसे आज ही कर लेना चाहिए। जो काम आज करना है उसे अभी करना चाहिए। जीवन बहुत छोटा है, पलभर में कुछ भी हो सकता है। अगर जीवन ही समाप्त हो गया तो क्या करेंगे।

# 5

जैसा भोजन खाइये , तैसा ही मन होय।

जैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होय।।

अर्थ: कबीरदास कहते हैं कि हम जैसा खाते हैं, वैसा ही हमारा मन बनता है। हम जैसा पानी पीते हैं, वैसी ही हमारी बोली हो जाती है।

# 6

निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छबाय।

बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।

अर्थ: हमें उन लोगों को हमेशा अपने पास रखना चाहिए जो निंदा यानी बुराई करते हैं। ऐसे लोग बिना पानी और साबुन के हमारे स्वभाव को स्वच्छ कर देते हैं।

# 7

मांगन मरण समान है, मति मांगो कोई भीख।

मांगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख।।

अर्थ: मांगना मरने के समान है, इसलिए कभी भी किसी से कुछ मांगना नहीं चाहिए।

# 8

साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय।

मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय।।

अर्थ: हे भगवान, मुझे बस इतना दीजिए, जिसमें मैं और मेरा कुटुंब सुखी रह सके। मैं भी भूखा न रहूं और मेरे घर से कोई अतिथि भी भूखा वापस न जाए।

# 9

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय।

अर्थ: सुख में भगवान को कोई याद नहीं करता है, लेकिन दुख में भगवान को सभी याद करते हैं। अगर सुख में भी भगवान को याद किया जाए तो जीवन से दुख हमेशा दूर ही रहेगा।

# 10

तिनका कबहुं ना निन्दिये, जो पांवन तर होय।

कबहुं उड़ी आंखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।।

अर्थ: कभी भी पैर में आने वाले छोटे से तिनके की भी बुराई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अगर ये तिनका आंख में चले जाए तो बहुत पीड़ा होती है।

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