पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंबेंगलुरु/नई दिल्ली. कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बन गई है। बीएस. येदियुरप्पा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। येदियुरप्पा को 15 दिन में बहुमत साबित करना
है। फिलहाल, बीजेपी के पास 104 विधायक हैं। कांग्रेस के 78 और जनता दल सेक्युलर के 38 विधायक हैं। 2 निर्दलीय और एक बहुजन समाज पार्टी का विधायक है।
2 सीटों पर अभी चुनाव और होना है। कांग्रेस पहले ही जनता दल सेक्युलर को समर्थन दे चुकी है। उसने कहा है कि जेडीएस के नेता कुमारस्वामी को सीएम बनाया जाना
चाहिए। कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का दावा है कि उनके पास 117 विधायकों का समर्थन है। जानकारी के मुताबिक- अगर इन दोनों पार्टियों में करीब 12 लिंगायत समुदाय के विधायक हैं। और ये कहा जा रहा है कि ये विधायक कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर के गठबंधन से खुश नहीं हैं। लिहाजा, ये विधायक हो सकता है कि बीजेपी को समर्थन दे दें।
कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन: यानी दोनों का फायदा?
- कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लिंगायत समुदाय से आने वाले विधायक कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के गठबंधन से काफी खफा हैं।
- दरअसल, ये सही भी हो सकता है। कांग्रेस ने 78 सीटें जीतने के बावजूद जनता दल सेक्युलर के नेता एचडी. कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया। जनता सेक्युलर भी इसके लिए तैयार हो गई। उसके पास 38 विधायक हैं।
- सवाल ये है कि 78 विधायक होने के बावजूद भी कांग्रेस ने आखिर जनता दल सेक्युलर को सीएम पद क्यों ऑफर किया? इसकी वजह बिल्कुल साफ है। कांग्रेस किसी भी कीमत पर बीजेपी को रोकना चाहती थी। इसीलिए, उसने जनता दल को आगे रखकर सियासी चाल चली।
बीजेपी की नजरें लिंगायत विधायकों पर
- बीजेपी ने सरकार तो बना ली। अब सवाल ये है कि येदियुरप्पा विधानसभा में बहुमत कैसे साबित करेंगे? आखिर किस भरोसे पर उन्होंने सरकार बना ली। समर्थन कहां से हासिल होगा? क्या बीजेपी पहले ही तैयारी कर चुकी है।
- अगर ये मान भी लें कि कांग्रेस-जेडीएस के पास 117 विधायकों का समर्थन है तो बीजेपी कैसे बहुमत हासिल करेगी? दरअसल, कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों में से करीब 12 विधायक उस लिंगायत समुदाय से आते हैं जिससे येदियुरप्पा खुद हैं।
- कांग्रेस कुमारस्वामी को सीएम बनाना चाहती है। वो वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस और जनता दल एस के यही विधायक बीजेपी को समर्थन दे सकते हैं। इसकी वजह ये है कि वो कुमारस्वामी को सीएम के तौर पर शायद नहीं देखना चाहते।
नाराजगी की एक वजह ये भी
- 2007 में भाजपा और जेडीएस ने सरकार चलाई। तय हुआ था कि एक तय वक्त तक दोनों के सीएम बारी-बारी से बनेंगे। कुमारस्वामी वोक्कालिगा समुदाय से हैं। उन्होंने तब खुद तो सीएम पद का सुख भोग लिया लेकिन जब बीजेपी की बारी आई तो सरकार से अलग हो गए। लिंगायतों इससे खफा हो गए। उन्हें लगता था कि येदियुरप्पा सीएम बनेंगे।
- राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता दल सेक्युलर को बीजेपी की बी टीम बताया था। जनता दल के कुछ नेता इस बात से अब तक नाराज हैं।
लिंगायत समुदाय को ऐसे समझें
- कर्नाटक में लिंगायत करीब 17% हैं। अभी तक इन्हें अगड़ी जातियों में गिना जाता रहा। ये राज्य की करीब 100 सीटों पर असर डालते हैं।
- 224 सदस्यों वाली राज्य की विधानसभा में 52 विधायक लिंगायत हैं। करीब 800 साल पहले बासवन्ना नाम के समाज सुधारक थे। उन्होंने जाति व्यवस्था में भेदभाव के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। वेदों और मूर्ति पूजा को नहीं माना। बासवन्ना के विचारों को मानने वालों को ही लिंगायत और वीरशैव कहा जाता है।
- हालांकि, लिंगायत खुद को वीरशैव से अलग बताते हैं। उनका कहना है कि वीरशेव बासवन्ना से भी पहले से हैं। वे शिव को मानते हैं, जबकि लिंगायत शिव को नहीं मानते। चुनाव से पहले राज्य की कांग्रेस सरकार ने नया दांव खेला था। उसने लिंगायत और वीरशैव समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का सुझाव मंजूर कर लिया था।
- सरकार के इस फैसले का वीरशैव लिंगायत समुदाय ने विरोध किया। उनका कहना था कि वीरशैव लिंगायत को लिंगायत से अलग धर्म घोषित किया जाए। येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.