मंच पर कड़िया का साथ, भाषणों में सबका विकास...एक संदेश-कमल है तो मोदी है

News - झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कूद पड़े। उनकी सभाओं के...

Dec 04, 2019, 09:55 AM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कूद पड़े। उनकी सभाओं के लिए खूंटी और जमशेदपुर को चुना गया था। पीएम ने खूंटी से रांची, हटिया, कांके, सिल्ली, खिजरी, तोरपा और तमाड़ समेत क्षेत्र की सारी सीटों को कवर किया तो जमशेदपुर के मंच पर भी कोल्हान की सभी सीटों के उम्मीदवार मौजूद थे। मोदी ने भी मंच के अनुरूप ही भाषण को अलग-अलग धार दी। खूंटी के मंच से आदिवासियों तो जमशेदपुर के मंच से शहरी वोटरों और श्रमिकों को साधने की पूरी कोशिश की। खूंटी के मंच पर कड़िया मुंडा की मौजूदगी और जमशेदपुर के भाषण में सरयू राय की गैर-मौजूदगी दोनों ही चर्चा का विषय रहे। उनका जमशेदपुर की सभा में दिया गया सूत्र ‘मोदी की एक ही पहचान है, कमल है तो ही मोदी है...’ भी कई मायने समझा गया।

खूंटी पीएम मोदी का भाषण आदिवासियों से ही शुरू और आदिवासियों पर ही खत्म

कड़िया मुंडा : प्रधानमंत्री बनने से पहले जब मैं सिर्फ भाजपा का एक कार्यकर्ता था, संगठन का काम देखता था...तब मैंने कड़िया मुंडा की अंगुली पकड़कर संगठन का काम सीखा। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। और मुझे बहुत हर्ष है कि एक बार फिर भाजपा यहां उनके मार्गदर्शन में मेहनत कर रही है।

निहितार्थ : हाल में कड़िया मुंडा के पुत्र झामुमो में शामिल हो गए। अब पीएम के मंच पर उनके आने से स्पष्ट है कि बेटे की बगावत के बावजूद कड़िया के नाम का इस्तेमाल भाजपा करेगी।

नक्सलवाद : पहले चरण की 13 सीटों के लिए जो अभूतपूर्व मतदान हुआ है उससे स्पष्ट है कि जिस तरह भाजपा की सरकार ने नक्सलवाद की कमर तोड़ी है, उससे लोगों में भय अब बहुत कम हो गया है। ये हताश लोग...इन लोगों ने 30 नवंबर को भी लोगों को डराने का प्रयास किया। मगर जनता के साहस ने इसे नाकाम कर दिया।

निहितार्थ : पहले चरण में मोदी की सभा से पहले नक्सली हमला हुआ था। उन रैलियों में नक्सलवाद को मिटाने में राज्य सरकार की भूमिका पर उनका स्वर कुछ धीमा ही रह गया था। इस चरण की सीटों पर भी नक्सलवाद का खासा प्रभाव माना जाता है।

आदिवासी लिंक : धारा 370...अब यह हट चुका है। अब जम्मू-कश्मीर भी विकास की राह पर आदिवासियों के बीच से ही निकले गिरीश चंद्र मुर्मू के नेतृत्व में बढ़ रहा है। ...राजकुमार राम 14 वर्ष आदिवासियों के बीच काटकर लौटे तो मर्यादा पुुरुषोत्तम बनेे। आदिवासियों ने ही राम को संस्कारित किया।

निहितार्थ : धारा 370 पर भी उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल के बहाने आदिवासी पहचान जोड़ दी। गुमला की रैली से भी आगे जाते हुए श्रीराम के संस्कार भी आदिवासियों से जोड़ दिए।

कड़िया से कड़ियां जुड़ने की आस

खूंटी के मंच पर कड़िया मुंडा के साथ हंसते नजर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। माना जा रहा है कि कड़िया मुंडा की नाराजगी दूर कर भाजपा इस क्षेत्र के सरना वोटों को साधने की कोशिश में है।

गरीब-आदिवासी : आज वहां भी बिजली का तार पहुंच चुका है, जहां पहुंचना भी मुश्किल है। इससे पहले जब कांग्रेस-झामुमो की सरकार थी तो गरीबों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया गया था। आदिवासी संस्कृति और पहचान के स्मारक पूरे देश में बनाए जा रहे हैं। एकलव्य मॉडल स्कूलों की शुरुआत भी झारखंड से ही हो रही है।

निहितार्थ : पीएम का लक्ष्य सिर्फ रिजर्व सीटों पर था। पीएम ने संबोधन से पहले अर्जुन मुंडा की तारीफ की, उससे स्पष्ट था एक आदिवासी चेहरे को आगे लाना भाजपा की मजबूरी भी है।

पर्यटन-रोजगार : हमारा प्रयास है कि यहां बाहर से लोग आएं, पर्यटन विकसित हो, नए उद्योग लगें ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। कांग्रेस और झामुमो वाले नहीं चाहते कि ऐसा हो, तभी भ्रम फैला रहे हैं। ...अपने पड़ोसी राज्यों को देखिए। कांग्रेस ने झूठे वादे कर सरकार तो बना ली, मगर अब वादे पूरे नहीं कर पा रही है।

निहितार्थ : सिमडेगा में राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया था। इसी पर मोदी ने निशाना साधा। राहुल ने मोदी को उद्योगपतियों से जोड़ा था, मोदी ने कांग्रेस को उद्योग विरोधी बताया।

कल का मोदी

खूंटी की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने आई एक आदिवासी महिला ने अपने छोटे बच्चे को भी मोदी का मुखौटा पहना दिया।

जमशेदपुर मजदूर, मध्यम वर्ग और मुस्लिम आबादी को एक साथ साधने की कोशिश

टाटा कनेक्शन : जमशेदपुर श्रम और उद्यम की धरती है। ये शहर उदाहरण है कि कैसे मजदूर का श्रम और उद्यमी की संवेदना मिलकर राष्ट्रनिर्माण कर सकते हैं। यहां से तो मेरा सीधा नाता है। टाटा परिवार गुजरात से है। नवसारी में आज भी उनका अपना घर है। यहां आता हूं गुजरात की यादें ताजा हो जाती हैं।

निहितार्थ : जमशेदपुर की नब्ज पकड़ने के लिए टाटा की बात जरूरी है। यहां लगभग हर वोटर किसी न किसी रूप में टाटा से जुड़ा है। सीधा निशाना शहरी वोटर को साधने पर था।

मजदूर-मिडिल क्लास : झारखंड तो सरकारी योजनाओं की गंगोत्री बन गया है। ये जो योजनाएं हैं, ये हमारे मध्यम वर्ग के लिए जरूरी हैं। इन योजनाओं का फायदा भी मजदूरों और मध्यम वर्ग को मिलता है। श्रमयोगी मानधन योजना से असंगठित कामगारों को पेंशन मिलती है। पीएम आवास के तहत भी मजदूरों को ही फायदा मिला है।

निहितार्थ : कोल्हान की सीटों पर सबसे बड़ा फैक्टर उद्योग और मजदूर ही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर सरकारी योजना को मजदूरों से जोड़ उसके फायदे गिनाकर ये बताने की कोशिश की है कि भाजपा सरकार ही मजदूरों की हितैषी है।

सड़क से विमान : पांच साल पहले झारखंड में सिर्फ 36 किमी. ही एनएच बना था। पिछले 5 साल में 700 किमी. नए एनएच बने। रेलवे के आधारभूत ढांचे के लिए भाजपा सरकार 10 हजार करोड़ से ज्यादा झारखंड को दिया। पिछली कांग्रेस सरकारों ने 2000 करोड़ ही दिए थे। एयर कनेक्टिविटी कई गुना बढ़ी है।

निहितार्थ : परिवहन का मुद्दा शहरी वोटरों के लिए बड़ा है। खासतौर पर जमशेदपुर में कनेक्टिविटी का मुद्दा उठता रहा है। पीएम ने इसके जरिये भी शहरी वोटरों को साधा है।

कांग्रेस-झामुमो पर खुलकर साधा निशाना

पहले चरण के मतदान से पूर्व की रैलियों में प्रधानमंत्री ने सीधे हेमंत सोरेन या झामुमो पर वार नहीं किया था। मगर इस बार खूंटी और जमशेदपुर दोनों ही सभाओं में पीएम मोदी ने खुलकर कांग्रेस-झामुमो गठबंधन पर निशाना साधा।

आयकर छूट से हेल्थ सुविधा तक

जमशेदपुर की सभा में मोदी का लक्ष्य शहरी मध्यम वर्ग को साधना था। यहां आयकर छूट की सीमा 5 लाख तक बढ़ाने के कदम से लेकर राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने तक का जिक्र किया।

सरयू और 86 बस्ती का जिक्र नहीं

मोदी ने सरयू राय या जमशेदपुर में मुद्दा बने 86 बस्ती के नियमितीकरण का जिक्र नहीं किया। सरयू का नाम लिए बिना कहा कि मोदी की पहचान सिर्फ एक है...कमल। जहां कमल फूल नहीं, वहां मोदी नहीं।

डबल इंजन 8 बार...नारा 2 बार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 8 बार (खूंटी में 3 बार, जमशेदपुर में 5 बार) डबल इंजन शब्द का प्रयोग किया। यही नहीं राज्य में भाजपा के नारे ‘झारखंड पुकारा, भाजपा दोबारा’ का भी दो बार जिक्र किया।

स्थिर सरकार : कांग्रेस-झामुमो के सत्ता के लालच के चलते ही झारखंड ने 15 साल में 10 सीएम देख लिए। गुजरात में तो सिर्फ मैं ही 13 साल सीएम रहा। इस स्थिरता का नतीजा देखिए...। झारखंड का मौसम जितनी जल्दी नहीं बदलता, उससे भी तेजी से यहां सीएम बदले गए। स्थिरता से ही विकास संभव है।

निहितार्थ : प्रधानमंत्री ने स्थिरता के सहारे लोगों को ये संदेश देने की कोशिश की कि विकास चाहिए तो स्थिर सरकार जरूरी है और उसके लिए स्पष्ट बहुमत मिलना बहुत जरूरी है।

तीन तलाक : तीन तलाक को खत्म करने का कानून लाकर हमने मांआें-बहनों को सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। तीन तलाक से सिर्फ मुस्लिम महिलाएं ही नहीं मुस्लिम पुरुष भी परेशान थे। हर पिता को हर भाई को चिंता थी कि बेटी-बहन को विदा तो किया है, मगर कहीं तीन तलाक के कारण उसे घर न लौटना पड़े।

निहितार्थ : शहरी क्षेत्रों खासकर जमशेदपुर की मुस्लिम आबादी को तीन तलाक बिल के बहाने मोदी ने साधने की कोशिश की। मुस्लिम पुरुषों को भी साथ में मिलाया।

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