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डाउनलोड करेंफ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, काकापुरा गांव, पुलवामा, कश्मीर
कश्मीर घाटी के बाढ़ प्रभावित चार ज़िलों में एक पुलवामा. यहां बाढ़ की विभीषिका का अंदाज़ा मुख्य सड़क से पांच-छह किलोमीटर भीतर जाकर ही होता है.
पुलवामा के 343 गांवों में से 77 ने बाढ़ की विभीषिका झेली है. हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी की मौत नहीं हुई है.
भीतरी इलाक़े में वो सड़कें नज़र आती हैं जिनके हिस्से पानी की भेंट चढ़ गए. टूटी सड़कों के किनारे ढहे हुए मकान और धान की बर्बाद फ़सल दिखाई देती है.
मिडिल स्कूल में शिक्षक ज़हूर अहमद का गांव नाराबत भी सैलाब से प्रभावित हुआ. वह राहत के काम में लगे हैं.
वह कहते हैं कि रोमश नदी के किनारे बसे अधिकतर गांव पूरी तरह तबाह हो गए हैं.
फलों के व्यापारी शफ़ीक अहमद कहते हैं कि धान की खेती लगभग तबाह हो गई है और सेब की फ़सल को भी बहुत नुक़सान हुआ है.
शोपियां से श्रीनगर को जोड़ने वाली रोमश नदी पर बना पुल ढह गया है.
मस्जिद की छत पर..नामन गांव में हमारी मुलाक़ात तीन भाईयों से हुई, जिनका घर ढह गया.
सबसे छोटे भाई एजाज़ अहमद पहलो कहते हैं कि उन्हें औरतों-बच्चों समेत गांव के दूसरे लोगों के साथ मस्जिद की छत पर पनाह लेनी पड़ी थी.
अब वो सब गांव में किराये पर एक घर में रह रहे हैं.
नामन और नाराबत में बाढ़ का पानी सड़कों पर नहीं है और वहां पहुंचने का रास्ता खुल चुका है. मगर काकापुरा के कुछ दूर आगे जाते ही सड़कें पानी से लबालब भरी हैं.
काकापुरा झेलम के किनारे है और उसके एक तरफ़ मछुआरों का गांव है.
मल्लाह बशीर अहमद बताते हैं कि उनके गांव में अचानक तेज़ी से पानी बढ़ गया और वह किसी तरह बीवी-बच्चों और दूसरों को घरों से निकाल पाए.
उनके साथी रफ़ीक़ अहमद डार ने बताया कि कई लोगों को पेड़ पर पनाह लेनी पड़ी.
ज़िले के डिप्टी कमिश्नर सज्जाद अहमद ख़ान ने बीबीसी से कहा कि एक समय ज़िला घाटी के दूसरे हिस्सों से कट गया था.
उन्होंने बताया, \"हम वाहीबुक ब्रिज की मरम्मत करने और उसे फिर से चालू करने में कामयाब हो गए हैं और ज़िले में पहुंचने का एक रास्ता खुल गया है.\"
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