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डाउनलोड करेंजयपुर. कर्नाटक में 15 मई की दोपहर के बाद से शुरू हुई विधायकों की बाड़ेबंदी का खेल राजस्थान के पाली जिले के सिरियारी के एक शर्मा परिवार की बसों के इर्द गिर्द घूमता रहा। अति गोपनीय तरीके से 116 विधायकों को चार दिन तक बसों में घुमाने की कमान 1960 में सिरियारी से बैंगलोर बसे धनराज पारसमल शर्मा की ट्रेवल कंपनी के पास रखी गई। उनके पुत्र सुनील शर्मा और भांजे तेजराज शर्मा ने भाजपा के सभी प्रयासों को फेल कर दिया और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गाइडेंस में बसों को गोपनीय तरीके से संचालित करते रहे। विधायक इन्हीं बसों में रहे...
शनिवार शाम को यह ड्रामा उस वक्त खत्म हुआ, जब विधानसभा में बहुमत हासिल करने से पहले ही 48 घंटे मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया। 4 बजे सभी कांग्रेस-जेडीएस विधायक शर्मा ट्रैवल्स की बसों से उतरे से ये बसे पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। फ्लोर टेस्ट का समय होने तक 100 घंटे सभी विधायक इन्हीं बसों में रहे।
शनिवार शाम विधानसभा में कांग्रेस-जेडीएस की कूटनीतिक जीत होने के बाद इन बसों से दोनों पार्टियों के विधायक उतरे तो सभी ने शर्मा बसों की फिर चर्चा चली। बैंगलोर साउथ से 1980 में कांग्रेस टिकट से चुनाव लड़ चुके डी पी शर्मा के भांजे तेजराज शर्मा ने बताया कि वे पिछले तीन से पूर्व सीएम अशोक गहलोत के साथ ही थे। वे ही 50 साल से उनके मामा डीपी शर्मा की 500 से अधिक बसों का काम संभाल रहे हैं। कांग्रेस-जेडीएस विधायकों को उनकी ही बसों से हैदराबाद, साउथ के कई रिसोर्ट्स में घुमाया गया। किसी को भनक नहीं लगने दी कि किसकी बसों में दोनों पार्टियों के विधायक कहां रखे गए हैं? अति गोपनीय बसों में बाड़ेबंदी की कमान खुद तेजराज शर्मा और अशोक गहलोत के पास थी। जिसके कारण एक भी विधायक उनसे टूटा नहीं।
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