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डाउनलोड करेंनेशनल डेस्क. कर्नाटक चुनाव में जीत से कांग्रेस को संजीवनी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। बीजेपी पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस 78 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। कांग्रेस ने ये चुनाव राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद लड़ा है और राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा है। तो सवाल ये है इस हार का राहुल गांधी पर क्या असर पड़ेगा?
1. राहुल की लीडरशिप पर सवाल
2014 में लोकसभा चुनाव के बाद से अघोषित रूप से कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथ में थी। दिसंबर 2017 में उन्हें पार्टी का अध्यक्ष भी घोषित किया गया। लेकिन पंजाब को छोड दें तो कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। यूपी चुनाव के बाद सोनिया गांधी ने भी चुनावी रैलियों से दूरी बना ली थी, लेकिन उन्होंने कर्नाटक में एक सभा को संबोधित किया। लेकिन उसका कोई फर्क नहीं दिखा। अब पार्टी का पूरा दारोमदार राहुल गांधी पर आ चुका है लेकिन चुनावी नतीजों को देखें तो वो लगातार फेल साबित हो रहे हैं। ऐसे में राहुल की लीडरशिप पर सवाल खड़े होते हैं।
2. एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मुश्किल राह
कर्नाटक चुनाव के रिजल्ट आने के बाद एक बार फिर से साबित हो गया है कि अब भी मोदी की लहर है। उनके सामने किसी पार्टी का टिकना मुश्किल है। बीजेपी के लिए कर्नाटक चुनाव ने एक बुस्टर का काम किया है जिसका असर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है। इन तीनों राज्यों में कांग्रेस के लिए कर्नाटक से बड़ा चैलेंज है। कर्नाटक में तो कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन इन तीन जगहों पर बीजेपी सत्ता पर काबिज है। ऐसे में कर्नाटक की हार से हतोत्साहित कार्यकर्ताओं में जोश भरना भी चुनौती भरा होगा।
3. राहुल की मंदिर-मठ पॉलिटिक्स फेल
गुजरात हो या फिर कर्नाटक का चुनाव। दोनों जगहों पर राहुल गांधी की मंदिर पॉलिटिक्स देखने को मिली। कर्नाटक चुनाव प्रचार में भी वो मंदिर, दरगाह और मठो में गए। एक सभा के दौरान मानसरोवर जाने का जिक्र भी किया। लेकिन उनकी मंदिर पॉलिटिक्स फेल साबित हुई। ऐसे में राहुल को सोचना पड़ेगा कि 2019 के लिए वो किस प्लॉनिंग पर काम करें, जिससे की बीजेपी के वोटबैंक में सेंध लगा सके।
4. 2019 के लिए गठबंधन में आ सकती है दिक्कत
कर्नाटक हारने के बाद कांग्रेस को 2019 के लिए के गठबंधन में दिक्कत आ सकती है। क्योंकि बाकी पार्टियों जैसे सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके जैसे दलों की स्थानीय पकड़ है। लेकिन कांग्रेस के पास सिर्फ बड़े राज्यों में पंजाब बचा है। ऐसे में हो सकता है कि कांग्रेस गठबंधन तो करे लेकिन लीडिंग पोजीशन में न हो। सोनिया गांधी के लिए भी चैलेंज होगा कि वो यूपीए को कैसे एकजुट रख पाती हैं।
5. दक्षिण में मोदी मैजिक को कम करना
कर्नाटक में सरकार रहने के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 और बीजेपी को 17 सीटें मिली थीं। जिसमें वोट का शेयर कांग्रेस का 41.2 प्रतिशत और बीजेपी का 43.4 प्रतिशत था। कर्नाटक में कांग्रेस की हार के बाद 2019 में बीजेपी की लोकसभा सीटें राज्य में बढ़ सकती हैं। कर्नाटक में जीत के बाद बीजेपी ने दक्षिण भारत में री-एंट्री की है। पार्टी का अगला टारगेट तमिलनाडु है। जहां जयललिता के निधन के बाद AIADMK कमजोर हुई है वहीं DMK भी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है। ऐसे में लगातार खबरें आती रही हैं कि बीजेपी रजनीकांत को चेहरा बनाकर चुनाव लड़ सकती है।
6. राहुल को अपनी छवि करनी होगी मजबूत
कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी सरकार के किए कामों को गिनाते रहें। सिद्धारमैया की विकासवादी छवि को जनता के बीच रखते रहे। वहीं मोदी ने लगातार आक्रामक होकर राहुल पर निशाना साधा। जिसका फायदा बीजेपी को मिला। ऐसे में मोदी को रोकने के लिए राहुल गांधी को भी अपने एटीट्यूड, बॉडी लैग्वेज और स्पीच में बदलाव लाना पड़ सकता है।
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