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किरण बेदी के बारे में ख़ास बातें

6 वर्ष पहले
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गीता पांडे

बीबीसी संवाददाता

किरण बेदी दिल्ली चुनाव के क़रीब एक महीने पहले भाजपा में शामिल हुईं. पार्टी में शामिल होने के चंद दिनों के भीतर भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया.

इस चुनाव में पूर्व आईपीएस किरण बेदी का मुक़ाबला उनके पूर्व साथी अरविंद केजरीवाल से था. साल 2011 में अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में किरण और अरविंद दोनों साथ थे.

2015 में दोनों दो अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आए.

किरण बेदी के बारे में ख़ास बातें 65 वर्षीय किरण बेदी का जन्म 1949 में पंजाब के अमृतसर में हुआ था. किरणबेदी डॉट कॉम के अनुसार उनके पुरखे पेशावर से आए थे. उनके परिवार में चार बहनें थीं, जिनमें किरण दूसरे नंबर पर हैं. बाक़ी सभी बहनें विदेश में बस चुकी हैं. किरण बेदी लॉन टेनिस की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनीं. छोटी बहन अनु पेशावरिया भारत की अग्रणी टेनिस खिलाड़ियों में हैं. किरण 1972 में देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं. आईपीएस के रूप में उन्हें दिल्ली एवं केंद्रशासित प्रदेश कॉडर मिला. उनकी पहली पोस्टिंग दिल्ली में ही हुई. उन्हें 1979 में उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला. 1982 के एशियाई खेलों के दौरान किरण को दिल्ली में ट्रैफ़िक सुधार का ज़िम्मा सौंपा गया था. किरण को 1993 में दिल्ली का इंस्पेक्टर जनरल (जेल) बनाया गया. तिहाड़ जेल में किए गए उनके कार्यों के लिए उन्हें 1994 में रमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला. किरण संयुक्त राष्ट्र के लिए भी काम कर चुकी हैं. पुलिस सेवा में उनकी आखिरी नियुक्ति डायरेक्टर जनरल (ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के रूप में थी. उन्होंने साल 2007 में पुलिस सेवा से स्वैच्छिक अवकाश ले लिया. बेदी ने नवज्योति इंडिया फ़ाउंडेशन और इंडिया विज़न फाउंडेशन नामक एनजीओ की स्थापना की. किरण बेदी कई किताबें लिख चुकी हैं. नौकरी से इस्तीफ़ा देते समय किरण ने कहा था कि वो अपना समय समाज सेवा और लेखन को देना चाहती हैं. साल 2011 में वो अन्ना के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़ीं. नवंबर 2012 में जब केजरीवाल राजनीतिक पार्टी बनाने के मुद्दे पर अन्ना से अलग हुए तो बेदी ने अरविंद का विरोध किया. दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 जनवरी, 2015 को वो भाजपा में शामिल हुईं. भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया. कई विवाद भी रहे. 1980 के दशक के आखिर में दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत में विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों पर लाठीचार्ज़ को लेकर भी वह विवादों में वो रहीं. मणिपुर में मिजोरम की डीआईजी (रेंज) रहते हुए अपनी बेटी को मेडिकल कॉलेज में विशेष कोटे से दाखिला दिलाने को लेकर वो विवादों में आईं. दिल्ली का पुलिस कमिश्नर न बनाए जाने पर उन्होंने अपने साथ लैंगिक भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया था. अन्ना आंदालोन के दौरान भी वह एक हवाई टिकट को लेकर विवाद में घिरी थीं. किरण एक संस्था के बुलावे पर लेक्चर देने इकॉनमी क्लास में गईं, लेकिन उन्होंने बिज़नेस क्लास के टिकट का पैसा लिया था. केजरीवाल के पार्टी बनाने के बाद किरण ने कहा था कि वह कभी राजनीति में नहीं आएंगी. भाजपा में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले पुराने ट्वीट फिर से विवादों के केंद्र में आ गए.

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