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डाउनलोड करेंबेंगलुरु/नई दिल्ली. कर्नाटक में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता मिलने से कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर काफी खफा हैं। उन्होंने राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने शपथ पर रोक नहीं लगाई। अब इस मामले पर आगे सुनवाई होगी। हालांकि, संविधान के जानकार राज्यपाल के फैसले में कुछ भी गलत नहीं देखते। उनका कहना है कि किसी भी सरकार को बहुमत तो सदन में साबित करना होता है। बता दें कि कर्नाटक में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था।
राज्यपाल का फैसला बिल्कुल सही
- संविधान के जानकार सुभाष कश्यप ने कहा- राज्यपाल के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती। जहां तक ये सवाल है कि किस पार्टी के पास बहुमत है, तो इसका फैसला विधानसभा में होगा-राजभवन में नहीं। वहां विधायकों की लिस्ट देने का कोई अर्थ नहीं है। वैसे भी यह फैसला तो पूरी तरह राज्यपाल के विवेक पर ही निर्भर करता है। संविधान इस बारे में राज्यपाल को पूरे अधिकार देता है।
मुकुल रोहतगी ने क्या कहा?
- देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कर्नाटक में त्रिशंकू विधानसभा की स्थिती पर कहा- राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देना चाहिए। जाहिर सी बात है कि बीजेपी ही सबसे बड़ी पार्टी है। उन्हें बीजेपी से पूछना चाहिए कि क्या वो सरकार बनाना चाहती है। अगर वो इनकार करते हैं तो फिर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को न्योता मिलना चाहिए। राज्यपाल को उन्हें बहुमत साबित करने के लिए वक्त भी देना चाहिए।
गोवा का मामला अलग है
- रोहतगी ने कहा- राज्यपाल के पास ये अधिकार है कि वो सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दें। अगर वो सरकार बनाने में नाकाम रहती है तो दूसरी पार्टी को ये मौका दिया जा सकता है। जहां तक गोवा के मामले की बात है तो आपको ये याद रखना चाहिए कि वहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन उसने तो सरकार बनाने का दावा ही पेश नहीं किया था। इसलिए, ये मामला अलग है।
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