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महाभारत 2019: कर्नाटक में गठबंधन नहीं; किसान, कावेरी और लिंगायत ही तय करेंगे 2019 में पार्टियों का भविष्य

एक तबका ऐसा भी है, जो यह मानता है कि नरेंद्र मोदी को और समय देना चाहिए।

Danik Bhaskar | Jun 29, 2018, 12:54 AM IST

बेंगलुरु. कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन सरकार बना ली है। अब हलचल 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर है। किसानों की समस्या, कावेरी विवाद, लिंगायत समाज को धर्म के तौर पर मान्यता और हिंदू-मुस्लिम तनाव यहां के प्रमुख मुद्दे हैं। ये चुनाव पर बड़ा असर डालेंगे। वीरशैव और लिंगायत समाज का कहना है कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का फैसला लेकर जिस तरह का साहस दिखाया, वैसा ही लिंंगायत धर्म को मान्यता देकर भी दिखाना चाहिए। दूसरी तरफ किसान संगठन हैं, जिन्हें किसी पर भरोसा नहीं। वे कहते हैं, "राज्य में बीजेपी, कांग्रेस, जेडीएस तीनों ही सांप्रदायिक और भ्रष्टाचारी हैं। जो पार्टी कृषि उत्पादों का अच्छा भाव देगी, जल बंटवारे की समस्या से निजात दिलाएगी, उसे ही समर्थन दिया जाएगा।" उधर, एक तबका ऐसा भी है, जो यह मानता है कि नरेंद्र मोदी को और समय देना चाहिए। हालांकि, यह तबका धर्म और संस्कृति के नाम पर स्थानीय हिंदू संगठनों द्वारा फैलाई हिंसा और तनाव के आरोपों से भाजपा को नुकसान होने का अंदेशा भी जता रहा है। दरअसल यहां जाति और धर्म के ध्रुवीकरण को ही बीजेपी का आधार माना जा रहा है।

इधर, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन करीब 53 हजार करोड़ रु. का कर्ज माफ कर राज्य के 85 लाख किसान परिवारों को अपनी ओर खींचने में लगा है। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा ‘भास्कर’ से बातचीत में कहते हैं, "कांग्रेस के आग्रह पर कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। मोदी के विरोध में बनाया गया गठबंधन आगे भी कायम रहेगा। विपक्षी दलों में दरार से अब तक बीजेपी को फायदा हुआ है, लेकिन 2019 में ऐसा नहीं होगा।" 1977 से कांग्रेस कमेटी में शामिल नारायणप्पा कहते हैं, "आंकड़ों को देखें, तो यह बहुत अच्छा प्रदर्शन है। लोकसभा चुनाव में भी हमें काफी उम्मीद है। इमरजेंसी के बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस की हालत खराब थी। इसके बावजूद कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को 24 सांसद दिए थे।"

कांग्रेस: किसान कर्जमाफी प्रभावी मुद्दा, पर चुनौती भी
कर्नाटक कांग्रेस के उपाध्यक्ष बीएल शंकर ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी रहेगा। लेकिन कांग्रेस-जेडीएस सरकार के सामने इस फैसले पर अमल करने की चुनौती है। एक ही बार में 53 हजार करोड़ का प्रावधान करना मुश्किल हो सकता है। इसीलिए इस फैसले को चरणबद्ध तरीके से लागू करना होगा।

जेडीएस: छिटके मुस्लिम वोटों के लौटने का भरोसा
वक्कलिंगा समाज की सबसे ज्यादा आबादी दक्षिण कर्नाटक के मैसूर, हसन, कोलार, चिकबल्लापुर, चामराजनगर जिलों में है। एचडी देवगौड़ा बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने हमें भाजपा की बी टीम बताया था। यकीनन इसका बुरा असर पड़ा है। इस वजह से हमारे मुस्लिम वोट कांग्रेस को चले गए थे। हालांकि सत्ता में आने के बाद अब हम मुस्लिमों का भरोसा दोबारा हासिल कर सकते हैं।’

भाजपा: मोदी को युवा देना चाहते हैं एक और मौका
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता जी मधुसूदन आरोप लगाते हैं, "कर्नाटक में कट्‌टर आतंकी संगठनों ने निर्दोषों की हत्याएं कीं। आईएस से जुड़े कुछ मुस्लिम संगठनों की जड़ें केरल में हैं। कर्नाटक-केरल में रही कांग्रेस-कम्युनिस्टों की सरकार के इस मामले में कोई कदम न उठाने से हिंदुओं में काफी गुस्सा है।" शहरी इलाकों में भाजपा को फायदा हो सकता है। बेंगलुरु के युवा और नौकरीपेशा मतदाता मोदी को एक और अवसर देने की बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा दौर में नरेंद्र मोदी का नेतृत्व ही उन्हें भरोसेमंद लगता है।

किस क्षेेत्र में कौन प्रभावी

ओल्ड मैसूर कांग्रेस-जेडीएस
बेंगलुरु बीजेपी-कांग्रेस में प्रतिस्पर्द्धा
कोस्टल कर्नाटक बीजेपी
मुंबई कर्नाटक बीजेपी
मध्य कर्नाटक बीजेपी
हैदराबाद कर्नाटक कांग्रेस-जेडीएस