खोखा धारकों ने की दुकानों के आगे जमीन की पैमाइश, अब जाएंगे कोर्ट

Hamirpur News - बस स्टैंड के ठीक सामने दशकों पहले बसाए गए खोखाधारक प्रशासन के अड़ियल रवैये के चलते अब मजबूरन रोजी-रोटी का जरिया...

Nov 11, 2019, 07:20 AM IST
बस स्टैंड के ठीक सामने दशकों पहले बसाए गए खोखाधारक प्रशासन के अड़ियल रवैये के चलते अब मजबूरन रोजी-रोटी का जरिया बचाने को लगता कोर्ट की शरण जाने की तैयारी में हैं। जबकि नप से ज्यादात्तर को स्वयं उठ जाने को नोटिस भी जारी हो गए हैं।

बिगड़ती बात देखकर अब वकीलों से सलाह-मशबरे का दौर भी शुरू हो गया है। शनिवार को तो वीरेंद्र मल्होत्रा के नेतृत्व में कुछ खोखाधारकों ने सड़क चौड़ाई की सच्चाई जानने को स्वयं खोखों के आगे सड़क की और इनके पीछे खाली पड़ी जमीन की पैमाइश भी कर डाली है। पैमाइश के बाद किशोरी लाल शर्मा के पास अाकर मल्होत्रा, शंति स्वरूप सहित कुछ एक खोखाधारकों ने कई प्वाइंट पर चर्चा करके अपने पक्ष में जो जो कागजी साबूत हो सकते उन पर भी मंथन किया।

हालांकि दो दिन पहले नगर परिषद की बैठक में पार्षदों ने इन्हें यहां से न हटाने का प्रस्ताव पास किया है। लेकिन इसे प्रशासन मानेगा या नहीं। इस पर संशय के चलते वे हर संभव बचाव करना चाहते हैं। वहीं खोखाधरकों का कहना है कि अगर प्रशासन अपने रवैय पर उड़ा रहा तो आने वाले समय में उन्हे अपने परिवारों का पालन पोषण करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंेकि उनके पास रोजीरोटी का आैर कोई भी साधन नहीं है।

बस स्टैंड के सामने सड़क चौड़ाई की पैमाइश करते खोखाधारक।

खेल स्टेडियम की दुकानें देने की उनसे नहीं हुई बात

वीरेंद्र मल्होत्रा, शांति स्वरूप और प्रधान किशोरी लाल शर्मा का कहना है कि जो पक्के खोखे पीछे स्टेडियम में बनाए गए हैं। वह किसी और के लिए बनाए गए थे। इन सभी का कहना है कि खेल स्टेडियम में बनाए गए खोखे उन्हें देने के लिए कोई बात नहीं हुई थी। जो 100 खोखे बने हैं बेहद छोटे हैं और उनमें पानी का रिसाब होता है। ऐसे में इनमें काम करना आसान नहीं है। जो मौजूदा खोखे इस वर्ग के पास हैं, उन्हें ही पीछे हटाकर बनाया जाए।

आगे सड़क तो पीछे टूरिज्म की जगह:इन 58 खोखाधारकों के अागे पीडब्ल्ूडी की तो पीछे टूरिज्म की जमीन है। सड़क के साथ अब डीसी ने फुटपाथ बनाने के आदेश विभाग को दिए हैं, इसके ऊपर खोखों के छज्जे आ रहे, तो कई के शटर की जगह भी सड़क की बता दी है। फ्रंड से दो फुट छज्जे भी तोड़े तो, यह खोखे पहले ही करीब 6 फुट बने हैं, तो बचेगा क्या? हालांकि पानी निकासी की नाली है। खोखाधारकों का कहना है कि सरकार ने करीब 20-25 साल पहले इन खोखों के पीछे कांप्लेक्स बनाने को जमीन टूरिज्म के नाम की थी, इसमें धरातल पर हमें 3.95 लाख रुपए की दुकान देकर बसाया जाना था। इसके लिए हमारे 50-50 हजार डीसी के पास जमा हुए थे। सरकार बदलने पर बात सिरे नहीं चढ़ी, तो प्रशासन ने कई साल बाद हमें सिर्फ 42-42 हजार लौटाए, जमीन टूरिज्म के नाम ही रही। तब तो हम सबकी नजर में अलॉटी थे, क्योंकि नगर परिषद ने इन्हें बनाकर दिया है, किराया लगातार दे रहे, अब कैसे अवैध कब्जाधारी हो गए।

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