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कर्नाटक में निपाह वायरस ने ली 8 की जान, 20 साल पहले मलेशिया में सामने आया था पहला मामला

3 वर्ष पहले
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  • कोझिकोड में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, उनके कुएं में मिला था फ्रूट बैट, इलाज करने वाली नर्स की भी जान गई
  • वायरस को फैलने से रोकने और विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करने राज्य के दो मंत्रियों ने कोझिकोड में डेरा डाला
  • 2004 में बांग्लादेश में खजूर की खेती करने वालों में इस बीमारी के फैलने से 31 लोगों की मौत हो गई थी

 

कोझिकोड (केरल).  केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस जानलेवा वायरस से पीड़ित छह लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि 25 प्रभावित सघन निगरानी में रखे गए हैं। जानवरों से फैलने वाला यह वायरस कोझिकोड में चमगादड़ के जरिये फैला है। फ्रूट बैट कहा जाने वाला चमगादड़ मुख्यत: फल या फल के रस का सेवन करता है। सूचना के बाद पूरा केरल हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने ब्लड सैंपल की जांच के बाद पुष्टि की है कि बुखार के कारण हुई चार में से तीन मौतों की वजह निपाह वायरस था। पहली मौत 19 मई को हुई थी।  

 

 

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, उनके कुएं में मिला था फ्रूट बैट

- निपाह वायरस के कारण कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वायरस की चपेट में आए परिवार के मुखिया का भी इलाज चल रहा है। उनके घर के कुएं में फ्रूट बैट मिला है। 
- स्वास्थ्य मंत्री केके शिलाजा ने कहा कि अब कुआं बंद कर दिया गया है। इन लाेगों का इलाज करने वाली लिनी नाम की नर्स की भी तेज बुखार के बाद मौत हो गई। 

 

वायरस को आगे फैलने से रोकने दो कंट्रोल रूम बनाए गए

- मुख्यमंत्री पी विजयन ने निर्देश दिया है कि कोई भी निजी अस्पताल निपाह वायरस से संक्रमित मरीज के इलाज से इनकार नहीं करेगा।

- वायरस को आगे फैलने से रोकने और विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य और श्रम मंत्री ने कोझिकोड में डेरा डाल रखा है। दो कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।

- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के डायरेक्टर के नेतृत्व में डॉक्टरों की हाई लेवल टीम भी केरल भेजी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केरल के स्वास्थ्य विभाग से लगातार संपर्क बनाए हुए है। 

 

क्या होता है निपाह वायरस?

- फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इस वायरस के वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।
- 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।

- 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है। 

 

सांस लेने में होती है दिक्कत

- इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है। 

 

कोई वैक्सीन नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।  

 

पेड़ से गिरे फलों को न खाएं

- इस बीमारी से बचने के लिए खजूर, उसके पेड़ से निकले रस और पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर, घोड़ों और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। 

 

 

निपाह वायरस : 6 प्वाइंट में जानिए क्या है वायरस, कैसे पहचानें और चमगादड़ से ही क्यों फैलता है

 

बांग्लादेश में इस बीमारी से जा चुकी हैं सैकड़ों जिंदगियां

साल/महीना स्थान  केस मौतें मौत की  दर

जनवरी-फरवरी

2001

सिलीगुड़ी (भारत) 66 45 68%

अप्रैल-मई

2001

महरपुर (बांग्लादेश) 13 9 69%
जनवरी-2003 नौगांव (बांग्लादेश) 12 8 67%
जनवरी-2004 राजबारी (बांग्लादेश) 31 23 74%
अप्रैल-2004 तंगगेल (बांग्लादेश) 12 11 92%

जनवरी-फरवरी

2007

ठाकुरगांव (बांग्लादेश) 7 3 43%
मार्च-2007

कुश्तिआ, पबना, नटोर (बांग्लादेश)

8 5 63%
अप्रैल-2007 नौगांव (बांग्लादेश) 3 1 33%
अप्रैल-2007 नादिया (भारत) 5 5

100%

फरवरी-2008 माणिकगंज (बांग्लादेश) 4 4 100%
अप्रैल-2008 राजबारी, फरीदपुर (बांग्लादेश) 7 5 71%
जनवरी-2009

गई बांधा, रंगपुर, नीलफमारी (बांग्लादेश)

 

3 0 0%

 

राजबारी (बांग्लादेश) 1 1 100%

फरवरी-मार्च

2010

फरीदपुर, राजबारी, गोपालगंज, मदारीपुर (बांग्लादेश) 16 14 87.50%
जनवरी-फरवरी 2011 लालमोहिरहाट,दिनाजपुर,कोमिल्ला,नीलफमारी और रंगपुर (बांग्लादेश) 44 40 91%
फरवरी 2012 जोयपुरहाट, राजशाही, माटोर, राजबारी और गोपालगंज (बांग्लादेश) 12 10 83%
कुल   280 211 75%

- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन दक्षिण-पूर्व एशिया के मुताबिक 2001 से 2012 के बीच निपाह वायरस से हुई मौतों के आंकड़े 

- यानी  75% मामलों में निपाह संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है।

 

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