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डाउनलोड करेंभारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े मामले में पैदा हुए तनाव के बाद पहली बार भारत और अमरीका के विदेशमंत्री एक-दूसरे से मिले और दोनों ने आपसी संबंधों को बहाल करने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है.
अमरीका को इतनी तवज्जो क्यों देता है भारत?
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी और भारत के विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद की मुलाक़ात स्विटज़रलैंड के मॉन्गट्रेए में बुधवार को हुई जहां सीरिया संकट के समाधान के लिए आयोजित शांति-वार्ता में कई देशों के प्रतिनिधि जुटे हैं.
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक़, अमरीकी विदेश विभाग के एक बयान में कहा गया है कि \'\'शांति-वार्ता से इतर, भारत और अमरीका के विदेश मंत्रियों ने सामरिक, सुरक्षा, आर्थिक मुद्दों पर आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता पर विचार-विमर्श किया.\'\'
वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि सलमान ख़ुर्शीद ने देवयानी मामले पर भारत की चिंताओं से जॉन कैरी को अवगत कराया है.
खटास और तनावदोनों नेताओं के बीच इस मुलाक़ात को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीते साल 12 दिसम्बर को भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की गिरफ़्तारी और उनकी जामा-तलाशी के बाद भारत और अमरीका के संबंधों में खटास आ गई थी.
इस मामले में खटास बाद में इतनी बढ़ गई थी कि भारत ने दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास और उसके अधिकारियों-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कई अप्रत्याशित क़दम उठाए थे.
हालांकि नए साल में देवयानी को भारत लौटने की अनुमति मिल गई थी लेकिन अमरीका ने कहा था कि उनके ख़िलाफ़ मामला जारी रहेगा.
देवयानी पर अमरीका में अपनी घरेलू कर्मचारी को कम मेहनताना देने और वीज़ा धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं.
इस पूरे मामले की वजह से दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर विवाद के तूल पकड़ने की वजह से अमरीकी ऊर्जा मंत्री अर्नेस्ट मोनिज़ ने अपना भारत का दौरा टाल दिया था.
अब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात की पृष्ठभूमि में अमरीकी विदेश विभाग ने ऊर्जा के मामले में दोनों देशों के संबंध आने वाले महीनों में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई है.
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