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डाउनलोड करेंसलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर से
जीत के बाद कर्नाटक में कांग्रेस कार्यकर्ता जश्न मनाने सड़कों पर उतर आए
कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है.
राज्य की 224 सीटों में से जिन 223 पर चुनाव हुए, उनमें से कांग्रेस ने 121 सीटों पर जीत हासिल की है.
मैसूर ज़िले की एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार की मौत होने की वजह से वहां मतदान नहीं हो पाया था. वहां मतदान 28 मई को होगा.
येदियुरप्पा की नाराज़गी की भाजपा को भारी कीमत चुकानी पड़ी है और पार्टी सिर्फ़ 40 सीटों पर सिमट गई है.
\'येदियुरप्पा को वापस लाओ\'दूसरे स्थान पर जेडीएस का भाजपा के साथ टाई है, उसे भी 40 सीटें मिली हैं. भाजपा का साथ छोड़ना येदियुरप्पा को भी रास नहीं आया.
नया दल, कर्नाटक जन पक्ष, बनाकर चुनाव में उतरे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिर्फ़ छह सीटें ही जीत पाए. इसमें उनकी अपनी सीट भी शामिल है.
येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने से हुए नुकसान की बात भाजपा के कई नेता मानने लगे थे. निवर्तमान मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने भी बीबीसी से ख़ास बातचीत में इसे स्वीकार किया.
उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा ने भाजपा को राज्य में काफ़ी नुकसान पहुंचाया है. शेट्टार ने कहा कि दो साल के भ्रष्टाचार की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी है.
वह कहते हैं कि उनके नौ महीने का कार्यकाल तो ठीक था. लेकिन पुरानी ग़लतियों को दुरुस्त करने के लिहाज से यह समय कम था. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की जीत नहीं बल्कि भाजपा की हार है, जिसके वोट कटने का फ़ायदा कांग्रेस को मिला.
उधर पार्टी का एक धड़ा मांग करने लगा है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को वापसी करनी है तो तो उसे 2014 से पहले येदियुरप्पा को वापस लाना होगा.
बीबीसी से बातचीत में कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता लहर सिंह का कहना है कि येदियुरप्पा को वापस लाने के प्रयास किए जाने चाहिए.
इस चुनाव में विभिन्न पार्टियों के कुल 2948 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. राज्य की प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, भाजपा और केजेपी ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे.
मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, भाजपा, जनता दल (सेक्यूलर) और येदियुरप्पा की पार्टी कर्नाटक जन पक्ष (केजेपी) के बीच माना जा रहा था.
वर्ष 1998 में भाजपा ने किसी दक्षिण भारतीय राज्य में पहली बार कर्नाटक में ही सरकार बनाई थी.
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