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डाउनलोड करेंबंगलुरू. कर्नाटक में बीजेपी की येदियुरप्पा सरकार महज ढाई दिन में ही गिर गई। बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा न होने की वजह से मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। येदियुरप्पा ने बहुमत का प्रस्ताव पेश तो किया, लेकिन फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं गए। अब कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन से सरकार बनाएंगे। कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री जेडीएस के कुमारस्वामी सोमवार को शपथ लेंगे । कर्नाटक के इस सियासी नाटक का परदा गिर चुका है। और जनता समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर यहां किसकी मर्जी चली? चलिए समझने की कोशिश करते हैं।
किसकी जीत?
1) भले ही बीजेपी की सरकार गिर चुकी हो, लेकिन कर्नाटक की जनता ने सबसे ज्यादा वोट बीजेपी को दिए थे। यानी जनता की पहली पसंद बीजेपी थी। लेकिन वो हार गई।
2) कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया। यानी जनता चाहती थी कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो। इस वजह उसे 78 सीट ही मिलीं। लेकिन वो जीत गई।
3) देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस तीसरे नंबर की पार्टी है। उसे सिर्फ 37 सीट ही मिलीं। यानी जनता का पार्टी पर भरोसा नहीं था। लेकिन वो जीत गई। सत्ता में जेडीएस बैठ रही है।
तीन उदाहरण से समझते हैं...
मणिपुर
इस साल मणिपुर में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। 60 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस 28 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन राज्यपाल ने उसे सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया। जबकि बीजेपी 21 सीट जीतकर, छोटे दलों और निर्दलीय को मिलाकर बहुमत के लिए 32 विधायक जुटा लिए थे और सरकार बना ली।
मेघालय
वहीं, मेघालय में हुए चुनाव में भाजपा ने सिर्फ दो सीट जीतकर भी सरकार बना ली थी। 60 सीट वाली विधानसभा में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 21 सीटें जीतीं थी। बावजूद इसके भाजपा ने अपनी दो सीट के साथ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) 19, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) 6, एचएसपीडीपी 2, पीडीएफ 4 और एक निर्दलीय के साथ आने से इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन मिल गया।
गोवा
इसी साल ही बीजेपी ने गोवा में भी बहुमत न मिलने के बाद भी अपनी सरकार बना ली थी। 40 सीट वाली विधानसभा में कांग्रेस को 17 सीट मिली थीं, जबकि बीजेपी को 13 सीट मिली थीं। बावजूद इसके बीजेपी ने जोड़तोड़ से यहां भी सरकार बनाई।
किसकी हार?
कहा जाता है कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है लेकिन कर्नाटक से लेकर गाेवा, मेघालय आरैर मणिपुर में जो हुआ, उसमें सिर्फ जनमत की हार हुई है।
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