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डाउनलोड करेंसलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर से
एस सिद्धारमैया अहम दावेदार माने जा रहे हैं
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी. लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि इस सरकार का नेतृत्व कौन करेगा.
कर्नाटक- बाज़ी कांग्रेस के हाथ कैसे लगी
राज्य में नेतृत्व करने वाले नेताओं की एक लंबी कतार है.लेकिन कुछ ऐसे चेहरे हैं जिन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं.
आइए डालते हैं एक नज़र मुख्यमंत्री पद के इन दावेदारों पर एक नज़र.
एस सिद्धारमैयाएस सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं चूंकि मौजूदा विधानसभा में वो विपक्ष के नेता रहे हैं.
उन्हें पिछड़े वर्ग का सबसे कद्दावर नेता माना जाता है जो 2006 में कांग्रेस में शामिल हुए हैं.
उन्होंने अपने चुनाव के प्रचार के दौरान ही खुद को मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में पेश किया. वो कुरुबा जाति से आते हैं जिसके बीच जेडी(एस) की अच्छी पैठ है.
खिलाफ: उनकी बड़ी कमजोरी है कि वो कांग्रेस में नए हैं और पार्टी के कद्दावर नेता उन्हें कतई मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहेंगे.
एम मल्लिकार्जुन खड़गेवो कांग्रेस के वरिष्ठ तम नेताओं में से एक हैं जो एक बार सांसद और नौ बार विधायक रह चुके हैं.
दलित परिवार से आने वाले खड़गे के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा और उन्हीं की वजह से हैदराबाद-कर्णाटक क्षेत्र में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है.
वो दो बार विपक्ष के नेता रह चुके हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इनके पक्ष में एक बड़ी बात ये है कि ये विभिन्न जातियों में भी लोकप्रिय हैं.
खिलाफ: फिलहाल वो केंद्रीय मंत्री ज़रूर हैं मगर हैदराबाद-कर्नाटक के अलावा वो राज्य के दूसरे क्षेत्रों में उतने लोकप्रिय नहीं हैं.
चूंकि वो पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हैं इसलिए उनका आसार थोड़े कम ही हैं. मगर सब कुछ पार्टी हाई कमान पर निर्भर करता है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वरजी परमेश्वर को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था. लेकिन वे विधानसभा चुनाव हार गए हैं.
बातें जो पक्ष में मानी जा रही थीं. वो दूसरों के मुकाबले सबसे कम उम्र के है. पढ़े लिखे हैं और पीएचडी की डिग्री भी उनके पास है. परमेश्वर को 10 जनपथ के करीब माना जाता है. उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस का इतना बेहतर प्रदर्शन रहा है.
मगर उनके खिलाफ सबसे बड़ी बात है कि वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को वो पसंद नहीं हैं क्योंकि वो सबसे कम उम्र वाले हैं. कई नेताओं से उनका मतभेद भी है. ऐसा समझा जाता है कि एस एम् कृष्णा से भी उनके सम्बन्ध वैसे नहीं हैं और वो चुनाव भी हार गए हैं.
एम वीरप्पा मोइलीमोइली पहले भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं
इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में वित्त राज्य मंत्री रहे मोइली के पक्ष में गांधी परिवार की वफादारी है.
उनका इतने सालों का राजनितिक अनुभव भी उनके पक्ष में है. वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और साफ़ सुथरी छवि भी रखते हैं.
फिलहाल केंद्रीय मंत्री हैं और प्रशासन चलाने का काफी अनुभव रखते हैं.
खिलाफ: उनकी सिर्फ एक बाधा है - उनका केंद्रीय मंत्री होना. दूसरा, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के नेताओं के बीच उनकी उतनी पकड़ भी नहीं है.
एसएम कृष्णाविदेश मंत्री रह चुके हैं कृष्णा
कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता जो 83 साल के हैं. महाराष्ट्र के राज्यपाल रहने के अलावा वो केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं और सरकार चलाने का बड़ा अनुभव भी रखते हैं.
वो राज्य की दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिगा से आते हैं.
खिलाफ: उनकी उम्र उनकी सबसे बड़ी अड़चन है. दूसरी बात, उन्होंने राज्य में टिकट बटवारे को लेकर भी खुलकर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की थी.
उनके इस तेवर से पार्टी के अंदर ही उनके नाम जा काफी विरोध है.
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